‘बेटा हो तो ऐसा’ : जानिए माँ-बेटे के आदर्श प्रेम की ऐसी कहानी, जो आपकी आँखें नम कर देगी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। आज के इस दौर में अधिकांश घरों में रिश्तों पर कलयुगी प्रभाव देखने को मिलता है। किसी घर में शादी के बाद बेटे माता-पिता का त्याग करके पत्नी के साथ अलग रहने चले जाते हैं, तो कुछ कलयुगी बेटे और बहुओं द्वारा बूढ़े माँ-बाप को घर से निकाल देने के किस्से भी सुनने को मिलते हैं। यहाँ तक कि कुछ कलयुगी संतानें तो खुद अपने वृद्ध माता-पिता को वृद्धाश्रमों में छोड़ आते हैं, परंतु ऐसे समय में भी कुछ गिने-चुने माता-पिता ऐसे हैं, जिन्हें आदर्श संतानों की प्राप्ति हुई है। धन्य हैं ऐसे माता-पिता और धन्यवाद है उन्हें समाज को ऐसे आदर्श पुत्र देने के लिये। आज जब कोई रिश्ता कलयुग के प्रभाव से बच नहीं पाया है और हर रिश्ते को दागदार करने वाली संतानें जन्मी हैं, वहीं एक माँ के लाल ने दुनिया को माता-पुत्र के ऐसे अथाह प्रेम का दृष्टांत प्रस्तुत किया है, जिसको सलाम करने को जी चाहता है, जिसका नाम सम्मान से लेना चाहिये और आज की युवा पीढ़ी को इस बेटे से माता-पिता का सम्मान करने की प्रेरणा लेनी चाहिये।

माता की मृत्यु के सदमे में इकलौते बेटे ने त्याग दिये प्राण!

बड़ी-बड़ी ब्रेकिंग खबरों के बीच जब मेरी नज़र इस ख़बर पर पड़ी तो यकीन मानिए इस बेटे के सम्मान में मेरी आँखें नम हो गईं। इस बेटे के लिये हृदय में वह सम्मान पैदा हुआ, जो श्रवण कुमार के लिये है। ख़बर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की है। जिला मुख्यालय मुरादाबाद की बिलारी तहसील के गाँव खाता में रहने वाले 55 वर्षीय विजेंद्र सिंह यादव की 90 वर्षीय वयोवृद्ध माँ की बुधवार रात मृत्यु हो गई। 55 वर्ष तक माँ की ममता की छत्रछाया में खुद को सुरक्षित अनुभव करने वाले विजेन्द्र सिंह अपनी माता से विरह की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। उसी माँ की चिर विदाई से वह टूट गये और मातृप्रेम से जिनका हृदय लबालब भरा था, वह विजेन्द्र रात भर फूट-फूट कर रोये। अगली सुबह गुरुवार को सभी ग्रामवासी और रिश्तेदारों के एकत्र होने के बाद विजेन्द्र सिंह की माता की शवयात्रा निकाली गई और उन्हें अंतिम संस्कार के लिये मोक्षधाम ले जाया गया। यहाँ आने के दौरान भी विजेन्द्र सिंह का रोना-बिलखना अविरत जारी था। माँ के जाने का विजेन्द्र को इतना गहरा सदमा लगा था कि माँ को मुखाग्नि देने के साथ ही विजेन्द्र की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें खून की उल्टियाँ होने लगी तो परिवारजनों ने 108 पर फोन करके एंबुलेंस को सूचित किया। इससे पहले कि एंबुलेंस पहुँचती, बेटा नश्वर देह का त्याग करके अपनी माँ के पास चला गया।

ऐसे बेटे के जन्म पर पूरे गाँव को गर्व

विजेन्द्र सिंह अपनी माँ के इकलौते पुत्र थे और माँ के लाड़ले थे। विजेन्द्र के परिवार में उनकी पत्नी रामश्री और तीन बेटे हैं। माँ की मृत्यु के सदमे में पुत्र के प्राण त्याग देने की इस घटना के साक्षी बने ग्रामजन और रिश्तेदार भी स्वयं को धन्य मानते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में माता-पुत्र का ऐसा सम्बंध, ऐसा लगाव और ऐसी मृत्यु की घटना पहले कभी नहीं देखी और न कभी सुनी। ग्रामवासी अपने गाँव को भी धन्य मानते हैं, जहाँ विजेन्द्र सिंह जैसे बेटे ने जन्म लिया। सचमुच विजेन्द्र ने माता-पुत्र के बीच आदर्श प्रेम का एक ऐसा अनूठा दृष्टांत प्रस्तुत किया है, जो आधुनिक युग में मोबाइल, इंटरनेट, टीवी, फिल्म, क्रिकेट और कंप्यूटर से मजबूत रिश्ता कायम करने वाली वर्तमान पीढ़ी के लिये प्रेरणादायी है। युवाPRESS के सभी पाठकों तक यह ख़बर पहुँचाने का हमारा उद्देश्य भी यही है कि जो आधुनिक संतानें अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करती हैं, उन्हें पलट कर जवाब देती हैं। उन्हें माता-पुत्र की इस प्रेम कहानी से यदि कुछ भी सीखने को मिलता है तो हमें लगेगा कि हमारा प्रयास सही दिशा में है।

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