मिलिए भारत के सबसे कम उम्र के ‘स्टीफन हॉकिंग’ से…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 29 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। सफलता का कोई रंग नहीं होता, उम्र नहीं होती, जाति नहीं होती, धर्म नहीं होता और न ही होती है शारीरिक सुन्दरता। आँखों से न देख पाने वाला व्यक्ति (रवीन्द्र जैन) भी बिना देखे मधुर संगीत सँजो सकता है, तो वहीं एक महिला पैर कट जाने के बावजूद नर्तकी (सुधा चंद्रा) बन जाती है। आज हम आपको एक ऐसे ही अनोखे बालक से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसने अपनी शारीरिक कमी को भुला दिया और व्हील चेयर पर बैठ कर 7 ऐसे आविष्कार कर दिखाये जो वास्तव में सराहनीय हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं दिव्यांग हृदयेश्वर सिंह भाटी की। हृदयेश्वर को भारत सरकार की ओर से बाल श्रेणी में उत्कृष्टता पुरस्कार के लिये चुना गया है। आइये जानते हैं कौन है हृदयेश्वर सिंह भाटी ?

हृदयेश्वर सिंह भाटी (Hridayeshwar Singh Bhati) का जन्म 3 सितंबर, 2002 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। उसके पिता का नाम सरोवर सिंह भाटी है। 17 वर्षीय हृदयेश्वर सिंह भाटी बचपन से ही ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy ) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और व्हील चेयर की सहायता से चलता है। अपनी इस विकलांगता को अनदेखा करते हुए हृदयेश्वर ने शतरंज जैसे खेल को जिसमें मूलतः दो खिलाड़ी आमने-सामने बैठ कर खेलते हैं, 6 खिलाड़ियों वाला खेल बना दिया है। अर्थात 2013 में केवल 9 वर्ष की आयु में हृदयेश्वर ने 6 खिलाडियों की गोल शतरंज का आविष्कार किया, इसी के साथ वह देश का सबसे कम आयु वाला एक दिव्यांग पेटेंट धारक भी बन गया। इसके बाद हृदयेश्वर ने 12 से 60 खिलाड़ियों के खेलने के लिए एक और गोल शतरंज का आविष्कार किया। इसी प्रकार उसने कुल 7 आविष्कार किये, जिनमें से 3 का वह पेटेंट करवा चुका है और कई पुरस्कार भी जीते हैं। केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से जारी एक पत्र के अनुसार हृदयेश्वर को बाल श्रेणी के अंतर्गत उत्कृष्ट रचनात्मक बाल (पुरुष)-2019 सशक्त दिव्यांगता का राष्ट्रीय पुरस्कार देने के लिये चुना गया है। नई दिल्ली में 2 दिसम्बर को आयोजित होने वाले समारोह में हृदयेश्वर सिंह भाटी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। हृदयेश्वर सिंह भाटी अपनी सफलता का श्रेय ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking) को देता है। उसका कहना है, “मैं हॉकिंग की तरह बनना चाहता हूँ, जो मोटर न्यूरॉन (Motor Neuron) बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक बने।”

हृदयेश्वर सिंह भाटी के मल्टी प्लेयर शतरंज का संस्करण एक परिपत्र बोर्ड पर 228 काले और सफेद खानों के साथ खेला जाता है। इसमें 12 लाल रिक्त स्थानों का उपयोग नहीं किया जाता। इस खेल को 2 से 3 की टीम में 6 खिलाड़ी खेल सकते हैं। खेल का नियम और सभी मानक शतरंज के टुकड़े और उनकी चालें हैं। इसमें अलग-अलग सेनाओं को रंग द्वारा प्रतिष्ठित किया जाता है। हृदयेश्वर सिंह भाटी ने न केवल सबसे कम आयु के आविष्कारक का दर्जा प्राप्त किया है, यद्यपि वह उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा भी है, जो लोग अपनी दिव्यांगता से निराशा के अंधकार में डूब जाते हैं। हृदयेश्वर ने सिद्ध किया है कि कुछ करने की चाह हर कठिन मार्ग को सरल बना देती है। हृदयेश्वर सिंह भाटी को युवाPRESS सैल्यूट करता है।

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