क्या अब मोदी सरकार का अगला एजेंडा समान नागरिक संहिता लागू करना है ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के साथ ही मोदी सरकार ने इस बात के भी संकेत दे दिये हैं कि अब वह देश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इस बात के संकेत तब मिले जब अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मोदी सरकार के मंत्रियों ने प्रतिक्रिया दी। मोदी सरकार में नंबर 3 की बड़ी हैसियत रखने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि अब यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का समय आ गया है।

भाजपा के एजेंडे में है समान नागरिक संहिता

धारा 370, अयोध्या में राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) जैसे मुद्दे शुरू से ही भाजपा के एजेंडा में शामिल रहे हैं। इनमें से दो महत्वपूर्ण मुद्दों का निराकरण हो गया है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म करके उसका पुनर्गठन किया जा चुका है और अब वह एक केन्द्र शासित प्रदेश बन चुका है। अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में था, उसका भी शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ निपटारा हो गया है। राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो चुका है। इसलिये अब समान नागरिक संहिता और एनआरसी ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। संसद के शीतकालीन सत्र में एनआरसी और समान नागरिक संहिता से जुड़े कानूनों में संशोधन के बिल लाये जा सकते हैं और इन्हें लागू किया जा सकता है।

शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है बिल

वैसे तो समान नागरिक संहिता लागू किये जाने की चर्चा पिछले वर्षा सत्र से ही शुरू हो गई थी, जब मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाली धारा 370 को समाप्त करने का बिल संसद में पेश किया था। ऐसा कहा जाने लगा था कि अब मोदी सरकार का अगला कदम देश में समान नागरिक संहिता लागू कराने का होगा, परंतु इसी बीच अयोध्या विवाद की सुप्रीम कोर्ट में दैनिक सुनवाई शुरू हो गई, जिससे सभी का ध्यान उधर डायवर्ट हो गया। अब जबकि अयोध्या विवाद का निराकरण हो चुका है और आगामी 18 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र प्रारंभ हो रहा है, जो 13 दिसंबर तक चलेगा, तो अब मोदी सरकार इन दोनों मुद्दों पर आगे बढ़ सकती है। विपक्ष भले ही समान नागरिक संहिता और एनआरसी को सांप्रदायिक एजेंडा करार देता हो, परंतु भाजपा हमेशा ही इन दोनों मुद्दों को राष्ट्रवादी एजेंडे के रूप में पेश करती आई है। गृह मंत्री अमित शाह बार-बार एनआरसी पर यह कहते हुए बल देते रहे हैं कि देश में घुसपैठियों के लिये कोई जगह नहीं होगी। अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समान नागरिक संहिता पर दिये गये बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि मोदी सरकार का अगला कदम इन्हीं दोनों मुद्दों को लेकर आगे बढ़ना होगा।

क्या है समान नागरिक संहिता ?

समान नागरिक संहिता अथवा समान आचार संहिता का अर्थ एक धर्मनिरपेक्ष (असांप्रदायिक-सेक्युलर) कानून होता है जो सभी धर्म के लोगों पर समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो देश में हर नागरिक के लिये एक समान कानून का होना, फिर वह व्यक्ति किसी भी धर्म या जाति का हो। अभी देश में अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। यूसीसी लागू होने के बाद सभी धर्मों के नागरिकों के लिये एक जैसा कानून हो जाएगा। इसको यदि उदाहरण से समझें तो अभी मुस्लिमों में उनके शरिअत कानून के मुताबिक तीन शादियाँ करने तक की छूट है और मात्र तीन बार तलाक कह देने से रिश्ता खत्म करने की परंपरा है, परंतु समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम समुदाय में भी एक ही शादी को जायज ठहराया जाएगा। तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ मोदी सरकार पहले ही कानून बना चुकी है। इसी प्रकार महिलाओं को अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार मिलेगा और गोद लेने जैसे मामलों में भी एक समान नियम लागू होंगे।

गोवा में लागू है समान नागरिक संहिता

भारत में अभी एनआरसी केवल असम में और समान नागरिक संहिता केवल गोवा में लागू है। जबकि दुनिया के अधिकांश देशों में समान नागरिक संहिता जैसे कानून लागू हैं, इनमें पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल हैं। वहाँ भी अल्पसंख्यक हिंदू इस यूसीसी का विरोध करते हैं और भारत में भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा विपक्षी दल इसका विरोध करते हैं। दूसरी तरफ यह विरोध ही भाजपा की राष्ट्रवादी और हिंदुत्ववादी छवि को और मुखर बनाने में मदद करता है।

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