मिलिए पूर्व सैनिक वीपी शर्मा से, जिन्होंने बनाया 8वाँ अज़ूबा

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 23 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में ऊर्जा की राजधानी यानी मध्य प्रदेश का सिंगरौली, जो विद्युत उत्पादन का गढ़ माना जाता है। यहाँ इन दिनों बहुत तेजी से एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। यहाँ के छोटे-छोटे बच्चे एक नए ही कारनामे को अंजाम दे रहे हैं, जिसकी चर्चा भारत ही नहीं, अपितु विश्व में भी हो रही है। विश्व के 7 अज़ूबों (SEVEN WONDER) की तरह ही सिंगरौली का वीणा वादिनी स्कूल आज 8वाँ अज़ूबा बन गया है। दरअसल वीणा वादिनी स्कूल के बच्चे न दाएँ हाथ से लिखते हैं और न ही बाएँ हाथ से, अपितु ये बच्चे अपने दोनों हाथों से एक साथ लिखने में सक्षम हैं। भारत में इससे पहले ये प्रसिद्धि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को प्राप्त थी, जो एक हाथ से लिखते-लिखते जब थक जाते थे, तो अपने दूसरे हाथ से लिखने लगते थे। अब सोचने वाली बात ये है कि, ये बच्चे दोनों हाथों से क्यों लिखते हैं और इन्हें ये प्रशिक्षण कौन दे रहा है ? आपके इस सवाल का उत्तर हम इस लेख में देने जा रहे हैं।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बने प्रेरणा

जब, पूर्व सैनिक विरंगद शर्मा जबलपुर से आर्मी का प्रशिक्षण पूरा करके अपने गाँव बुधेला लौट रहे थे, तब रास्ते में आलस्य दूर करने के लिए उन्होंने एक पत्रिका पढ़नी प्रारंभ की। इसी दौरान उनकी नज़र पत्रिका में प्रकाशित एक लेख पर गई, जिसमें भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी प्रकाशित की गई थी और उसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद दोनों हाथों से लिख सकते हैं। विरंगद ने जब ये पढ़ा, तो उनके मन में सहसा ये बात घर कर गई कि क्या दोनों हाथों से लिखा जा सकता है ? इसके बाद वे वापस सेना में गए ही नहीं और स्वयं दोनों हाथों से लिखना सीखने लगे। दोनों हाथों से लिखना सीखने के पश्चात उन्होंने कई भाषाओं का अध्ययन भी किया, जिसमें रोमन, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू और स्पेनिश शामिल थी। स्वयं को एक टीचर के रूप में तैयार करने के बाद विरंगद ने 8 जुलाई, 1999 को वीणा वादिनी स्कूल की स्थापना की और कक्षा एक से ही बच्चों को दोनों हाथों से लिखना सिखाने का प्रचलन शुरू किया।

एक बच्‍चा 11 घंटों में लिख सकता है 24,000 शब्द

आज वीणा वादिनी स्‍कूल में लगभग 200 बच्‍चे पढ़ते हैं और हर बच्‍चे के पास दोनों हाथों से लिखने का हुनर है। सिंगरौली आज 44 वर्षीय शिक्षक विरंगद प्रसाद शर्मा और उनके वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के लिए जाना जाता है। वीणा वादिनी में क्‍लास-1 से ही छात्रों को दोनों हाथों से लिखने की ट्रेनिंग दी जाती है, जब तक वह क्‍लास-3 में पहुँचते हैं, दोनों हाथों से लिखने में सहज महसूस करने लगते हैं। क्‍लास-7 और 8 तक आते-आते स्‍टूडेंट्स की स्‍पीड और एक्‍युरेसी बढ़ जाती है।इतना ही नहीं, प्रत्येक बच्‍चे को एक साथ दो लिपियों में लिखने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। यानी स्‍कूल का हर बच्‍चा एक साथ अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में लिख सकता है। दोनों हाथ से लिखने के कारण सभी बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है, जहाँ आम तौर पर किसी लेख को लिखने में एक बच्‍चे को घंटों लगते हैं, वहीं वीणा वादिनी स्कूल के बच्चे लगभग आधे समय में लेख पूरा कर लेते हैं। इन बच्‍चों को स्‍कूल में देवनागरी, उर्दू, स्पेनिश, रोमन, अंग्रेजी समेत 6 लिपियों और भाषाओं का ज्ञान दिया जाता है। औसतन स्‍कूल का एक बच्‍चा 11 घंटों में 24,000 शब्द लिखने की क्षमता रखता है।

हर बच्चे को याद है 2 से 100 तक का पहाड़ा

यह स्कूल केवल 8वीं कक्षा तक ही है, परंतु यहाँ के बच्‍चों का यह हुनर किसी भी बड़े शहर के स्कूली बच्‍चों से कहीं अधिक जबरदस्‍त है। यहाँ हर बच्चे को 2 से 100 तक के पहाड़े याद हैं। स्कूल का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक का है, परंतु उससे पहले 2 घंटे का योग कराया जाता है, जिससे बच्‍चे अपने मन को एकाग्र चित्त करना सीखें। वास्तव में इन बच्चों पर माँ वीणा वादिनी का वरदान है, जो वे इतनी सरलता और कुशलता से अपने दोनों हाथों से दो अलग-अलग भाषाओं में लिखने का हुनर सीख रहे हैं। बच्चों के इस सफलता का श्रेय पूर्व सैनिक विरंगद प्रसाद शर्मा को जाता है, जिन्होंने अपने भविष्य की चिंता किए बिना इन बच्चों को शिक्षित करने का सराहनीय कार्य किया है। युवाप्रेस विरंगद प्रसाद शर्मा को तहेदिल से नमन करता है।

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