‘COMPETITIVE EXAMS’ से कन्नी काटते गुज्जू युवाओं में जोश भर सकेगी सुपर 30 ?

बिहार, राजस्थान और अब यूपी में हुई टैक्स फ्री सुपर 30

गुजरात की रूपाणी सरकार किसकी कर रही है प्रतीक्षा ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। बॉलीवुड में बायोपिक फिल्मों का जैसे एक दौर शुरू हो गया है। इसी श्रृंखला में अब ऋतिक रोशन स्टारर फिल्म ‘SUPER 30’ आजकल सिनेमाघरों में धूम मचा रही है। फिल्म क्रिटिक से लेकर दर्शक तक हर कोई फिल्म की प्रशंसा कर रहा है। फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुए एक सप्ताह हो चुका है। इसके बावजूद फिल्म कमाई के लिहाज़ से भी औसत प्रदर्शन कर रही है। चूँकि फिल्म एक प्रेरणादायी ‘REAL HERO’ के जीवन पर आधारित है और युवाओं को एक प्रेरक संदेश देती है। इसलिये बिहार और राजस्थान के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपने प्रदेश के युवाओं के हित को देखते हुए फिल्म को करमुक्त घोषित कर दिया है। हालाँकि गुजरात की विजय रूपाणी सरकार ने अभी तक फिल्म को लेकर ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।

‘SUPER 30’ आनंद कुमार के जीवन पर आधारित है फिल्म

ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘SUPER 30’ बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले आनंद कुमार नामक एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित है, जो इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले लेकिन गरीब परिवार से होने के कारण महँगी कोचिंग करने में असमर्थ नवयुवाओं के लिये मसीहा बनकर उभरे हैं। वह हर साल अपनी कोचिंग इंस्टीट्यूट में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले 30 युवाओं को मुफ्त में IIT की संयुक्त प्रवेश परीक्षा JEE की तैयारी के लिये कोचिंग देते हैं। इसी कारण आनंद कुमार को सुपर 30 का टैग मिल गया है। उनकी ओर से अभी तक पढ़ाये गये 480 में 422 छात्र आईआईटी की जेईई परीक्षा पास करने में सफल हो चुके हैं।

इंजीनियरिंग के छात्रों के लिये प्रेरणादायी है फिल्म ‘SUPER 30’

यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि देश के 23 आईआईटी संस्थानों में BE-TECH कोर्स में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का रुझान तेजी से घट रहा है। पिछले 3 वर्ष के आँकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि जारी वर्ष में JEE-MAIN परीक्षा से चुने गये 83,681 विद्यार्थियों ने JEE-ADVANCED परीक्षा देने में कोई रुचि नहीं दिखाई। अप्रैल-2019 में 9,35,471 विद्यार्थियों ने जेईई-मेन के लिये पंजीकरण करवाया था, इनमें से 8,74,469 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा दी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जेईई-मेन-2019 से शीर्ष रैंक वाले 2.45 लाख परीक्षार्थियों को जेईई-एडवांस्ड परीक्षा देने के लिये क्वालिफाई घोषित किया था, परंतु इनमें से 1.73 लाख ने ही पंजीयन करवाया और इसके बाद 1,61,319 विद्यार्थियों ने ही जेईई-एडवांस्ड की परीक्षा दी।

क्या है विद्यार्थियों की रुचि घटने का कारण ?

सूत्रों की मानें तो 23 आईआईटी में फैकल्टी की कमी, नये आईआईटी में आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों की कमी के कारण विद्यार्थियों को अच्छे प्लेसमेंट नहीं मिल पाते हैं। इसलिये विद्यार्थी नये आईआईटी से बी-टेक करने से पीछे हट रहे हैं। इसकी तुलना में वह पुराने संस्थानों पसंदीदा ब्रांच में बी-टेक करने को वरीयता दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष 83,681 यानी लगभग 34.15 प्रतिशत विद्यार्थियों का आईआईटी जैसे संस्थानों से मोहभंग हो गया, जो कि चिंता का विषय है। क्योंकि इससे आईआईटी की वर्ल्ड क्लास रैंकिंग भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में केवल कटऑफ में गिरावट करने या क्वालिफाई विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने मात्र से रिक्त सीटें भरने का प्रयास करना काफी नहीं है। इसके लिये आईआईटी संस्थानों की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में उदासीन हैं गुज्जू विद्यार्थी

यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की बात की जाए तो बिहार, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारतीय राज्यों की तुलना में गुजरात के विद्यार्थी उदासीन नज़र आते हैं। गुज्जू विद्यार्थियों के लिये कहा जाता है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी मिलने पर सबसे पहले फॉर्म भरने की अंतिम तारीख पूछते हैं और अंतिम तारीख आने तक उदासीन रहते हैं। अंतिम तारीख निकट आने पर ही सक्रिय होते हैं और फॉर्म भरकर परीक्षा की तैयारी शुरू करते हैं। जबकि उनकी तुलना में अन्य राज्यों के विद्यार्थियों का रुझान ऐसा नहीं है, वह प्रतियोगी परीक्षा की तारीख आने से पहले ही परीक्षा की तैयारियों में जुट जाते हैं और तारीख घोषित होते ही परीक्षा का फॉर्म भर देते हैं। ऐसे में जब गुजरात सरकार को गुज्जू विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर उनकी उदासीनता दूर करने के कारगर प्रयास करने चाहिये और विद्यार्थियों के लिये प्रेरणादायी इस ‘SUPER 30’  फिल्म को जहाँ बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य करमुक्त करके अपने युवाओं को फिल्म देखने के लिये प्रेरित कर रहे हैं, वैसे ही गुजरात सरकार को भी चाहिये कि वह भी अपने गुज्जू युवाओं को प्रेरित करने के लिये ऐसे कदम उठाने के लिये आगे आए।

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