यह दर्द भरी दास्ताँ पढ़ कर आप छोड़ देंगे अमेरिका जाने की दीवानगी…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 21 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में आज हर 10 में से 9 लोगों का सपना होता है कि वे विदेश में जाकर पैसा कमाएँ और तेजी से अमीर बन जाएँ। विशेषकर लोगों में अमेरिका (USA), ब्रिटेन (UK), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जाने को लेकर अधिक दीवानगी है, परंतु हम अब जो आगे बताने जा रहे हैं, उसे पढ़ कर आपके मन में विदेशों में विशेषकर अमेरिका में जाकर पैसा कमाने की दीवानगी का नशा उतर जाएगा, क्योंकि आँखों में सुनहरे भविष्य के हज़ारों स्वप्न लिये अमेरिका गए 145 लोगों ने अपनी जो आपबीती सुनाई है, उसे पढ़ कर रौंगटे खड़े हो सकते हैं। ये सारे लोग गये तो थे नौकरी करने, कुछ नाम कमाने, कुछ बड़ा कर दिखाने, परंतु जब लौटे तो हाथ-पैर बंधे हुए और सिर पर क़ानून के उल्लंघन का आरोप लिये हुए लौटे। इन 145 भारतीयों को अमेरिका से भारत के दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर अपराधियों की तरह लाया गया। आँखों में शर्म और दिल में पीड़ा लिये जब इन भारतीयों ने भारतीय भूमि पर पैर रखे, तब उन्हें एहसास हुआ कि अपना देश ही आख़िर अपना ही होता है। आइए जानते हैं ऐसा क्या हुआ इन भारतीयों के साथ, जिसने इन्हें भीतर तक झकझोर दिया ?

दीवानगी में होश खोए और फँस गए

देश में अमेरिका जाकर धनवान बनने की दीवानगी ऐसी छाई हुई है कि लोग इस धुन में अच्छा-बुरा सब कुछ भूल जाते हैं। बस, एक ही धुन सवार रहती है कि किसी तरह अमेरिका पहुँच जाए। इन 145 भारतीयों ने भी अमेरिका जाने के लिए एजेंटों को माध्यम बनाया था। 25-25 लाख रुपये एजेंटों को देकर ये सभी 145 भारतीय अमेरिका गये थे, कुछ लोगों को तो वहाँ एक अच्छी नौकरी भी मिल गई थी, जीवन बहुत ही सुखमय और आरामदायक तरीके से बीतने लगा था, परंतु अचानक भाग्य ने पल्टा खाया और अवैध रूप से अमेरिका में घुसने के आरोप में इन सभी को अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों (Immigration Officer) ने गिरफ़्तार कर लिया और उन्हें अवैध प्रवासियों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में क़ैद कर लिया गया। कुछ दिनों तक उन्हें ये बताया भी नहीं गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया ? कई हफ्तों बाद उन्हें पता चला कि उनके पास अमेरिका में प्रवेश करने या वहाँ रहने या नौकरी के लिए उचित दस्तावेज नहीं हैं। लगभग 5 महीने तक इन सभी भारतीयों, जिनमें 3 महिलाएँ भी थीं, को अमेरिका में डिटेंशन सेंटरों में बंदियों की तरह रखा गया, जहाँ उन्हें खाने-पीने, उठने-जागने जैसी नित्य ज़रूरतें पूरी करने को लेकरयातनाएँ तक सहनी पड़ीं। बिना किसी अपराध के मिली इन यातनाओं ने उन्हें बुरी तहर तोड़ दिया। इनमें से कुछ लोग क्वॉलिफाइड इंजिनियर थे, परंतु उनके पास नौकरी नहीं थी, जिसके चलते वे नौकरी पाने की लालसा में अमेरिका गये, परंतु वहाँ उन्हें कष्ट और अपमान के आलावा कुछ नहीं मिला।

रौंगटे खड़े कर देती है इनकी आपबीती !

रमनदीप सिंह गडा नामक एक भारतीय ने आपबीती बताते हुये कहा, ‘लंबे समय बाद किसी ने मुझे मेरे नाम से पुकारा है। इमिग्रेशन कैंपों में हमें हमारे नामों से नहीं, अपितु नंबरों से बुलाया जाता था, जो हमें दिया गया था। वहाँ हमारे साथ अपराधियों जैसा बर्ताव होता था। कई दिनों तक तो मुझे भूखे भी रहना पड़ा, क्योंकि भोजन में कभी-कभी बीफ दिया जाता था, जिसे मैं नहीं खा सकता था।’ उन्हीं में से एक 21 वर्षीय सुखविंदर सिंह जब दिल्ली पहुँचे, तब उन्होंने लगभग एक वर्ष बाद मोबाइल फोन को हाथ से छुआ था और सबसे पहले उन्होंने अपने पिता को फोन किया और अपने घर वापस आने की सूचना दी। पिता से बातचीत के दौरान वे बुरी तरह सिसकने लगे थे। ऐसी ही कहानी जसवीर सिंह की है। जसवीर कहते हैं, ‘मेरा कज़ीन लगभग एक दशक पहले अमेरिका गया था और अब शानदार जीवन बिता रहा है। फेसबुक पर उसके खुशहाल जीवन की तस्वीरों को मैं मोहित हो गया और मैंने भी तय किया कि मुझे भी अमेरिका जाना है, परंतु अब मेरे पास हिम्मत नहीं है कि मैं परिवार वालों का सामना करूँ। उन्हें क्या मुँह दिखलाऊँगा। मैंने अपने माता-पिता की जीवन भर की बचत को अमेरिका जाने के लिए खर्च कर दिया।’ फिलहाल इन सभी भारतीयों को भारत वापस DEPOT कर दिया गया है।

विदेश की बात करें, तो अमेरिका जाना भारतीय लोगों की पहली पसंद है। अमेरिका जाने वाले छात्रों में भारतीय छात्रों की संख्या चीन के बाद सबसे अधिक है। भारत से 2018-19 में 2 लाख से अधिक छात्रों को अमेरिका भेजा गया था। इंटरनेशनल एजुकेशन एक्सचेंज (International Educational Exchange) 2019 के ओपन डोर (​Open Doors) की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में 18 प्रतिशत छात्र भारतीय थे। 2010 के बाद से अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों की जनसंख्या में 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर 6,30,000 हो गई है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि अमेरिका आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (U.S. Immigration and Customs Enforcement) ने 2017 में 3,013 दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को गिरफ़्तार किया था और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर पेट्रोल (United States Border Patrol) ने अक्टूबर 2014 से अप्रैल 2018 के बीच लगभग 17,119 दक्षिण एशियाई लोगों को बॉर्डर और इंटीरियर एन्फोर्समेंट के जरिए अरेस्ट किया था। वर्तमान समय यानी 2019 में अमेरिका की कुल जनसंख्या 33,65,60,000 है, जिनमें 32 लाख से अधिक हिन्दू भारतीय हैं। अमेरिका जाने वाले भारतीयों के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराने की बजाए उन भारतीयों को सबक लेना चाहिए, जो अमेरिका जाकर धन कमाने की लालसा व दीवानगी में कुछ भी ‘भला-बुरा’ कर गुज़रते हैं और अंतत: उन्हें इस तरह के दुर्व्यवहार व यातनाओं तथा अपमान का सामना करना पड़ता है।

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