‘वेश्टी’ मोदी की विराट विक्ट्री : जिनपिंग के ‘जिक्र’ में इमरान ‘जिगर’ गायब !

* ट्रीटिंग-ईटिंग-मीटिंग, बट नो कश्मीर-नो हांगकांग

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 12 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान के बाद तमिलनाडु के महाबलिपुरम् में आज दूसरी अनौपचारिक बैठक हुई। इस बैठक के लिए जहाँ जिनपिंग चीन से, तो मोदी दिल्ली से शुक्रवार को ही महाबलिपुरम् पहुँच गए थे। पिछले 48 घण्टों से मोदी-जिनपिंग एक ही शहर में रहे और इस दौरान भारत और मोदी ने जिनपिंग को श्रेष्ठतम् ट्रीटिंग (स्वागत-सत्कार) दिया, उत्तम-स्वादिष्ट व्यंजन (ईटिंग) परोसे और जब मीटिंग का समय आया, तो मोदी-जिनपिंग दोनों अत्यंत गंभीर बन गए।

मोदी-जिनपिंग के बीच करीब 6 घण्टों तक चली अनौपचारिक बैठक का सबसे बड़ा कूटनीतिक विजयी निष्कर्ष यह निकल कर आया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मोदी के साथ बैठक और चर्चा के दौरान एक भी बार कश्मीर का जिक्र तक नहीं किया, जिसकी उम्मीद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान लगाए बैठे थे और जिनपिंग के भारत दौरे से चंद घण्टों पहले ही बीजिंग दौड़े थे जिनपिंग से मिलने, परंतु इमरान की कारीगरी नहीं, बल्कि मोदी की बाज़ीगरी रंग लाई और जिनपिंग के जिक्र में इमरान का जिगर कश्मीर नहीं, बल्कि पाकिस्तान और इमरान को चुभने वाला आतंकवाद का मुद्दा शामिल था। वैसे भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात की पूरी तैयारी कर रखी थी कि यदि जिनपिंग ने कश्मीर मुद्दा उठाया, तो उन्हें किस भाषा व किस शैली में उत्तर देना है। कांग्रेस ने तो मोदी सरकार को यह सलाह भी दी थी कि जिनपिंग यदि कश्मीर का मुद्दा उठाएँ, तो मोदी जिनपिंग को हांगकांग के मुद्दे पर घेरें। यद्यपि न जिनपिंग ने कश्मीर का मुद्दा उठाया और न ही शेष कोई संभावनाएँ ही खड़ी हुईं।

हमने शीर्षक में वेश्टी मोदी इसलिए लिखा है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए महाबलिपुरम् में जिस वेशभूषा को धारण कर दौरा किया, उसे तमिलनाडु में वेश्टी वेशभूषा कहा जाता है। मोदी का वेश्टी लुक सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा, परंतु पिछले 48 घण्टों से जारी कवायद में अंतत: भारत को उस समय बड़ी कूटनीतिक जीत मिली, जब मोदी-जिनपिंग के बीच बातचीत के मुद्दे में कश्मीर का कोई उल्लेख नहीं हुआ। जिनपिंग के जिक्र से इमरान के जिगर कश्मीर का गायब होना पाकिस्तान और इमरान के लिए जहाँ बहुत बड़ा झटका है, वहीं भारत और मोदी की बड़ी कूटनीतिक विजय है, क्योंकि जिनपिंग के भारत दौरे से चंद घण्टे पहले ही इमरान, विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी और रेल मंत्री राशिद शेख ने बीजिंग का दौरा कर अपने परम् मित्र चीन के कान भरने की पूरी कोशिश की।

चीन दशकों से पाकिस्तान का परम् मित्र रहा है, परंतु पिछले कुछ समय में चीन ने पाकिस्तान के साथ मैत्री निभाते हुए भारत को भी नज़रअंदाज़ करने की हिमाक़त नहीं की है, क्योंकि वह भारत के विश्व में बढ़ते कद से अच्छी तरह वाक़िफ है। ऐसे में इमरान की मुनादी काम नहीं आई। जिनपिंग ने जहाँ एक ओर कश्मीर का उल्लेख नहीं किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिनपिंग के साथ बातचीत में आतंकवाद का मुद्दा उठाने में और जिनपिंग को उससे सहमत करने में सफल रहे, जो पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक हार है, क्योंकि मोदी ने हाल ही में अमेरिका में कहा था कि आतंकवाद पर निर्णायक लड़ाई का समय आ गया है। मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर कहा था कि 9/11 और 26/11 के गुनाहगार कहाँ पाए जाते हैं ?

विदेश सचिव विजय गोखले ने मोदी-चिनफिंग की मुलाकात और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में उठे मुद्दों के बारे में मीडिया से बातचीत में कहा कि मोदी-जिनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान कश्मीर के मुद्दे पर एक बार भी चर्चा नहीं हुई, जबकि आतंक पर विस्तार से बात हुई। दोनों नेताओं की लंबी बातचीत के दौरान एक बार भी कश्मीर मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने आतंकवाद का मिल कर सामना करने की बात कही। बता दें कि भारत ने भी पहले ही तय कर लिया था कि कश्मीर भारत का आतंरिक मामला है, ऐसे में वह इस मुद्दे पर चीनी नेता के सामने बात नहीं करेगा। अगर चीनी राष्ट्रपति इसका जिक्र करते तो पीएम मोदी इस पर भारत के रुख से उन्हें स्पष्ट करा देते। गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसी भी स्थिति में हमारा रुख साफ है कि कश्मीर पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। गोखले ने कहा कि दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि आतंकवाद और कट्टरवार की चुनौतियों का सामना करना जरूरी है। दोनों देश न सिर्फ क्षेत्रफल के हिसाब से बल्कि जनसंख्या के हिसाब से भी काफी बड़े हैं। गोखले ने कहा, ‘दोनों नेताओं के बीच आज करीब 90 मिनट तक बातचीत हुई। इसके बाद डेलिगेशन स्तर की बातचीत हुई। इसके बाद पीएम मोदी ने शी के सम्मान में लंच का आयोजन किया। इस समिट में कुल मिलाकर दोनों नेताओं के बीच 6 घंटे तक वन टु वन मीटिंग हुई।

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