VIDEO : अब जासूसी के मामले में विदेशी नस्ल को देशी ताकत ने दिखाया ‘ठेंगा’

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। आपकी सोसाइटी या गली मोहल्ले में घूमते देशी कुत्तों को आप हेय दृष्टि से मत देखिये, बल्कि यदि आपको कुत्ते पालने का शौक है तो आप इन्हीं में से कोई कुत्ता पाल सकते हैं। देशी कुत्ता पालने के मामले में आप ऐसी हीन मानसिकता भी मत रखिये कि विदेशी कुत्ता पालना ही सोसाइटी में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ाता है और यदि आप देशी कुत्ता पाल लेंगे तो आपका सम्मान कम हो जाएगा। क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत में आज भी पालने के लिये देशी कुत्ते ही उपयोग किये जाते हैं और भारतीय इतिहास में भी देशी कुत्तों की वफादारी और बहादुरी की मिशालें भरी पड़ी हैं। देशी नस्ल के कुत्तों ने भारतीय सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का नज़रिया बदल दिया है। विश्वास कीजिये यह आपके भरोसे की कसौटी पर भी उतने ही खरे उतरेंगे। सेना (ARMY), पुलिस (POLICE) और सुरक्षा एजेंसियों के स्निफर डॉग स्क्वॉड (SNIFFER DOG SQUAD) में अभी तक विदेशी नस्ल के कुत्तों का ही बोलबाला रहता था, परंतु बीते कुछ वर्षों से देशी नस्ल के कुत्तों ने जासूसी के मामले में अपना जो दमखम, चुस्ती-फुर्ती और सूँघने की शक्ति दिखाई है, उसने विदेशी नस्ल के कुत्तों को न सिर्फ कड़ी चुनौती दी है बल्कि उनके दाँत खट्टे कर दिये हैं। मामला उत्तराखंड का है। यहाँ देशी नस्ल का एक कुत्ता पुलिस की शान बढ़ा रहा है। पुलिस ने इस कुत्ते का नाम ‘ठेंगा’ रखा है। सचमुच ठेंगा अपने नाम को सार्थक करते हुए विदेशी नस्ल के कुत्तों को ठेंगा दिखा रहा है।

उत्तराखंड पुलिस के स्निफर डॉग स्क्वॉड में शामिल हुआ देशी श्वान

सेना, पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों के श्वान दल में बेल्जियम, जर्मन शैफर्ड, लैबराडोर, गोल्डन रिट्रीवर्स आदि विदेशी नस्ल के कुत्तों को ही जगह मिलती थी। दूसरी तरफ देशी कुत्ते गली-मोहल्लों में और सड़कों पर आवारा घूमते नज़र आते थे। उनकी काबिलियत को परखने का माद्दा किसी ने नहीं दिखाया, मगर पहली बार उत्तराखंड पुलिस ने स्ट्रीट डॉग को अपने श्वान दल में शामिल करके ट्रेनिंग देने का प्रयोग किया, तो देशी नस्ल के इस कुत्ते ने अपनी काबिलियत से पुलिस को चौंका दिया। इस कुत्ते ने मात्र 6 महीने की ट्रेनिंग में चुस्ती, फुर्ती और सूँघने की क्षमता के मामले में विदेशी नस्ल के कुत्तों को बहुत पीछे छोड़ दिया।

अपनी इसी ताकत के दम पर आज ठेंगा उत्तराखंड पुलिस का चहेता जासूसी कुत्ता बन गया है। इस कुत्ते के कारण उत्तराखंड पुलिस को भी खूब प्रसिद्धि मिल रही है और यह कुत्ता पुलिस का सबसे भरोसेमंद जासूस बन गया है। ठेंगा छह महीने पहले तक दूसरे आवारा कुत्तों की तरह ही सड़कों पर घूमता था, परंतु एक दिन उसकी किस्मत तब बदल गई, जब उत्तराखंड पुलिस ने अपने डॉग स्क्वॉड में शामिल करने के लिये कुछ देशी कुत्तों को आजमाया। उनमें से ठेंगा ने अपनी काबिलियत से पुलिस को प्रभावित किया और वह पुलिस के डॉग स्क्वॉड का हिस्सा बन गया। ट्रेनिंग के दौरान ठेंगा ने अपने ट्रेनर को भी प्रभावित किया। ठेंगा ने छह महीने की ट्रेनिंग में ही विदेशी नस्ल के कुत्तों को बहुत पीछे छोड़ दिया। ट्रेनर इंस्पेक्टर कमलेश के अनुसार शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें जरूर आईं, परंतु जब इसने सीखना शुरू किया तो इसने बाकी कुत्तों को बहुत पीछे छोड़ दिया। कमलेश के अनुसार ठेंगा की चुस्ती, फुर्ती के साथ-साथ सूँघने की शक्ति अन्य कुत्तों से ज्यादा अच्छी है। इसलिये पुलिस इस पर विशेष ध्यान दे रही है।

उत्तराखंड पुलिस के डीजी अशोक कुमार के अनुसार सुरक्षा एजेंसियाँ लाखों रुपये खर्च करके विदेशी कुत्तों को खरीदकर लाती हैं और उन्हें पालने तथा ट्रेनिंग देने पर भी लाखों रुपये खर्च होते हैं, परंतु ठेंगा के मामले में बहुत कम पैसा खर्च हुआ। विदेशी कुत्ते खरीदने के लिये एक कुत्ते की कीमत 30 से 70 हजार रुपये तक चुकानी पड़ती है। इस कुत्ते की ट्रेनिंग पूरे देश की पुलिस टीम को भी देशी कुत्तों पर भरोसा करने की सीख देती है। यह कुत्ता उन आम लोगों का नज़रिया भी बदल सकता है जो अपने घरों के ड्राइंग रूम में केवल विदेशी नस्ल के कुत्तों को ही जगह देते हैं।

आईटीबीपी के ट्रेनिंग सेंटर में होती है कुत्तों की ट्रेनिंग

ज्ञात हो कि सामान्यतः सभी स्निफर डॉग की ट्रेनिंग इण्डो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के ट्रेनिंग सेंटर में होती है, परंतु ठेंगा की ट्रेनिंग देहरादून में हुई है। ठेंगा गत 9 नवंबर को पुलिस लाइन में स्थापना दिवस परेड में भी अपनी काबिलियत का प्रदर्शन कर चुका है। इस प्रदर्शन के दौरान ठेंगा ने आग के गोले के बीच से निकल कर दिखाया था और अपराधी के छोड़े हुए साक्ष्य को सूँघ कर अपनी विशेष क्षमता से पुलिस को अपराधी तक पहुँचाने का करतब भी दिखाया था।

पहली बार भारतीय सेना ने देशी कुत्तों को दी थी ट्रेनिंग

वैसे यदि श्वान दल में देशी नस्ल के कुत्ते के प्रथम प्रयोग की बात है तो भले ही पुलिस में उत्तराखंड पुलिस ने यह पहल की हो, परंतु भारतीय सेना 2017 में ऐसा ही प्रयोग कर चुकी है। भारतीय सेना ने दक्षिण भारत में पाई जाने वाली देशी नस्ल के मुथूल हाउण्ड वंश के 6 कुत्तों को मेरठ में सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) सेंटर में ट्रेनिंग दी थी और इन्हें विस्फोटक सूँघने के काम में उपयोग किया था। ये कुत्ते मजबूत कद-काठी के और शिकारी प्रवृत्ति के होते हैं। इस कारण इनकी भागने की रफ्तार और शिकार पर झपटने की फुर्ती देखने लायक होती है। इसी फुर्तीले स्वभाव के कारण ये अच्छे सुरक्षा गार्ड सिद्ध हो सकते हैं। इन कुत्तों की इसी खासियत को पहचान कर भारतीय सेना ने इन कुत्तों को अपने श्वान दल में शामिल किया था। इतना ही नहीं, केन्द्र सरकार इन मुथूल हाउंड कुत्तों पर 2005 में 5 रुपये का डाक टिकट भी जारी कर चुकी है।

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