मोदी है, तो मुमकिन है : तो ओडिशा में बन सकती है BJP-BJD सरकार !

1. भाजपा बहुमत के साथ भुवनेश्वर पर लहरा सकती है भगवा

2. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकती है

3. बीजेडी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर सकरती है

4. त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में साथ आ सकते हैं भाजपा-बीजेडी

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 20 मई, 2019। शीर्षक पढ़ कर आश्चर्य हुआ न ! परंतु राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। इस पर भी जब एक छोर पर नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हों, तो कुछ भी मुमकिन है। लोकसभा चुनाव 2019 सम्पन्न होने के बाद अब चर्चाएँ एग्ज़िट पोल के निष्कर्षों पर हो रही है। दिल्ली की गद्दी की आपाधापी के बीच शायद कई लोगों को पता नहीं होगा कि ओडिशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी थे और एग्ज़िट पोल के जो निष्कर्ष आए हैं, उसमें अधिकांश प्रकाश ओडिशा में लोकसभा सीटों के आँकड़ों में भाजपा को भारी बढ़त दिखाई जा रही है, परंतु इसे विधानसभा चुनाव के लिहाज़ से सीटों में बदला जाए, तो एक मोटे तौर पर अनुमान यह निकलता है कि ओडिशा में नवीन पटनायक का सिंहासन डोल सकता है।

एग्ज़िट पोल में भाजपा को भारी बढ़त, बीजेडी को झटका

सबसे पहले बात कर लेते हैं रविवार को आए एग्ज़िट पोल की, जिसमें ओडिशा को लेकर मोटे तौर पर यह तसवीर उभर कर सामने आई है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) को 2014 के मुकाबले ओडिशा में भारी बढ़त लेने जा रही है, जबकि 19 वर्षों से सत्ता पर विराजमान बीजू जनता दल (बीजद-BJD) के गढ़ में बड़ी सेंध लगने जा रही है। विभिन्न सर्वेक्षण एजेंसियों की ओर से कराए गए और न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित किए गए ओडिशा के एग्ज़िट पोल के अनुसार भाजपा को ओडिशा की 21 सीटों में से 10 से लेकर 19 सीटें मिल सकती हैं, जबकि सत्तारूढ़ बीजेडी 2 से 11 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। एग्ज़िट पोल के इस निष्कर्ष का औसत निकाला जाए, तो ओडिशा में भाजपा लोकसभा की कम से कम 15 से 16 सीटें जीत सकती है, तो बीजेडी 5 से 6 सीटों पर सिमट सकता है। यदि कांग्रेस या अन्य पार्टी कोई सीट हासिल करेगी, तो उससे भाजपा या बीजेडी की ही एक सीट कम होगी।

क्या हो सकती है ओडिशा विधानसभा की तसवीर ?

ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों के एग्ज़िट पोल के अनुमान को यदि विधानसभा की 147 सीटों में डिवाइड किया जाए, तो निश्चित रूप से भुवनेश्वर में नवीन पटनायक का सिंहासन डोल रहा है। ओडिशा विधानसभा चुनाव को लेकर एक एग्ज़िट पोल के सामने आए आँकड़ों के अनुसार नवीन पटनायक और बीजेडी स्पष्ट बहुमत हासिल कर लेंगे। क्षेत्रीय सम्बाद-कनक न्यूज़ के एग्ज़िट पोल के मुताबिक 147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में बीजेडी 85 से 95 सीटें हासिल कर सकती है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 74 सीटों से अधिक है, तो भाजपा 25 से 34 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर सकती है, जबकि कांग्रेस को 12 से 15 और अन्य को 1-3 सीटें मिलने की संभावना है। यह तो एक क्षेत्रीय एग्ज़िट पोल का निष्कर्ष है, परंतु राष्ट्रीय स्तर के एग्ज़िट पोल यदि सही पड़ते हैं, तो ओडिशा में चार संभावनाएँ पैदा होंगी। पहली यह कि भाजपा अकेले दम पर भी सरकार बना सकती है, दूसरी यह कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी भी बन सकती है, तीसरी यह कि बीजेडी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है और चौथी यह कि बीजेडी को सादा बहुमत भी मिल सकता है, परंतु राष्ट्रीय स्तर के लोकसभा सीटों के एग्ज़िट पोल का औसत कहता है कि भाजपा को लोकसभा की अधिकतम् 15 सीटें मिल सकती हैं। एक लोकसभा क्षेत्र की 7 विधानसभा सीटों के हिसाब से भाजपा को विधानसभा की 105 सीटें मिल सकती हैं। यदि बीजेडी अधिकतम् 11 सीटें जीतेगा, तो उसे इसी गणित के आधार पर विधानसभा की 77 सीटें मिलेंगी, जो बहुमत से अधिक है, परंतु काँटे की टक्कर रही होगी, तो ओडिशा विधानसभा कदाचित त्रिशंकु भी बने।

नवीन के साथ भुवनेश्वर में भगवा लहरा सकते हैं नरेन्द्र

ओडिशा विधानसभा की कुल 147 सीटों में से भाजपा और बीजेडी अधिकतम् 70-70 पर आ कर अटक जाएँ, तो भुवनेश्वर पर निश्चित रूप से भगवा लहराएगा। इसके पीछे कारण है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पर्सनल केमिस्ट्री, मिलती-जुलती कार्यशैली, देश और राज्य के प्रति समान समर्पण भाव, जो फानी चक्रवात के समय पूरे देश और दुनिया ने देखा। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पिछले तीन वर्षों से मोदी विरोध का एजेंडा लेकर चल रहे नेताओं की भीड़ में जहाँ नवीन पटनायक नहीं दिखाई दिए, वहीं मोदी ने भी पूरे चुनाव अभियान में नवीन पर बड़े हमले करने से गुरेज़ किया। इतना ही नहीं, फानी चक्रवाती संकट के समय नरेन्द्र-नवीन ने मिल कर संकट का सामना किया। ऐसे में यदि ओडिशा विधानसभा में बीजेडी बड़ी पार्टी बन कर उभरा, तो वह किसी भी कीमत पर कांग्रेस या अन्य दलों से समर्थन नहीं लेगा। दूसरी तरफ मोदी-शाह की जोड़ी तुरंत ही बीजेडी का समर्थन कर ओडिशा में पहली बार एनडीए सरकार बनवाने में देरी नहीं करेंगे। यदि भाजपा बड़ी पार्टी बन कर उभरी, तो उसके पास बीजेडी से समर्थन लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा, क्योंकि भाजपा-कांग्रेस कभी एक हो नहीं सकते। तो एक बात निश्चित है कि ओडिशा में यदि भाजपा को भारी बढ़त मिलती है, तो बीजेडी भाजपा नीत एनडीए का हाथ थामने के विकल्प को ही पसंद करेगा। नवीन पटनायक की पहली प्राथमिकता ओडिशा है। ऐसे में वे भी ओडिशा में अपनी सत्ता और ज़मीन बनाए-बचाए रखने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने में गुरेज़ नहीं करेंगे।

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