कचौड़ी ने बनाया करोड़पति, पर TAX भरने की कंजूसी : अब जाँच के फेरे में फँसा !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। अगर आप चाय या नास्ता, जंकफूड या फास्टफूड बेचकर खूब कमा रहे हैं तो सावधान हो जाइये, क्योंकि आप सेल्स टैक्स की रडार में हो सकते हैं। सेल्स टैक्स विभाग ने खान-पान के ऐसे व्यापारियों की पड़ताल शुरू की है, जो वर्षों से खान-पान का व्यापार कर रहे हैं, लाखों का टर्नओवर है, मगर टैक्स की भरपाई नहीं करते हैं। सेल्स टैक्स विभाग की विशेष जाँच शाखा (SIB) ने अलीगढ़ में एक ऐसे ही कचौड़ी वाले का पता लगाया है जिसकी वार्षिक आय 60 लाख रुपये से भी अधिक है और वह करोड़पति है।

रेकी करके सेल्स टैक्स अधिकारियों ने मारा छापा

वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम के सामने जब एक बिना नाम और पहचान वाले कचौड़ी-समोसा के व्यापारी की हकीकत जानने को मिली तो एसआईबी टीम की आँखें फटी की फटी रह गईं। पहले तो एसआईबी की टीम ने इस व्यापारी का पता लगाया और दो दिन तक ग्राहक के रूप में वहाँ जाकर और आसपास बैठे रहकर उसकी बिक्री का जायजा लिया। इसके बाद जब टीम ने कचौड़ी वाले के यहाँ 21 जून को छापा मारकर उससे उसके व्यापार के बारे में बात की तो उसने अपनी पूरी कुंडली खुद ही बता दी। अलीगढ़ में सीमा टॉकीज़ के पास मुकेश नाम का यह व्यापारी पिछले लगभग 10 वर्ष से कचौड़ी-समोसा का व्यापार कर रहा है। दिन भर में उसके द्वारा उपयोग की जाने वाली सामग्री के बाद उसे जो दैनिक आय प्राप्त होती है, उसके आधार पर जब उसकी सालाना आय का टर्न ओवर निकाला गया तो उसकी वार्षिक आय 60 लाख रुपये से भी अधिक पाई गई। यह केवल अनुमानित आँकलन है, जो एसआईबी टीम के अनुसार बढ़कर 1 करोड़ से भी अधिक हो सकता है। चूँकि 40 लाख या उससे अधिक टर्नओवर वाले व्यापारी को जीएसटी में अपना पंजीकरण करवाना आवश्यक है, इसलिये इस दुकानदार को एसआईबी की ओर से फिलहाल नोटिस जारी किया गया है और उसे पिछले एक साल का जीएसटी भरपाई करने के लिये कहा गया है।

करोड़पति कचौड़ी वाले जीएसटी चुकाने का नोटिस जारी

उल्लेखनीय है कि लखनऊ स्थित स्टेट इंटेलीजेंस ब्यूरो में इस व्यापारी के बारे में शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके आधार पर अलीगढ़ वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने जाँच करके इस व्यापारी का और उसके टर्नओवर का पता लगाया है। जाँच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक जाँच में ही व्यापारी का वार्षिक टर्नओवर 60 लाख से अधिक पाया गया है, विस्तृत जाँच करने पर उसका वार्षिक टर्न ओवर एक करोड़ रुपये से अधिक पाये जाने की भी संभावना है।
मुकेश के ग्राहकों की संख्या, कच्चे माल की खरीद, रिफाइण्ड तेल, चीनी, गैस सिलिण्डर आदि तमाम खर्च के बाद तैयार होने वाले माल और बिक्री के आधार पर उससे जीएसटी वसूल किया जाएगा। तैयार माल पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है। मुकेश पिछले 10 साल से बिना जीएसटी चुकाए व्यापार कर रहा है। इसलिये अब उसे जीएसटी में पंजीकरण कराने के साथ-साथ एक साल के कारोबार का टैक्स चुकाने के लिये नोटिस दिया गया है।

अलीगढ़ में अन्य कचौड़ी वाले भी हैं सेल्स टैक्स की रडार में

इस करोड़पति व्यापारी का खुलासा होने के बाद सेल्स टैक्स विभाग के कान खड़े हो गये हैं। जाँच एजेंसी का मानना है कि मुकेश जैसे खान-पान के हजारों ऐसे व्यापारी हो सकते हैं, जो वार्षिक 40 लाख या उससे अधिक का टर्नओवर करते हैं, परंतु उन्होंने न तो जीएसटी में पंजीकरण कराया है और न ही वह जीएसटी चुका रहे हैं, बस केवल अपनी जेबें भरने में लगे हैं। इसलिये अब सेल्स टैक्स विभाग ने ऐसे व्यापारियों का पता लगाने पर ध्यान केन्द्रित किया है, जिनसे जीएसटी के रूप में विभाग को लाखों रुपये की आय प्राप्त हो सकती है। इस कार्यवाही के बाद अब ऐसे और व्यापारियों पर जीएसटी की गाज़ गिर सकती है और वे सेल्स टैक्स विभाग की रडार में आ सकते हैं। अलीगढ़ी ताले और हार्डवेयर की नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले अलीगढ़ शहर में एसआईबी ने ऐसे अन्य व्यापारियों की तलाश तेज कर दी है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले अलीगढ़ में ही लगभग 600 कचौड़ी-समोसा आदि खान-पान के बड़े व्यापारी मौजूद हैं, जो अभी तक जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। अनुमान के मुताबिक अलीगढ़ में ठेले पर कचौड़ी व अन्य खान-पान की वस्तुएँ बेचने वाले कई व्यापारी भी करोड़पति हैं। इस प्रकार ताला और हार्डवेयर की नगरी में खान-पान का व्यापार करने वाले भी करोड़पति हो गये हैं। हालाँकि इनमें से अनेक खान-पान वालों की आय और बड़ा कारोबार किसी की नज़र में नहीं चढ़ा है, परंतु आय के मामले में उन्होंने कई बड़े कारोबारियों को पीछे छोड़ दिया है। शहर के लगभग हर गली-मोहल्ले पर छोटे-बड़े कचौड़ी-समोसा के दुकानदार मिल जाते हैं। इनमें से कौन करोड़पति है और किसका टर्नओवर कितना है, यह पता लगाने की कवायद शुरू की गई है। इसी के साथ प्रदेश भर में ऐसे व्यापारियों का पता लगाया जाएगा और उन्हें जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा।

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