VIDEO : 370 हटने के बाद कश्मीर में दीवाली, पीएम मोदी ने इस ‘परिवार’ संग मनाई दीपावली

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। दीपावली का त्योहार पूरे देश में आम और खास हर तबके में धूमधाम से मनाया जा रहा है। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं। दीपावली पर विशेष कर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपमालाएँ प्रज्वलित की जाती हैं। मिठाई से मुँह मीठा किया जाता है और पटाखे फोड़ कर खुशी का इज़हार किया जाता है। दीपावली का पर्व भारत का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक पर्व माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार दीपावली का पर्व सतयुग से मनाया जाता है, जिसमें कई पर्व मिल कर एक पर्व-श्रृंखला बनाते हैं। समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी को भगवान धन्वंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, तभी से उनके प्रागट्य दिवस को ‘धनतेरस’ के रूप में मनाया जाता है। इसी दौरान माता लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। इसलिये दीप जलाकर उनकी पूजा करने का विधान शामिल हुआ। तत्पश्चात त्रेतायुग में भगवान राम के अयोध्या लौटने पर उनके स्वागत में पूरी अयोध्या नगरी को दीपों की रोशनी से सजाया गया था, तब से लक्ष्मी पूजन के साथ दीप मालाएँ जलाकर रोशनी से अमावस के अंधकार को दूर करने के प्रतीक के रूप में दीपावली मनाई जाने लगी। द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बनाने वाले नरकासुर का कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन वध करके सभी कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसलिये चतुर्दशी का दिन भी ‘नर्क चतुर्दशी’ के रूप में मनाया जाने लगा। दीपावली के अगले दिन भगवान कृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा की जाती है। इसके अगले दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस प्रकार यह पंच-पर्व की श्रृंखला है।

धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में पहली दीवाली

कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली विवादास्पद धारा 370 गत 5 अगस्त को हटने के बाद जम्मू कश्मीर में यह पहली दीवाली मनाई जा रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी अपने परिवार यानी जवानों संग दीवाली का त्योहार मनाने के लिये कश्मीर के राजौरी में पहुँच चुके हैं। वे यहाँ दोपहर के समय लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) के पास जवानों के संग दीपावली का पर्व मना रहे हैं। पीएम मोदी जवानों को अपना परिवार कहते हैं और 2014 से पीएम बनने के बाद वे हर साल जवानों के साथ ही दीवाली का पर्व मनाते हैं। 2014 में उन्होंने सियाचिन में जवानों के साथ दीवाली मनाई थी। इसके बाद 2015 में पंजाब सीमा पर जवानों के साथ, 2016 में हिमाचल प्रदेश में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों संग सीमावर्ती क्षेत्र में दीवाली मनाई थी। पीएम मोदी ने 2017 में जम्मू कश्मीर के गुरेज सेक्टर में जवानों के साथ दीवाली मनाई थी और पिछले वर्ष 2018 में उन्होंने भारत-चीन सीमा के निकट सेना और आईटीबीपी के जवानों संग दीवाली का त्योहार मनाया था।

पीएम मोदी ने ट्विटर पर दी बधाई

इससे पहले पीएम मोदी ने सुबह ट्विटर के माध्यम से देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएँ दी थी और मन की बात कार्यक्रम में भी दीवाली का जिक्र किया। उन्होंने मन की बात कार्यक्रम में भी देशवासियों को दीवाली की शुभकामनाएँ देते हुए स्वदेशी वस्तुएँ खरीदने पर भार दिया और कहा कि स्थानीय लोगों, बुनकरों और कारीगरों से सामान खरीद कर अपने लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनायें।

मन की बात में राम जन्मभूमि पर फैसले का जिक्र

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में राम जन्मभूमि मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करके सभी को अचंभित कर दिया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिये समाज हमेशा सतर्क रहा है। इसका उदाहरण सितंबर 2010 में अयोध्या केस में आये इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मिलता है। जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राम मंदिर पर फैसला सुनाया था तब भाँति-भाँति के लोग मैदान में उतर आये थे। कुछ बयानबाजों और बड़बोलों ने मात्र स्वयं को चमकाने के लिये न जाने कैसे-कैसे बयान दिये थे। यह सब पाँच-दस दिन चलता रहा था, परंतु राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, सभी संप्रदायों के लोगों, साधु-संतों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने बहुत संतुलित ढंग बयान दिये थे। उन्होंने न्यायपालिका का सम्मान किया था और देश ने आनंददायक बदलाव महसूस किया था। इससे पता चलता है कि संगठित देश में कितनी बड़ी ताकत है।

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का आने वाला है फैसला

मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी का राम मंदिर मामले का जिक्र करना इसलिये अचंभित करता है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस रंजन गोगोई और उनके नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एस.ए. बोबड़े, न्यायमूर्ति धनंजय वाइ. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. अब्दुल नज़ीर शामिल हैं ने गत 16 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी की है और फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध दायर हुई लगभग 18 अपीलों पर 6 अगस्त से प्रति दिन सुनवाई शुरू की थी और 40 दिन में सुनवाई पूरी की है। चूँकि चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवा निवृत्त हो रहे हैं, इसलिये उनकी सेवा निवृत्ति से पूर्व इस मामले का सुप्रीम फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।

आज ही सेना का ‘इन्फैंट्री डे’ भी है

यह भी अच्छा संयोग है कि 27 अक्टूबर को पूरा देश दीवाली का जश्न मना रहा है और देश के पीएम नरेन्द्र मोदी जवानों के संग जिस कश्मीर में दीवाली मना रहे हैं, उसी कश्मीर से जुड़े भारतीय सेना के एक गौरव की कहानी भी जुड़ी है। रविवार को पैदल सेना या इन्फैंट्री (INFANTRY) भारतीय सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण अंग है। आज ही के दिन 1947 में कश्मीर पर कब्जा करने के इरादे से घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी कबाइलियों को खदेड़ कर भारतीय पैदल सेना ने विजय पाई थी और कश्मीर को कबाइलियों से मुक्त कराया था। इसलिये हर साल 27 अक्टूबर को पैदल सेना दिवस या इन्फैंट्री डे मनाया जाता है।

यहाँ देखिये जवानों की दीवाली…

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