राष्ट्र को मिला प्रथम CDS और अब रेलवे को मिलेगा CEO

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 26 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले ही तीनों सेनाओं के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (Chief Of Defence Staff) यानी CDS देने की घोषणा की है। इस घोषणा के साथ ही अब भारतीय सुरक्षा के सभी आयाम जल, थल और नभ को एक 4 स्टार वाला ऑफिर मिल जाएगा, जो तीनों सेनाओं का संचालन करेगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ का मकसद देश की सेनाओं को ट्रेनिंग, उसके रख-रखाव, स्टॉफ और विभिन्न अभियानों के लिए एकीकृत करना है। इसके साथ ही सैन्य सलाह की गुणवत्ता को बढ़ाना भी है। वहीं मोदी सरकार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) यानी CEO के रूप में एक और तोहफा रेलवे विभाग को देने जा रही है। दरअसल 16 अप्रैल, 1853 को स्थापित हुए रेलवे बोर्ड को 1661 वर्षों पश्चात एक बार पुनः गठित किया जा रहा है, जिसके साथ ही इसके सदस्यों की संख्या कम करने और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन की जगह आने वाले समय में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद को सृजित करने की भी घोषणा की गई है।

रेलवे बोर्ड के प्रथम सीईओ विनोद कुमार यादव होंगे, जो वर्तमान समय में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन भी हैं। उनके पास चेयरमैन सह सीईओ का दोहरा पद रहेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक कदम करार देते हुए कहा कि इससे आने वाले समय में रेलवे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, परंतु सच्चाई यह भी है कि नए रंग-रूप में सामने आने वाले रेलवे बोर्ड और रेलवे के नए सीईओ के सामने चुनौतियाँ कम नहीं होंगी।

विनोद कुमार यादव उर्फ वी.के. यादव 1980 बैच के IRSEE अधिकारी और भारतीय रेलवे बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष हैं। उन्होंने 1980 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज (अब मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई किया है। इसके बाद 2004 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ला ट्रोब विश्वविद्यालय से एमबीए किया।

CEO बनने के बाद विनोद के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, अगले 12 वर्षों में रेलवे के लिए 50 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त करना। रेलवे में निवेश जुटाने के अतिरिक्त उनके सामने यह चुनौती भी होगी कि वह किस तरह से पहले से चल रहे रेलवे के 8 संवर्ग के अधिकारियों को शांत करते हैं, इसकी वजह ये है कि इस समय समाप्त किए गए 8 रेलवे सेवाओं में लगभग 8500 अधिकारी विभिन्न पद पर हैं। इससे पहले इन अलग संवर्गों से रेलवे बोर्ड में सदस्य बनते थे, तो वरीयता क्रम और मैरिट का पैमाना देखा जाता था।

नये आदेश के बाद रेलवे बोर्ड का स्वरूप छोटा हो गया है, ऐसे में मैरिट और वरीयता के किसी भी क्रम में पुरानी 8 सेवाओं के सभी अधिकारियों के साथ न्याय नहीं हो पाएगा। उनमें रोष पनपने से रेलवे को हानि हो भी सकती है। ट्रेनों को समय से चलाना, सभी को कंफर्म टिकट देना और सभी क्षेत्रों तक रेलवे का समयबद्ध विस्तार भी सीईओ के लिए बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ वी. के. यादव मृदभाषी, कर्मचारियों के हितैषी रहे हैं, ऐसे में संभवत: वे अधिकारियों के विरोध से तो बच जाएएँगे, परंतु संभव है कि आने वाले समय किसी अन्य अधिकारी को भी सीईओ बनाया जा सकता है।

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