VIDEO : रूसी सेना में भी जोश भर गया ‘शहीद’ का गीत ‘ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम…’

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 30 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। स्वतंत्रता के पूर्व और पश्चात भी राष्ट्र भक्ति को समर्पित हज़ारों गाने लिखे और गाये गए और जा रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय फिल्म जगत बॉलीवुड ने तो राष्ट्र भक्ति से लबरेज कई फिल्में बनाईं और उनमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद माँ भारती के लिए जीवन समर्पित करने वाले स्वतंत्रता सैनिकों व सेना के जवानों को समर्पित गीत भी दिए। ऐसा ही एक गीत है ‘ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम…’, जो फिल्म ‘शहीद’ का है। यह एक ऐसा गीत है, जो आज भी गाने वाले और उसे सुनने वाले दोनों के दिल में देशभक्ति जोश भर देता है।

भारत के महान शहीद भगत सिंह पर 1965 में बनी फिल्म शहीद का यह गीत इतना प्रभावशाली है कि भारत के आम नागरिक से लेकर भारतीय सेना के जवान भी इसे आज भी उतने ही जोश के साथ गुनगुनाते-गाते हैं। इस गीत के बोल हैं, ‘ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम, तेरी राहो में जान तक लुटा जायेंगे, फूल क्या चीज़ है, तेरे कदमो में हम भेंट अपने सरो की चढ़ा जायेंगे।’ यह गीत अपने दौर का एक ऐसा गीत है, जिसे आज भी सुन कर क्रांतिकारी जोश रगो में दौड़ने लगता है। 54 वर्ष पुराना यह गाना फिल्म शहदी का है, जिसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया था, परंतु आज अचानक यह गीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। इसका कारण यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भारतीय फिल्म शहीद का यह गीत कोई भारतीय नागरिक या सैनिक नहीं, अपितु रूस की सेना के विद्यार्थी गाते दिखाई दे रहे हैं। एक कार्यक्रम में रूसी सेना के कैडेट्स ने ये गीत गाकर जो समा बाँधा वह अद्भुत था। जब रूसी सेना के कैडेट्स ने भारतीय बॉलीवुड फिल्म का देशभक्ति से भरा गीत गाया, तो वह भारतीयों के मन को छू गया और तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

दरअसल Lt Col N Thiagarajan ने अपने ट्विटर अकाउंट से शुक्रवार यानी 29 नवंबर, 2019 को सुबह 9:55 पर एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने इस वीडियो को पोस्ट किया था। इस वीडियो में रूसी सेना के कैडेट्स ‘ऐ वतन…’ गीत गाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में ब्रिगेडियर राजेश पुष्कर भी नजर आ रहे हैं, जो मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में सेना के सलाहकार हैं। इससे पहले भी भारतीय (Indian) और अमेरिकी सैनिक (American Army) एक साथ असम रेजिमेंट के MARCH SONG ‘बदलूराम (Badluram) का बदन जमीन के नीचे है और हमको उसका राशन मिलता है…’ पर नाचते और गाते नज़र आये थे।

‘शहीद’ फिल्म 1916 के भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित एक हिन्दी भाषा की फिल्म है, जो 1965 में भगत सिंह के जीवन पर बनाई गई। यह देशभक्ति की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है, जिसकी कहानी स्वयं भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त ने लिखी थी। इस फिल्म में अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के गीत थे। मनोज कुमार ने इस फिल्म में शहीद भगत सिंह का जीवन्त अभिनय किया था। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम पर आधारित यह अब तक की सर्वश्रेष्ठ प्रामाणिक फिल्म है। रूसी सेना के कैडेट्स ने यह गीत गाकर फिर एक बार शहीद भगत सिंह और उनके बलिदान के संस्मरण ताज़ा कर दिए।

13वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की सूची में 1 जनवरी, 1965 को रिलीज़ हुई मनोज कुमार की इस फिल्म यानी शहीद ने हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के पुरस्कार के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म के लिये नरगिस दत्त पुरस्कार भी अपने नाम किया था। बटुकेश्वर दत्त ने शहीद फिल्म की कहानी लिखी थी और उसी कहानी पर आधारित पटकथा (स्क्रिप्ट) लिखने के लिए दीनदयाल शर्मा को पुरस्कृत किया गया था। यह भी महज़ एक संयोग ही था कि जिस साल यह फ़िल्म रिलीज़ हुई थी, उसी साल बटुकेश्वर दत्त का निधन भी हुआ।

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