राहुल के लिए होगा ‘गब्बर सिंह टैक्स’, लेकिन ‘इन’ लोगों को तो सेवा के साथ मेवा भी दे रहा है GST ! जानिए आप भी कैसे कर सकते हैं करोड़ों की कमाई ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 16 मई, 2019। नरेन्द्र मोदी सरकार ने 1 जुलाई, 2017 मध्य रात्रि 12 बजे से ‘एक राष्ट्र-एक कर’ का प्रावधान करने वाले वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू किया था। इसके लिए मोदी सरकार ने बड़ी तैयारी की थी और 30 जून-1 जुलाई, 2017 की मध्य रात्रि में संसद का विशेष सत्र आहूत किया था। यद्यपि जीएसटी की परिकल्पना करने वाली विपक्षी पार्टी कांग्रेस मोदी सरकार के जीएसटी से संतुष्ट नहीं थी, परंतु संसद में बहुमत से जीएसटी बिल पास हुआ और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो गई।

जीएसटी के क्रियान्वयन के आरंभ के साथ कई छोटे-बड़े कारोबारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और कई जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए। कांग्रेस सहित सभी मोदी सरकार विरोधी दलों ने जीएसटी को राजनीतिक और चुनावी मुद्दा बनाने में देर नहीं की। यहाँ तक कि देश की सबसे पुरानी और जीएसटी की जनक पार्टी कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स करार दिया।

ख़ैर, राहुल गांधी के दृष्टिकोण से जीएसटी गब्बर सिंह टैक्स होगा और काला धन जमा करने वालों के लिए भी जीएसटी का अर्थ यही निकलता होगा, परंतु यह जीएसटी कुछ विशेष लोगों के लिए वरदान भी सिद्ध हो रहा है। इतना ही नहीं इन कुछ विशेष लोगों के लिए जीएसटी देश की सेवा करने के साथ मेवा (धन) भी दे रहा है। जी हाँ। हम बात कर रहे हैं मुखबिरों की, जिन्हें सुराग़ देने वाले, सूचना देने वाले या INFORMERS भी कहते हैं।

काले धन के लिए ‘काल’ बन रही GIRS

मोदी सरकार पर भले ही यह आरोप लगाया जाता रहा हो कि जीएसटी आनन-फानन में लागू कर दिया गया, परंतु वास्तविकता यह है कि सरकार ने जीएसटी के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सभी ढाँचे पहले से ही तैयार कर लिए थे। इन्हीं ढाँचों में एक है GST INFORMANT REWARD SCHEME (GIRS)। इस योजना के तहत जीएसटी चोरी करने वालों की सूचना देने वाले इन्फॉर्मर को तगड़ी पुरस्का राशि दी जाती है। यह योजना राजस्व विभाग ने शुरू की है। जीएसटी गुप्तचर महानिदेशालय (DGGSTI) पूरे देश में लागू इस योजना के तहत लाखों इन्फॉर्मर्स को रिवॉर्ड देने का का करता है। जीआईआरएस योजना का फ़ायदा लाखों उठा कर लाखों इन्फॉर्मर जहाँ एक तरफ काला धन पकड़वाने में सरकार की मदद कर देश की सेवा कर रहे हैं, वहीं रिवॉर्ड के रूप लाखों-करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। योजना के तहत केवल मुखबिर ही नहीं, सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी रिवॉर्ड पा रहे हैं। आपको बता दें कि जीआईआरएस योजना के तहत मुखबिरों को पकड़वाई गई कुल राशि की 20 प्रतिशत राशि तथा अधिकारियों-कर्मचारियों को 10 प्रतिशत राशि रिवॉर्ड के रूप में दी जाती है। मतलब जितनी बड़ी रकम पकड़वाई जाए, उतना बड़ा रिवॉर्ड पाया जा सकता है।

गुजरात में इन्फॉर्मर्स को मिले 2.25 करोड़ रुपए

गुजरात में भी जीआईआरएस योजना लागू है और हजारों लोग मुखबिरी कर काला धन पकड़वाने में सरकार की मदद कर रहे हैं। इसी क्रम में डीजीजीएसटीआई, अहमदाबाद ने हाल ही में मुखबिरों यानी इन्फॉर्मर्स को 2.25 करोड़ रुपए का पुरस्कार (रिवॉर्ड) दिया है। इतना ही नहीं, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी काला धन पकड़वा कर 2 करोड़ रुपए की भारी पुरस्कार राशि अर्जित की है। डीजीजीएसटीआई, अहमदाबाद के अनुसार गुजरात में पिछले एक वर्ष में मुखबिरों की सूचनाओं के आधार पर करोड़ों रुपयों की कर चोरी पकड़ी गई, जिसके आधार पर मुकबिरों को 2.25 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा कर चोरी पकड़ने-पकड़वाने में अच्छा काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों या जिन्होंने बड़े केस सॉल्व किए हों, उन्हें भी प्रोत्साहन राशि के रूप में 2 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

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