अमेरिका की ‘सब्जी मंडी’ में बिक रहे हैं ‘गोबर के उपले’ : क्या आप जानते हैं इसके फायदे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत की संस्कृति हमेशा से प्रकृति प्रेमी रही है। हमारी जीवनशैली में पूरी जीवसृष्टि के साथ मैत्रीभाव रखा गया है। भारत में गाय को पशु नहीं माना जाता है। इसे पशु से उच्च श्रेणी में रखा जाता है और पूज्यनीय माना जाता है। गाय के शरीर में सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना है। गाय को विशेष दर्जा देने के कई वैज्ञानिक कारण भी हैं। गाय एक ऐसा प्राणी है जो सांसों में ऑक्सीजन ही लेती है और ऑक्सीजन ही छोड़ती है। जबकि अन्य सभी प्राणी सांसों में ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइ ऑक्साइड छोड़ते हैं। गाय के शरीर में भी विशेष गुण पाये जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार गाय के शरीर को सहलाने या उसके शरीर पर हाथ फेरने से डायाबिटीस समेत कई प्रकार की बीमारियों में राहत मिलती है। गाय के दूध में भी अन्य प्राणियों की तुलना में विशेष गुण पाये जाते हैं। यहाँ तक कि गोमूत्र और गोबर में भी औषधीय गुण पाये जाते हैं। यह विडंबना ही है कि वर्तमान पीढ़ी गाय, पीपल, तुलसी, आम आदि की विशेषताओं से अंजान है और इनका न सिर्फ घोर अपमान हो रहा है, बल्कि इन सभी का इतना दोहन किया जा रहा है, कि इन्हें विलुप्त होने की कगार पर पहुँचा दिया गया है। दूसरी ओर विदेशी लोग भारतीय वस्तुओं की उपयोगिता को समझ रहे हैं और उनका जीवन में लाभ भी ले रहे हैं। युवाPRESS ने कुछ महीने पहले एक खबर प्रकाशित की थी कि भारत में जिन पत्तलों का त्याग कर दिया गया है और उनके स्थान पर स्वास्थ्य के लिये हानिकारक प्लास्टिक और थर्मोकॉल की पत्तलें या थालियाँ इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि भारतीय पत्तलों का महत्व जर्मनी ने जाना और वहाँ भारतीय पत्तलों को पेकिंग करके बेचा जा रहा है। अब अगली खबर अमेरिका के न्यूजर्सी से आ रही है, जिसमें गोबर के उपले पेकिंग में बेचे जा रहे हैं। इससे पहले विदेशी भारतीय परिवेश कुर्ता को अपना चुके हैं। इससे पहले विदेशियों ने योग की महत्ता को समझा और उसे अपनाया। ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जिनमें भारतीयों ने अपनी ही वस्तुओं को उपेक्षित कर दिया, परंतु विदेशियों ने उनके महत्व को समझा और अपनाया। बाद में उसी को भारतीयों ने फैशन के रूप में अपनाया है। चाहे बड़े-बड़े बाल रखने की बात हो, सिर मुंडवाने की बात हो, दाढ़ी-मूछ बढ़ाने की बात हो या सिर में चोटी रखने की बात हो।

न्यूजर्सी के बाजार में बिक रहे गोबर के उपले

न्यूजर्सी में ‘सब्जी मंडी’ नामक एक सुपर मार्केट है, जिसके अंदर एक दुकान ग्रोसरी स्टोर में गोबर के उपले बिकते देख कर समर हलार्नकर नामक एक ट्यूटर यूज़र ने उसकी तस्वीर ली और सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। इसके बाद से ही यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि एक पैकेट में 10 उपले हैं और इस पैकेट को 2.99 यूएस डॉलर यानी 215 रुपये में बेचा जाता है। पैकेट पर उपले बेचने वाली सुपर मार्केट ‘सब्जी मंडी’ का लोगो है और उसके नीचे खास सूचना लिखी गई है कि ‘यह केवल धार्मिक उपयोग के लिये हैं, खाने के लिये नहीं हैं।’ नीचे की साइड ‘प्रोडक्ट ऑफ इंडिया’ भी लिखा है। हालाँकि यह कहना मुश्किल है कि यह गोबर के उपले गाय के ही हैं और भारत की देशी गाय के ही हैं। यह भी कहना मुश्किल है कि इन उपलों की पैकिंग भारत में हुई है। यह उपले बेचने की बिज़नेस स्ट्रेटजी भी हो सकती है, परंतु इतना तो तय है कि इस प्रोडक्ट ने एक बार फिर गोबर और उसके उपलों की चर्चा जगा दी है।

भारत में गाय के गोबर की उपयोगिता और महत्व

भारत में गाय के गोबर को अत्यंत पवित्र मानते हैं और गोबर के उपले बना कर इन्हें धार्मिक होम-हवन में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। भारतीय शास्त्रों में इसके बारे में वैज्ञानिक कारण भी दिये गये हैं कि गोबर के उपलों को जलाने से उठने वाला धुआँ वातावरण को पवित्र करता है। पवित्र से ऋषि-मुनियों का तात्पर्य वातावरण को शुद्ध करना है।

अर्थात् आजकल वातावरण में जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के वायरस फैल चुके हैं, प्राचीन काल में होम-हवन करके वातावरण को शुद्ध करने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसमें आम की लकड़ी भी योगदान देती है। इसके अलावा गोबर के उपलों का सर्व साधारण घरों में रसोई में भी उपयोग किया जाता था, जिससे घर का वातावरण भी शुद्ध रहता था। वर्तमान वैज्ञानिक युग में इन तथ्यों को नकारने का परिणाम हमारे सामने है।

घातक परमाणु विकिरणों से भी बचाता है गोबर

शास्त्रों में देशी गाय के गोबर के चामत्कारिक गुणों का वर्णन किया गया है। यहाँ तक कि वर्तमान विज्ञान के पास जानलेवा घातक परमाणु विकिरणों से बचने का कोई मजबूत उपाय नहीं है, जबकि शास्त्रों के अनुसार भारत की देशी गाय का चामत्कारिक गोबर परमाणु विकिरणों से हमारे शरीर का बचाव करता है।

इतना ही नहीं, अलग-अलग रंग की गाय के भी अलग-अलग गुण विस्तार से बताये गये हैं। सफेद गाय, काली गाय, लाल गाय, काली-सफेद गाय, लाल-सफेद गाय के दूध के अलग-अलग लाभ और गुण हैं। शास्त्रों में एक और बात कही जाती है कि जिस गाय का बच्चा मर जाता है, उस गाय का दूध नहीं उपयोग में नहीं लेना चाहिये। ऐसा दूध स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है, परंतु आज के जमाने में इन सभी मान्यताओं को धता बता कर नकार दिया जाता है, जिसके दुष्परिणाम विभिन्न स्वरूपों में सामने आ रहे हैं।

You may have missed