अब भारत में भी आएगा ROAD RAIL का दौर, जो लाएगा कार्गो परिवहन में क्रांति

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 10 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। परिवहन भारत की अर्थ व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लगभग 32,87,240 किलोमीटर क्षेत्रफल और 136 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत में परिवहन एक अनिवार्य अंग है। भारत परिवहन विश्व के सबसे विशाल परिवहन नेटवर्क्स में से एक है। भारत में 1991 के उदारीकरण के बाद पूंजी और प्रौद्योगिकी निवेश की बाढ़ आ जाने के बाद से परिवहन के संसाधनों का भी तेजी से विकास हुआ है, जो निरंतर प्रगति पर है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार एक नया परिवहन साधन भारत परिवहन विभाग में जोड़ने के लिए सज्ज करने जा रहा है। अर्थात केन्द्र सरकार और परिवह मंत्रालय शीघ्र ही कई कंटेनर वाली मालवाहक गाड़ियों को एक साथ चलाने के एक रोड ट्रेन फॉर्मूला का प्रयोग करने जा रहे हैं, जिसका प्रमुख कार्य सड़क माध्यम से माल को अधिक कुशलता से और सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाना होगा। इससे न केवल यातायात खर्च और परिवहन में लगने वाले समय में कमी आएगी, अपितु रोड रेल के आने से भारत में बड़े पैमाने पर कार्गो परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।

क्या है कार्गो परिवहन और रोड रेल फॉर्मूला ?

सामान्यत: वाणिज्यिक लाभ के लिए जहाज, विमान, ट्रेन, वैन या ट्रक के द्वारा माल या उत्पाद को परिवहन करना कार्गो (Cargo) या फ्रेट परिवहन (Freight transport) की श्रेणी में आता है और लंबे-माल ढोने वाले इंटरमॉडल कंटेनर को बड़े पैमाने पर एक साथ ले जाने की प्रक्रिया को रोड रेल फॉर्मूला कहा जाता है। एक रोड ट्रेन या लैंड ट्रेन एक प्रकार का ट्रकिंग वाहन है, जिसका उपयोग ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और यूरोप के ग्रामीण और सुदूरवर्ती के क्षेत्रों में किया जाता है। इसमें 2 या 2 से अधिक ट्रेलर या अर्ध-ट्रेलर लगे होते हैं। इसी रोड रेल फॉर्मुला का प्रयोग शीघ् ही भारत में होने जा रहा है। केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय इस योजना पर कार्य कर रहा है। साथ ही वह 2500 किलोमीटर ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को भी इससे जोड़न का विचार कर रहा है और इसीलिए इस भावी रोड रेल की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई को इस एक्सप्रेस-वे के अनुसार बनाने की योजना बनाई गई है। मंत्रालय के प्रस्तावित मसौदे के अनुसार रोड ट्रेन की लंबाई 25 मीटर होगी और एक ट्रक के साथ 3 ट्रेलर जोड़े जाएँगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NATIONAL HIGHWAYS AUTHORITY OF INDIA) यानी NHAI देश के नये मैन्यूफैक्चरिंग हब को जोड़ने के लिए दिल्ली-मुंबई जैसे एक्सप्रेस-वे में इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने को भी प्राथमिकता दे रहा है।

19वीं शताब्दी के मध्य शुरू हुऐ रोड रेल फॉर्मूला

रोड रेल फॉर्मूला नया नहीं है। 19वीं शताब्दी के मध्य तक पोर्ट ऑगस्टा क्षेत्र से दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स रेंज में प्रथम संचालित रोड रेल (Road Train) का उपयोग किया गया, जिसमें पहली बार खनिजों की ढुलाई के लिए बैलगाड़ियों की जगह रोड रेलवे का प्रयोग हुआ था। इन सभी प्रारंभिक रोड रेल में कई वैगनों को खींचने वाले कर्षण इंजन (Traction Engine) का प्रयोग किया गया था। क्रीमियन युद्ध (Crimean War- 5 Oct 1853 to 30 Mar 1856) के दौरान कई खुले ट्रकों को खींचने के लिए ट्रैक्शन इंजन का ही उपयोग किया गया था। 1898 तक 4 वैगनों (Wagon) वाली भाप ट्रैक्शन इंजन ट्रेनों को इंग्लैंड में सैन्य युद्धाभ्यास में लगाया गया था। 1930-40 के दशक में ऑस्ट्रेलिया सरकार ने उत्तरी क्षेत्र में माल परिवहन और आपूर्ति करने के लिए एक एईसी रोड ट्रेन का संचालन किया, जिसने 19वीं शताब्दी के अंत तक रेगिस्तान में ट्रेकिंग कर रहे अफगान ऊँट गाड़ियों की जगह ले ली। वर्तमान में रोड ट्रेन 2 ट्रेलरों से लेकर 113 ट्रेलरों वाली मार्केट में उपलब्ध है।

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