मोदी का 56 इंची प्रहार : न जाँच, न समिति, ‘कुकर्मी’ अधिकारियों को दिखाया घर का रास्ता

अहमदाबाद, 11 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी 30 मई को ही प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और शपथ लेने के बाद दूसरे ही दिन से वह एक्शन में आ गये थे। उनके एक्शन का प्रभाव भी अब दिखने लगा है। पीएम मोदी ने वित्त मंत्रालय के नियम 56 का उपयोग करते हुए भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ी कार्यवाही की और उन्हें रिटायरमेंट का लेटर थमाकर घर भेज दिया। यह सभी अधिकारी भ्रष्टाचार, आय से अधिक सम्पत्ति, धन की उगाही करने से लेकर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में लिप्त थे। मोदी सरकार की इस कार्यवाही से सरकारी बाबुओं में खलबली मची हुई है।

मोदी सरकार-2 की करप्शन पर सर्जिकल स्ट्राइक

मोदी सरकार ने जिन 12 आईआरएस अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की है, वह अधिकारी चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर और कमिश्नर जैसे उच्च पदों पर थे। वित्त मंत्रालय के नियम 56 के तहत जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर रिटायरमेंट का चाबुक चलाया गया है उनके नाम इस प्रकार हैं :

अशोक अग्रवाल

एस. के. श्रीवास्तव

होमी राजवंश

बी. बी. राजेन्द्र प्रसाद

अजॉय कुमार सिंह

बी. अरुलप्पा

आलोक कुमार मित्रा

चांदरसेन भारती

अंडासु रवीन्द्र

विवेक बत्रा

स्वेताभ सुमन

राम कुमार भार्गव

मोदी सरकार ने दिखाई 56 इंच की छाती

वित्त मंत्रालय के नियम 56 की यह विशेषता है कि इस नियम के अंतर्गत ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है जिनकी उम्र 50 से 55 वर्ष हो, जो नॉन परफॉर्मर हों और 30 साल की नौकरी पूरी कर चुके हों। इस प्रकार मोदी सरकार ने नियम 56 का प्रयोग करके भ्रष्ट अधिकारियों को अपनी 56 इंच की छाती का नमूना दिखा दिया है।

हाल ही में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह खबर आई थी कि मोदी सरकार ने 5,104 कार्यरत् आईएएस अधिकारियों में से 1,143 अधिकारियों को चिह्नित कर उनकी लिस्ट तैयार की है। सरकार इन अधिकारियों की पिछले 25 वर्ष की सेवाओं की समीक्षा कर रही है और विशेषकर 2014 से 2018 के बीच चार साल में उनका परफॉर्मेंस कैसा रहा है, इसकी समीक्षा करके केन्द्र सरकार को रिपोर्ट भेजने के लिये राज्य सरकारों को पत्र लिखा गया है। इस समीक्षा के बाद कुछ अधिकारियों को जबरन रिटायर भी किया गया था। और अब भारतीय राजस्व सेवा के 12 अधिकारियों पर मोदी सरकार की गाज़ गिरी है।

मोदी सरकार की भ्रष्ट नौकरशाही के विरुद्ध की गई सर्जिकल स्ट्राइक की यह कार्यवाही दर्शाती है कि मोदी सरकार ने देश में ही स्वच्छता अभियान शुरू नहीं किया है, बल्कि अब सरकारी महकमे में भी उन्होंने सफाई अभियान जोर-शोर से शुरू कर दिया है। मोदी सरकार-2 भ्रष्ट और दुराचारी अधिकारियों के विरुद्ध मुखर होकर कड़े कदम उठाने वाली है और इसमें वह किसी के साथ भी कोई ढील बरतने वाली नहीं है।

घर भेजे गये आईआरएस अधिकारियों पर हैं गंभीर आरोप

एक रिपोर्ट में सामने आया है कि केन्द्र सरकार ने जिन 12 आईआरएस अधिकारियों को जबरन रिटायर किया है, उन पर भूतकाल में भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति, जबरन धन की उगाही, यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं।

आईआरएस अशोक अग्रवाल 1999 से 2014 के बीच भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित रहे हैं। उनके विरुद्ध एक बिज़नेसमैन से जबरन धन उगाही करने और तांत्रिक चंद्रास्वामी की मदद करने के गंभीर आरोप लगे थे। सीबीआई ने भी 12 करोड़ रुपये की अवैध सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में उनके विरुद्ध कार्यवाही की थी। वर्ष 2000 के शुरुआत में अग्रवाल के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी हुई थी।

एस. के. श्रीवास्तव पर कमिश्नर रैंक की दो महिला आईआरएस अधिकारियों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

होमी राजवंश पर 3.17 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति गलत तरीके से अर्जित करने का आरोप लगा था।

अजॉय कुमार सिंह के विरुद्ध भी सीबीआई के एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से केस दर्ज किया गया था। वह अक्टूबर-2009 में सस्पेंड भी हुए थे।

आलोक कुमार मित्रा और चांदर सेन भारती भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और जबरन धन उगाही के आरोपों का सामना कर चुके हैं। भारती पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके 133.71 प्रतिशत से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की। उन पर हवाला के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के भी आरोप लग चुके हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कमिश्नर रैंक के एक अन्य आईआरएस अधिकारी अंडासु रवीन्द्र को सीबीआई ने 50 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। वह 81 लाख रुपये की संपत्ति का हिसाब भी नहीं दे पाये थे।

सीबीआई ने 2005 में पद का दुरुपयोग करके 1.27 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति जुटाने के मामले में विवेक बत्रा के विरुद्ध केस दर्ज किया था।

इसी प्रकार स्वेताभ सुमन पर एक बिज़नेसमैन को राहत पहुँचाने के बदले में 50 लाख रुपये की माँग करने का आरोप लगा था।

अभी और कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज़

मोदी सरकार की नज़र में अभी और भी कई वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन पर इसी प्रकार के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इसके अलावा जिनका परफॉर्म भी खास नहीं रहा है। ऐसे अन्य अधिकारियों पर भी जल्द ही मोदी सरकार की गाज़ गिरने वाली है।

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