भारत में आया LONG TOUR SEASON, जो पृथ्वी से लेकर ब्रह्मांड तक की FREE यात्रा कराता है !

* चातुर्मास : स्वास्थ्य, संयम, साधना और स्वयं से साक्षात्कार का ‘यात्रा पथ’

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 12 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। मौसम, वातावरण और जलवायु को लेकर इन दिनों दुनिया का हर देश सुर्खियों में बना हुआ है। जहाँ तक मौसम यानी ऋतुओं का प्रश्न है, तो भारत में मुख्यत: वर्षा, शीत और ग्रीष्म ऋतुएँ हैं। वैसे इन तीनों ऋतुओं के परस्पर संक्रमण के दौरान जो ऋतुएँ रहती हैं, उन्हें शरद, वसंत और शिशिर कहा जाता है। इस तरह भारत में कुल छह ऋतुएँ हुईँ, परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि भारत में आज यानी 12 जुलाई, 2019 गुरुवार से इन छह ऋतुओं से परे एक अनोखी लंबी यात्रा ऋतु या LONG TOUR SEASON का आरंभ हुआ है।

इस विशाल ब्रह्मांड में स्थित हमारी छोटी-सी पृथ्वी पर कुल 233 देश हैं, परंतु आपको यह जान कर भी आश्चर्य होगा कि आज से जो लम्बी यात्रा का मौसम प्रारंभ हुआ है, वह मौसम केवल और केवल भारत देश में ही आता है। इस यात्रा की एक और आकर्षक और सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मौसम के दौरान आप न केवल विश्व (पृथ्वी), अपितु पूरे ब्रह्मांड की यात्रा कर सकते हैं और वह भी निःशुल्क। इसके लिए आपको कोई किराया नहीं देना होगा। यद्यपि वर्ल्ड टूर करने की महेच्छा रखने वालों के लिए यह लम्बी यात्रा मौसम आशीर्वाद समान है, परंतु एक निराश करने वाली विशेषता भी है इस यात्रा की कि इसमें हर व्यक्ति को केवल अकेले ही जाने की अनुमति होती है।

चलिए, आपको अधिक रहस्यों के जाल में न उलझाते हुए बता ही देते हैं कि अंतत: यह कैसा मौसम है, जो केवल भारत में आया है, मुफ्त में लम्बी यात्रा पर ले जाता है और पूरे ब्रह्मांड की सैर कराते हुए स्वयं से भी मिलाने में सहायता करता है ? तो इस मौसम का नाम है चातुर्मास, जिसे चौमासा भी कहते हैं। चार महीनों का यह लम्बी यात्रा मौसम केवल भारत में ही आता है। भारत की वैदिक सनातनी परम्परा के अनुसार यह चातुर्मास अषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी गुरुवार 12 जुलाई, 2019 से आरंभ हुआ है, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् 8 नवम्बर, 2019 तक चलेगा। देव शयनी एकादशी के साथ चातुर्मास आरंभ हुआ है, जो देव प्रबोधिनी एकादशी के साथ सम्पन्न होगा।

ईश्वर के निकट जाने का स्वर्ण अवसर

चातुर्मास हिन्दू धर्म संस्कृति और परम्परा का महत्वपूर्ण अंग है। कहते हैं कि देव शयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन योग निद्रा से बाहर आते हैं। शास्त्रों के अनुसार देव शयनी एकादशी का अर्थ देवताओं की रात्रि का आरंभ है। भगवान विष्णु की योग निद्रा परमोच्च ध्यान है अर्थात् इन चार महीनों यानी चातुर्मास के दौरान दैवीय शक्तियों को एकत्रित कर एक शक्ति पुंज में बदलने का उत्तम समय होता है। इस चातुर्मास के दौरान व्यक्ति स्वास्थ्य, संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए स्वयं से साक्षात्कार के यात्रा पथ की ओर अग्रसर हो सकता है।

एकमात्र भारतीय संस्कृति में चातुर्मास व्यवस्था

दुनिया के किसी भी देश में स्वयं की ओर आंतरिक यात्रा करने के लिए विशेष चातुर्मास व्यवस्था की गई है। हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म तीनों में चातुर्मास का महत्व है। इन चार महीनों के दौरान कोई भी मनुष्य चाहे तो केवल स्वयं के माध्यम से, स्वयं के प्रयास से और स्वयं से साक्षात्कार की दिशा में प्रयाण कर सकता है। धर्मग्रंथों के अनुसार चातुर्मास के ये चार महीने श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के दौरान मनुष्य स्वास्थ्य, संयम, साधना और स्वाध्याय के माध्यम से ईश्वर के सान्निध्य की ओर यात्रा कर सकता है। चातुर्मास के दौरान खान-पान में संयम रखने से स्वास्थ्य श्रेष्ठ रहता है और इच्छाओं पर नियंत्रण करने से संयम बना रहता है, जिससे जप-तप, ध्यान और अध्यात्म की सहायता से स्वयं यानी परमात्मा के निकट जाने का अवसर मिलता है। वैसे हमारी भारतीय संस्कृति और परम्पराओं में निहित सभी व्रत, उपवास, उपासना, त्योहार, पर्व आदि का वैज्ञानिक महत्व है और यही कारण है कि चातुर्मास केवल धार्मिक नहीं, अपितु वैज्ञानि दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। चातुर्मास वर्षा ऋतु के दौरान आता है, जब मनुष्य की पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है। हवा में नमी रहती है। कीड़े-मकोड़े और जीव-जंतुओं का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रामक सहित सभी प्रकार की बीमारियाँ फैलने की आशंका रहती है। चातुर्मास के दौरान यदि खान-पान में सावधानी रखी जाए और संतुलित जीवनशैली अपनाई जाए, तो चातुर्मास उसके वास्तविक अर्थ को साकार करते हुए ईश्वर का सान्निध्य और साक्षात्कार कराने का उत्तम माध्यम बन सकता है।

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