FACT CHECK : शनिवार के दिन नहीं पड़ी थी ‘शनिवार वाडा’ की नींव, जानिए रोचक तथ्य

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 28 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। मुंबई के शिवाजी पार्क (SHIVAJI PARK-MUMBAI) में गुरुवार को महाराष्ट्र की नई सरकार (NEW MAHARASHTRA GOVERNMENT) के शपथ ग्रहण के लिये भव्य आयोजन किया गया है। समारोह के मंच को पुणे में स्थित ‘शनिवार वाडा (SHANIVARWADA)’ की तर्ज पर बनाया गया है। इस लिए शनिवार वाड़ा आज कल मीडिया (MEDIA) की सुर्खियों में है। वैसे तो यह किला 18वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के दौरान बना था और छत्रपति शाहु के प्रधान यानी मंत्री (पेशवा) बाजीराव प्रथम ने इसका निर्माण कराया था। यह किला 1818 तक पेशवाओं की प्रमुख गद्दी भी रहा, परंतु अब यह किला या दुर्ग देश के टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस (TOP MOST HAUNTED PLACE OF INDIA) में गिना जाता है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स (MEDIA REPORTS) में बताया जाता है कि शनिवार के दिन इस महल की नींव रखी गई थी, इसलिये इस महल का नाम शनिवार वाड़ा पड़ा, परंतु जिस तारीख को इस महल की नींव रखे जाने का उल्लेख है, उस तारीख को कौन-सा दिन था ? इस बारे में जब ‘युवाPRESS’ ने सच्चाई खँगाली तो पता चला कि शनिवार वाड़ा का शनिवार से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। यह भी पता चला कि जिस 10 जनवरी, 1730 को इस महल की नींव रखे जाने का उल्लेख है, उस तारीख को शनिवार नहीं अपितु मंगलवार था। यही नहीं, जिस तारीख 22 जनवरी 1732 को नवनिर्मित किले का उद्घाटन होने की बात कही जाती है, उस तारीख को भी शनिवार नहीं, अपितु रविवार था।

क़िले के बारे में रोचक तथ्य

यह क़िला मराठा साम्राज्य के पेशवाओं की गद्दी रहा है और उनकी धरोहर, विरासत, ऐतिहासिक निशानी के रूप में जाना जाता है। यह क़िला अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिये भी प्रसिद्ध है। कदाचित इसी महत्व को देखते हुए शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे (SHIV SENA SUPREMO UDDHAV THACKERAY) ने पहली बार महाराष्ट्र के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिये इस किले नुमा मंच बनवाया है।

अन्यथा इस क़िले के साथ काले अध्याय अधिक जुड़े हैं। इस किले में कई बार आग लगी और इस किले के अंदर की अधिकांश इमारतें आग लगने के कारण ही नष्ट हुईं। अभी हम इस किले से जुड़े घटनाक्रमों की चर्चा नहीं करेंगे। हम इस किले के नाम को लेकर जो चर्चा है, उस पर ध्यान केन्द्रित करना चाहते हैं।

हमें बड़े आश्चर्य के साथ कहना पड़ रहा है कि बड़े-बड़े मीडिया हाउसेज़ (MEDIA HOUSES) ने शनिवार वाडा किले के नाम को लेकर जो तारीख और दिन लिखा है, उसके बारे में किसी के मन में भी यह विचार क्यों नहीं आया कि उस तारीख और दिन की तस्दीक कर ली जाए। क्योंकि शनिवार वाडा के विषय में मीडिया में जो भी रिपोर्ट्स मिलती हैं, उन सभी में किले की नींव रखे जाने की तारीख 10 जनवरी, 1730 और दिन शनिवार लिखा मिलता है। हमने जब इस तारीख को पड़ने वाले दिन पर रिसर्च की तो चौंकाने वाला तथ्य हमारे सामने आया। जिस 10 जनवरी-1730 के दिन किले की नींव रखे जाने का उल्लेख है, मीडिया रिपोर्ट्स और यहाँ तक कि विकीपीडिया (अंग्रेजी) (WIKIPEDIA) में भी उस दिन का उल्लेख शनिवार के रूप में मिलता है। जब हमने गूगल (GOOGLE) पर 10 जनवरी-1730 लिख कर सर्च किया तो इस दिन मंगलवार होने का तथ्य सामने आया।

गूगल पर बताया जा रहा दिन सही है या कोई तकनीकी भूल है, यह जानने के लिये हमने मराठी कलेंडर सर्च किया, परंतु हम यह देख कर फिर चौंक पड़े कि मराठी कैलेंडर भी गूगल की ओर से 10 जनवरी, 1730 का दिन शनिवार बताए जाने को सही बता रहा है। मराठी कैलेंडर के अनुसार भी 10 जनवरी, 1730 को शनिवार नहीं, अपितु मंगलवार का दिन था। तस्वीरों के माध्यम से आप भी देखिये और जानिए क्या है सत्य ?

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