जब राष्ट्रपति ने 12 वर्ष बाद मिले परम मित्र को मंच पर बुलाया…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 10 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। ईश्वर ने हमें सभी संबंध प्रारब्धगत दिए हैं, परंतु मित्रता का संबंध ही एक ऐसा संबंध है, जिसका चुनाव हम अपनी इच्छा से कर सकते हैं। यही एक ऐसा संबंध है, जिसमें किसी प्रकार की कोई सीमा, ऊँच-नीच, जात-पात और ग़रीबी-अमीरी बाधा नहीं बनती। हमारे देश में तो परम मित्रों की श्रेणी में राम-सुग्रीव, राम-विभीषण, कृष्ण-सुदामा से लेकर कर्ण-दुर्योधन जैसे पात्र उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। आज की दुनिया में मित्रता का दायरा भले ही निहित स्वार्थों में सिमटता जा रहा हो, परंतु वास्तविक मित्रता के मूल में तो मित्र का आनंद ही सर्वोपरि माना जाता है। हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी एक ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया, जब उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हुए भी 12 वर्षों के बाद मिले अपने मित्र को दर्शक दीर्घा से मंच पर बुला लिया। राष्ट्रपति ने एक समारोह में जैसे ही अपने एक मित्र को देखा, उन्होंने सारे प्रोटोकॉल तोड़ दिए और मिलने के लिए बुलाया। समारोह समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति के आदेश पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बीरभद्र को समारोह मंच पर लेकर आए। अपनी डाउन-टू-अर्थ प्रकृति के लिए जाने जाने वाले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने मित्र के साथ न केवल तसवीरें खिंचवाई, अपितु उन्हें गले भी लगाया।

वास्तव में हुआ यूँ कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ओडिशा में राजधानी भुवनेश्वर के उत्कल विश्वविद्यालय में आयोजित प्लैटिनम जयंती समारोह में भाग लेने पहुँचे थे। इसी समारोह में भाग लेने के लिए ओडिशा से पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह भी पहुँचे थे। राष्ट्रपति ने जैसे ही सफेद पगड़ी में बीरभद्र को भीड़ में देखा, तुरंत पहचान लिया और अपने मंत्री को उन्हें बुलाने के लिए भेजा। दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और बीरभद्र सिंह की मित्रता उस समय से है, जब बीरभद्र 2000 और 2006 के बीच राज्यसभा के सदस्य थे। उस समय कोविंद-सिंह दोनों ही संसद एसटी/एससी समिति के सदस्य थे और दोनों ने एक साथ 2 वर्ष तक कार्य किया था। इसी दौरान कोविंद और सिंह के बीच घनिष्ठ मित्रता हुई थी।

12 वर्ष बाद हुआ मित्रों का मिलन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उस समय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) नेता हुआ करते थे और बीरभद्र सिंह बीजू जनता दल (BJD-बीजद) के नेता हैं। लगभग 12 वर्षों के बाद कोविंद ने बीरभद्र सिंह को देखा। अब जब दोनों 12 वर्ष बाद मिले, तो एक दूसरे को देख कर इतने प्रसन्न हो गए कि उनकी ख़ुशी उनके चेहरों पर नज़र आने लगी। दोनों ने काफी समय साथ बिताया और एक दूसरे से अपनी 12 वर्षों से एकत्र की गई बातें भी साझा कीं। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति ने बीरभद्र को राष्ट्रपति भवन आने का आमंत्रण भी दिया। 74 वर्षीय बीरभद्र सिंह ने राष्‍ट्रपति के सिक्‍योरिटी ऑफिसर्स से निवेदन भी किया कि था कि उन्‍हें उनसे मिलने दिया जाए, परंतु उनके इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था, परंतु जब मंच से राष्टपति ने बीरभद्र को इशारा किया, तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा। बीरभद्र सिंह उत्‍कल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। बीरभद्र बीजू जनता दल (बीजद) से वर्ष 2000 से 2006 तक राज्‍यसभा के सदस्य रहे थे। राजनीति के शुआती दौर में रामनाथ कोविंद और बीरभद्र सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन के कई उतार-चढ़ावों को देखा था।

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