ब्रिटिश लग्ज़ुरियस कार कंपनी ROLLS ROYCE को ऐसे सबक सिखाया था भारत के एक महाराजा ने : जानिए कौन थे वे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 11 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। भारत जब अलग-अलग राजाओं की रियासतों में बँटा हुआ था और जब पूरा भारतवर्ष अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, उस समय अनेक राजाओं-महाराजाओं ने अंग्रेजों से कड़ा मुकाबला किया था। हालाँकि हम यहाँ किसी राजा-महाराजा के शौर्य की कहानी सुनाने नहीं जा रहे हैं, बल्कि भारत के एक ऐसे महाराजा की बात लेकर आपके सामने आए हैं, जिसने अपनी बुद्धिमत्ता से ब्रिटिशरों की नाक कही जाने वाली उस समय की रॉल्स रॉयस लग्जूरियस कार कंपनी की हैकड़ी निकाल दी थी।

अलवर के महाराजा जयसिंह प्रभाकर

भारत के राजा महाराजा अपने अजीम शौर्य और आन, बान, शान के लिये जाने जाते हैं। बात जब आत्म सम्मान की हो या रियासत की रक्षा की तो वह कुछ भी कर गुजरने से पीछे नहीं रहते थे। भारत के राजा-महाराजा अपने विचित्र फैसलों और अजीबो-गरीब शौक के लिये भी जाने जाते थे। इन्हीं में से एक थे अलवर के महाराजा जयसिंह प्रभाकर, जो देश-विदेश घूमने के शौकीन थे। वैसे तो राजा-महाराजाओं के आगे-पीछे उनके अंगरक्षकों की बड़ी फौज होती थी, परंतु महाराजा जयसिंह एक बार अकेले ही लंदन घूमने निकल गये थे। वहाँ वह बिल्कुल सामान्य वेषभूषा में सड़क पर सैर-सपाटे के लिये निकले तो उनकी नज़र उस समय की सबसे लग्जूरियस ब्रिटिश कार कंपनी रॉल्स रॉयस के शोरूम पर पड़ी। वह शोरूम में गये और वहाँ खड़ी एक से बढ़कर एक लग्जूरियस कार को आगे-पीछे घूम-घूमकर देखने लगे। इसके बाद उन्होंने एक सेल्समैन को कार की कीमत पूछने के लिये अपने पास बुलाया तो सेल्समैन ने उनके साधारण कपड़ों पर नज़र डालने के बाद उनका अपमान कर दिया और उन्हें शोरूम से बाहर निकाल दिया।

ब्रिटिश कंपनी को सबक सिखाने की ठानी

महाराजा जयसिंह प्रभाकर को सेल्समैन के इस व्यवहार से बहुत गहरी ठेस लगी और उन्होंने रॉल्स रॉयस को सबक सिखाने की ठान ली। उस समय तो वह अपमान का घूँट पी गये और कुछ नहीं बोले। वहाँ से चुपचाप चले गये। जब वह भारत लौटे तो उन्होंने कंपनी को उसकी सबसे महँगी 6 कारों का ऑर्डर दिया और उन कारों को भारत भिजवाने के लिये कहा। कंपनी ने भी ऑर्डर के मुताबिक अपनी सबसे महँगी और अत्याधुनिक लग्जूरियस सुविधाओं वाली 6 कारें अलवर भिजवा दी।

दुनिया की सबसे महंगी कारों से लगवाई झाड़ू

आपको बता दें कि रॉल्स रॉयस कार दुनिया भर में इतनी वैभवशाली कार मानी जाती थी कि बड़े-बड़े लखपति भी इस कार की सवारी करने के लिये तरसते थे। महाराजा जयसिंह ने दुनिया की इन सबसे महँगी 6 कारों की छतें निकलवाकर सभी कारों को अपनी रियासत अलवर में कचरा इकट्ठा करने के काम में लगाया और शहर में उनसे झाड़ू लगवाई। जिन कारों में बैठने का लोग सपना संजोते थे, उन कारों में शहर का कचरा भरा जाने लगा। यह खबर तेजी से दुनिया भर में फैलने लगी कि भारत में एक महाराजा के यहाँ दुनिया की सबसे महँगी कारों को कचरा उठाने के काम में लगाया गया है। इससे ब्रिटिश कार कंपनी की साख घटने लगी, जिस कार में कचरा भरा जाता हो, उस कार को कौन खरीदे ? सब लोग दुनिया की नंबर वन कार का तिरस्कार करने लगे और उसकी साख पर तंज कसने लगे।

कंपनी को महाराजा से माँगनी पड़ी माफी

कंपनी की इतनी फजीहत हुई कि उसे महाराजा को पत्र लिखकर अपने सेल्समैन की ओर से किये गये दुर्व्यवहार के लिये माफी माँगनी पड़ी। चूँकि महाराजा का कंपनी को सबक सिखाने का उद्देश्य पूरा हो चुका था, इसलिये महाराजा ने दरियादिली दिखाते हुए कंपनी को माफ कर दिया। इसके बाद कंपनी ने महाराजा को 6 नई रॉल्स रॉयस कारें मुफ्त में भेंट की। इस प्रकार महाराजा जयसिंह ने बिना कोई शौर्य या पराक्रम दिखाए केवल अपनी बुद्धिमत्ता से ब्रिटिशरों की नाक काट दी और उन्हें शर्मसार कर दिया। उन्होंने अपना बदला भी ले लिया और साथ ही साथ दुनिया को भी दिखाया कि भारत के राजा-महाराजा किसी से कम नहीं।

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