क्या है करतारपुर कोरिडोर समझौता, जिस पर 24 अक्टूबर को होंगे हस्ताक्षर

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कोरिडोर को लेकर जो समझौता 23 अक्टूबर बुधवार को होने वाला था, वह अब 24 अक्टूबर गुरुवार को होगा। भारतीय सिख दर्शनार्थियों को बिना वीज़ा के पाकिस्तान में स्थित करतारपुर गुरुद्वारे में दर्शन के लिये जाने देने से सम्बंधित इस समझौते पर दोनों देश हस्ताक्षर करने वाले हैं। समझौते में अन्य सभी बिंदुओं पर दोनों पक्षों में सहमति हो गई है, परंतु एक बिंदु पर भारत को कड़ी आपत्ति है कि पाकिस्तान भारतीय दर्शनार्थियों से कोरिडोर का उपयोग करने के लिये 20 डॉलर (लगभग 1,400 रुपये) शुल्क लेने पर अड़ा है। भारत ने पाकिस्तान से शुल्क नहीं लेने का अनुरोध किया है, परंतु पाकिस्तान टस से मस नहीं हो रहा है। पाकिस्तान इस शुल्क से 3.65 लाख डॉलर यानी लगभग 258 करोड़ भारतीय रुपये और लगभग 571 करोड़ पाकिस्तानी रुपये कमाने की मंशा रखता है। हालाँकि आपत्ति के बावजूद भारत सरकार दर्शनार्थियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने को राजी हो गया है।

क्या है करतारपुर कोरिडोर समझौता ?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में रावी नदी के दूसरे छोर पर करतारपुर साहिब गुरुद्वारा है, जहाँ सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम दिन बिताये थे। इसलिये इस गुरुद्वारे से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएँ जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान ने भारतीय दर्शनार्थियों के लिये इस गुरुद्वारे के द्वार खोलने का ऐलान किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच भारत के पंजाब से पाकिस्तान के पंजाब में इस गुरुद्वारे तक आवागमन करने के लिये विशेष कोरिडोर बनाने पर सहमति हुई थी। भारत में यह कोरिडोर पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित मान गाँव के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में नरोवाल जिले में शकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड गाँव में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से जोड़ता है, जो रावी नदी के पश्चिम में स्थित है। करतारपुर गुरु नानकदेव की कर्मस्थली रहा है और उन्होंने यहाँ जीवन के 18 साल बिता कर अंतिम साँस ली थी। यह गुरुद्वारा भारतीय सीमा से लगभग 3 से 4 कि.मी. की दूरी पर है।

अभी भारत ने सीमा के निकट एक विशाल टेलिस्कॉप लगाया है, जहाँ से सिख श्रद्धालु करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं। इस कोरिडोर का उद्देश्य सिख श्रद्धालुओं के लिये गुरु नानकदेव की पवित्र स्थली तक पहुँच और आवाजाही को आसान बनाना है। भारत में इसका उद्घाटन 26 नवंबर 2018 को उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया था। अब 9 नवंबर को पीएम मोदी इस कोरिडोर का उद्घाटन करेंगे।

  • करतारपुर कोरिडोर समझौते में दोनों देशों के बीच कोरिडोर के संचालन को लेकर जिम्मेदारियाँ सुनिश्चित की गई हैं।
  • इसमें भारतीय दर्शनार्थियों को बिना वीज़ा के एक पहचान पत्र के साथ करतारपुर साहिब दर्शन के लिये पाकिस्तान में प्रवेश देने का प्रावधान किया गया है।
  • इस समझौते में पाकिस्तान की ओर से भारतीय दर्शनार्थियों के आने और लौटने को लेकर कुछ पद्धतियाँ सुनिश्चित की हैं।
  • भारत की ओर से समझौते में प्रति दिन कम से कम 5,000 दर्शनार्थियों को पाकिस्तान में प्रवेश देने की बात कही गई है। इसी के साथ सप्ताह में हर दिन आवागमन करने की अनुमति देने की बात कही गई है। किसी भी दिन आवागमन बंद नहीं रखने की शर्त रखी गई है।
  • पाकिस्तान की ओर से भारतीय दर्शनार्थियों से शुल्क लेने की शर्त रखी गई है, जिस पर भारत की ओर से आपत्ति जताई गई है और पाकिस्तान से यह शुल्क नहीं लेने को कहा गया है। चूँकि पाकिस्तान शुल्क लेने पर अड़ा हुआ है। इसलिये भारत शुल्क लिये जाने के बावजूद दर्शनार्थियों की धार्मिक भावनाओं के लिये समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार हुआ है। दोनों देशों के केन्द्रीय अधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

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