पारिवारिक पाठशाला को ही बदलना होगा सिलेबस, तभी बदलेगा समाज

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 7 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक बच्चे के लिये उसकी प्रथम पाठशाला उसका घर ही होता है और उसके पारिवारिक सदस्य ही उसके प्रथम अध्यापक होते हैं। यदि बचपन से ही जैसे लड़कियों की परवरिश की जाती है कि उन्हें कैसे रहना चाहिये, कैसे उठना-बैठना चाहिये, क्या पहनना चाहिये, कैसे खाना-पीना चाहिये, बड़ों का सम्मान करना चाहिये ? वैसे ही इस पारिवारिक पाठशाला को अपने लड़कों के लिये भी सिलेबस बदलना चाहिये। तभी समाज में सच्चा बदलाव आएगा। लड़कों को भी बचपन से ही ऐसे संस्कार देने चाहिये कि वे महिलाओं का सम्मान करें और महिलाओं के प्रति उनके मन में दीन-हीन, ईर्ष्या, हवस, उपयोग की वस्तु जैसे विचार और भावनाएँ न पनपने पाएँ। यदि ऐसा होगा तो देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर होने वाला अत्याचार यूँ ही समाप्त हो जाएगा। खैर, यह तो व्यक्तिगत विचार है, परंतु सदैव ही अपने भाषणों से विपक्ष की बोलती बंद कर देने वाली तेज तर्रार भाजपा नेता स्मृति ईरानी भी कुछ ऐसा ही विचार रखती हैं। दरअसल, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि दुष्कृत्य के मामलों में मृत्युदंड से सख्त सज़ा और कोई नहीं हो सकती है।

‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ जैसी चुनौतियों से निपटने की जरूरत

हैदराबाद और उन्नाव में हुए दुष्कर्म के बाद युवतियों को जिंदा जलाने की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इन मुद्दों पर महिला हितैशी स्मृति ईरानी भी आक्रोशित नज़र आईं। स्मृति का कहना है, “समाज को ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ जैसी चुनौतियों से निपटने पर विचार करना होगा और अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बच्चों को सिखाना होगा कि महिलाओं से सही बर्ताव कैसे किया जाता है ? एक पालक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ख्याल रखना चाहिये कि हम अपने बच्चों के सामने महिलाओं की कैसी छवि पेश कर रहे हैं।” दुष्कर्म की घटनाओं के लिये संस्थाओं, मीडिया, फिल्मों और साहित्य को जिम्मेदार ठहराने से कहीं अधिक अच्छा है कि हम अपने बच्चों में अच्छे विचार और संस्कारों का आरोपण करें।

7 लाख से अधिक यौन अपराधियों का राष्ट्रीय डेटा बेस बना

एक घटना का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी कहती हैं, “मैं संसद में महिला उत्पीड़न के बारे में बोल रही थी, तब दो पुरुष सांसद मुझे मारने के लिये आगे बढ़े थे। इसका कारण बस यही था कि मैं बोल रही थी। क्या महिलाओं के लिखने और बोलने से भी दूसरी महिलाओं का उत्पीड़न होता है?” दुष्कर्म से महिलाओं को बचाने के लिये वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता दिये जाने के विचार को सिरे से नकारते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, “वह समाज कैसा होगा जो महिला को एक वस्तु बना कर अपनी शारीरिक आवश्यकताएँ पूरी करने की बात करता है ? हालाँकि सरकार ने दुष्कर्म के मामले निपटाने के लिए देश भर में 1,023 ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ स्थापित करने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करनी शुरू कर दी है। साथ ही दुष्कर्म के मामलों में अदालतों से सज़ा पाने वाले 7 लाख से अधिक यौन अपराधियों का राष्ट्रीय डेटा बेस भी बनाया है, ताकि इन लोगों पर नज़र रखी जा सके।

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