VIDEO-PHOTO : ‘हरे कृष्ण’ केवल एक मंदिर नहीं, मूवमेंट है कृष्ण भक्तों की…

* गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अहमदाबाद के भाडज क्षेत्र में स्थित हरे कृष्ण मंदिर में दीपावली के अगले दिन यानी गुजराती नव वर्ष वि. सं. 2076 के प्रथम दिन गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव के दौरान स्वर्ण रथ यात्रा निकाली गई, गौ पूजा की गई। भगवान गोवर्धन की आरती उतारी गई। दीपोत्सव मनाया गया। भजन संध्या का आयोजन किया गया, तत्पश्चात् अन्नकूट दर्शन का भी आयोजन हुआ। महोत्सव का विशेष आकर्षण गोवर्धन पर्वत था, जो शुद्ध शाकाहारी केक से तैयार किया गया था। इस महोत्सव के दौरान ‘युवाPRESS’ के मुख्य संपादक आई. के. शर्मा तथा गांधीनगर महानगरपालिका की महापौर रीटा पटेल उपस्थित रहे। इस मंदिर में पूरे वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर गीता जयंती तक सभी प्रकार के धार्मिक उत्सव भक्ति-भावपूर्वक और हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं, परंतु हम उत्सवों की नहीं, अपितु इस मंदिर के विषय में बात करेंगे।

कैसे आरंभ हुआ कृष्ण भक्ति का आंदोलन ?

यह मंदिर पश्चिमी अहमदाबाद शहर में स्थित है और केवल कृष्ण भक्तों के लिये ही नहीं, अपितु पर्यटकों के लिये भी आकर्षण का केन्द्र है। दरअसल यह एक मंदिर नहीं, अपितु कृष्ण भक्तों के लिये शुरू की गई एक मूवमेंट (आंदोलन) का हिस्सा मात्र है।

मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी श्यामचरण दासजी महाराज ने ‘युवाPRESS’ को बताया कि कृष्ण कृपामूर्ति श्रीमद् ए. सी. भक्ति वेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद ने अपने गुरु भक्ति सिद्धांत सरस्वतीजी महाराज के आदेशानुसार पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु 69 वर्ष की उम्र में 1965 में पश्चिमी देशों की यात्रा की और अमेरिका के न्यूयॉर्क में कृष्ण भावनामृत संघ (International Society for Krishna Consciousness) यानी ISKCON की स्थापना की। इसके माध्यम से उन्होंने पश्चिमी संस्कृति से ओतप्रोत मांसभक्षण और मदिरापान करके जीवन पथ से भटके लोगों को जीवन की सच्ची राह दिखाना प्रारंभ किया।

विदेशी नहीं, अपितु स्वदेशी है इस्कॉन

अंग्रेजों को भारतीय वैदिक साहित्य से परिचित कराने के लिये स्वामी श्रील प्रभुपादजी ने 12 वर्ष के भीतर वैदिक साहित्य का अंग्रेजी में भाषांतर करके टीका सहित 80 से अधिक ग्रंथ रत्नों को प्रकाशित किया, जिनके माध्यम से उन्होंने वहाँ के भटके हुए लोगों के जीवन से अंधकार को दूर किया और कृष्ण भावनामृत के प्रसाद से उनके जीवन को प्रकाशमान किया। उन्होंने बताया कि इस्कॉन को लेकर भारतीय लोगों में कुछ भ्रांतियाँ प्रवर्तमान हैं कि इस्कॉन मंदिरों में दान आदि से प्राप्त होने वाली आय विदेश चली जाती है, जबकि ऐसा नहीं है और यह केवल एक भ्रम है। इस्कॉन के संस्थापक भारतीय कृष्ण कृपा मूर्ति ए. सी. भक्ति वेदांत स्वामी श्रील प्रभुपादजी हैं और उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व भर में प्रचारित करने के लिये इसकी न्यूयॉर्क (अमेरिका) में 1966 में स्थापना की थी।

इस्कॉन ने जगाई विदेशियों में कृष्ण भक्ति की अलख

तत्पश्चात् इस्कॉन मूवमेंट ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों में भी प्रचारित हुई और वर्तमान में विश्व भर में 108 से अधिक मंदिर, आश्रम, गुरुकुल तथा कृष्ण समुदाय सहित विशाल संगठन कार्यरत् है। इस्कॉन केवल एक मंदिर नहीं, अपितु आंदोलन इसलिये भी है कि इसने विदेशियों को भारतीय संस्कृति से न सिर्फ परिचित कराया है, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति का प्रेमी और प्रशंसक भी बनाया है। यदि विदेशों में विदेशी लोग भारतीय परिवेश धोती-कुर्ता में सज्ज होकर ललाट पर तिलक लगाकर ‘हरे कृष्ण हरे राम’ का संकीर्तन करते दिखाई पड़ते हैं, तो यह इस्कॉन की कृष्ण भावनामृत मूवमेंट का ही प्रतिफल है। इतना ही नहीं, महंत केशवदास प्रभुजी ने तो यहाँ तक कहा कि यह भारतीयों के लिये गर्व की बात है कि भारतीय संस्कृति, वैदिक साहित्य और भगवान कृष्ण के विषय में हम से भी कहीं अधिक जानकारियाँ, ज्ञान, भक्ति और समर्पण विदेशी भक्तों में है, परंतु दूसरे शब्दों में कहें तो यह हमारे लिये शर्म की बात भी है, क्योंकि हम ही अपनी संस्कृति से दूर होते चले जा रहे हैं।

विरक्ति की कोई आयु नहीं होती

दयानंद सरस्वतीजी तथा उनके जैसे अनेक महापुरुषों ने जीवन-मृत्यु का सत्य तथा ईश्वरीय तत्व का सच्चा ज्ञान पाने के लिये घर-परिवार का त्याग किया था और वैदिक साहित्य का ज्ञान अर्जित किया था। इस्कॉन से जुड़ने वाले भी जब कृष्ण भक्ति में लीन होकर सांसारिक संबंधों से निवृत्त होने का मार्ग अपनाते हैं तो कुछ परिवारों के विरोध के चलते आज के दौर में उनके भक्ति मार्ग को बाधित करने का काम किया जाता है, जो कि अनुचित है। किसी भी व्यक्ति को संसार से किसी भी उम्र में विरक्ति हो सकती है। भारतीय इतिहास में ऐसे अनेक महापुरुष हैं, जिन्हें संसार से विरक्ति हुई और उन्होंने संन्यास लेकर ईश्वर भक्ति या ज्ञान साधना की। मीडिया और विशेष कर सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी घटनाओं को तुरंत प्रचारित किये जाने से आंदोलन को झटका जरूर लगता है, परंतु कृष्ण भक्तों का यह आंदोलन तमाम रुकावटों को पार करते हुए भी अविरत जारी है।

अहमदाबाद के हरे कृष्ण मंदिर में गोवर्धन पूजा का आयोजन

अहमदाबाद के हरे कृष्ण मंदिर में दीपावली के अगले दिन यानी गुजराती नव वर्ष वि. सं. 2076 के प्रथम दिन गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन किया गया। इस महोत्सव के दौरान स्वर्ण रथ यात्रा निकाली गई।

गौ पूजा की गई। भगवान गोवर्धन की आरती उतारी गई। दीपोत्सव मनाया गया। भजन संध्या का आयोजन किया गया, तत्पश्चात् अन्नकूट दर्शन का भी आयोजन हुआ। महोत्सव का विशेष आकर्षण गोवर्धन पर्वत था, जो शुद्ध शाकाहारी केक से तैयार किया गया था।

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