मृत्यु के 93 साल बाद संत बनी केरल की नन मरियम थ्रेसिया, जानिए कैसे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। केरल के एक धनी परिवार में जन्म लेने वाली नन मरियम थ्रेसिया को उनकी मृत्यु के 93 वर्ष बाद संत की उपाधि मिली है। इसाई धर्म गुरु पॉप फ्रांसिस ने रविवार को वेटिकन सिटी में उन्हें इस उपाधि से सम्मानित किया। 26 अप्रैल 1876 को केरल के त्रिशूर जिले में जन्मीं सिस्टर मरियम का 50 वर्ष की उम्र में 8 जून 1926 को निधन हो गया। उन्होंने केरल में लड़कियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिये अलख जगाई थी।

कौन हैं नन मरियम थ्रेसिया ?

सीरियन-मालाबार चर्च से जुड़ी सिस्टर मरियम के पिता का नाम मनकिडियान तोमा और माता का नाम तांडा था। सिस्टर मरियम की दो बहनें थीं। सिस्टर मरियम ने होली फैमिली नामक एक धर्मसभा की स्थापना की थी। वेटिकन सिटी जो इसाई धर्मगुरु पॉप का मुख्यालय है, वहाँ मौजूद एक दस्तावेज के अनुसार सिस्टर मरियम ने केरल में कई स्कूल, हॉस्टल, अनाथाश्रम और कॉन्वेंट बनवाये तथा संचालित किये। उन्हें विशेष कर लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के काम करने के लिये सविशेष याद किया जाता है। 1914 में उनके द्वारा संस्थापित धर्मसभा नामक संस्था में अब लगभग 2000 नन हैं। वेटिकन सिटी में रविवार को पॉप फ्रांसिस ने सिस्टर मरियम के साथ-साथ चार अन्य लोगों को भी संत की उपाधि दी। अत्यंत धनी परिवार में जन्मीं सिस्टर मरियम ने 8 वर्ष की उम्र से ही खुद को ईश्वर को समर्पित कर दिया था। वे व्रत रखती थीं और ईश्वर से प्रार्थना करती थी। बचपन से ही उन्हें उनके दोस्त संत बुलाने लगे थे। उन्होंने केरल में गरीब, कुष्ठरोगी तथा चेचक से पीड़ित लोगों की भी खूब सेवा की थी।

मदर टेरेसा से होती थी सिस्टर मरियम थ्रेसिया की तुलना

होली फैमिली के डॉ. विनय का कहना है कि उनका मुख्य करिश्मा स्कूल, अस्पताल और परामर्श केन्द्र हैं। वे परिवारों को पवित्र नाजरेथ के परिवार की तरह बनाना चाहते हैं। सिस्टर मरियम थ्रेसिया की सेवा के कारण अक्सर उनकी तुलना मदर टेरेसा से की जाती रही है। अपने मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भी मरियम थ्रेसिया का उल्लेख करते हुए कहा था कि हमारे लिये गर्व की बात है कि उन्हें संत की उपाधि दी जाएगी। होली फैमिली के अनुसार नौ महीने पहले जन्मा एक बालक जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहा था। डॉक्टरों ने एक विशेष वेंटिलेटर के जरिये एक विशेष दवा देने के लिये कहा था, जो उस समय अस्पताल में नहीं थी। तीसरे दिन बच्चा साँस लेने में हाँफने लगा। डॉक्टरों के होश उड़ गये थे और सबने बच्चे के बचने की आस छोड़ दी थी। बच्चे के माता-पिता और दादा-दादी सिस्टर मरियम के भक्त थे। बच्चे की दादी ने उस पर एक धार्मिक चिह्न रख कर सभी लोगों से सिस्टर मरियम से प्रार्थना करने के लिये कहा। ऐसा करने के 20 से 30 मिनट के अंदर ही बच्चे के स्वास्थ्य में जबरदस्त बदलाव आया। यह घटना 9 अप्रैल 2009 को हुई थी। इसी दिन सिस्टर मरियम को रोम में धन्य घोषित किया गया था। 22 मार्च 2018 को वेटिकन सिटी ने मरियम के इस चमत्कार को स्वीकार किया और अब उन्हें पॉप ने संत की उपाधि दे दी है।

केरल के चर्चों में उत्सव-सा माहौल

केरल में नन मरियम थ्रेसिया को संत की उपाधि दिये जाने के बाद केथॉलिक चर्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। उनसे पहले केरल के तीन लोगों को संत की उपाधि से नवाजा जा चुका है। थ्रेसिया को उनके निधन के 93 वर्ष बाद यह उपाधि प्राप्त हुई है। वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वेयर में दोपहर 1.30 बजे पॉप फ्रांसिस ने नन मरियम थ्रेसिया को संत की उपाधि दिये जाने की घोषणा की।

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