थांग ता और कराटे खेलने वालीं मनु भाकर को एक सटीक लक्ष्यभेद ने बना दिया शूटर…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 23 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। लगन और हौसला हर इंसान को वह सब दे सकता है जिसकी वह चाह रखते है, बस आवश्यकता है थोड़े से प्रयास और कुशल नेतृत्व की और बात जब सपनों की हो, तो मार्ग की हर बड़ी से बड़ी बाधा भी छोटी लगने लगती है। ऐसी ही कुछ कहानी है हरियाणा की एक बेटी की, जिसने अपने हर सपने को अपना लक्ष्य बना लिया, फिर वह पढ़ाई का मैदान (क्लास रूम) हो या खेल का। हम बात कर रहे हैं हरियाणा में झज्जर जिला के गोरिया गाँव की रहने वाली मनु भाकर की, जिन्होंने खेल जगत में केवल 17 वर्ष की आयु में ही वो प्रसिद्धि और उपलब्धि प्राप्त की है, जिसे पाना बहुत ही कठिन है। 18 फरवरी, 2002 को जन्मी मनु भाकर 11वीं कक्षा की एक छात्रा हैं। उनके पिता का नाम रामकिशन भाकर है।

क्या है ‘थांग ता’ युद्ध कला, जहाँ से शूटिंग में आईं मनु

मनु भाकर एक भारतीय नवोदित शूटर (निशानेबाज़) हैं, परंतु शूटिंग प्रतिस्पर्धा खेल में आने से पहले मनु भाकर ‘थांग ता’ नामक एक युद्ध कला खेल से संबंध रखती थीं। थांग ता कला का जन्म भारत के मणिपुर प्रदेश के ‘कंगलीपैक’ (‘Kangalipac’) में लगभग 1891 में ‘मीतेई रेस’ (Meetei Race) नामक प्रजाति ने किया था। वैसे तो प्राचीन युद्ध कला के ज्ञाता इस कला को कई हज़ार वर्ष पुरानी मानते हैं, परंतु इस कला का उद्गम काल मूल रूप से ‘उत्तर पूर्वी भारत’ में मणिपुर राज्य में उस समय हुआ माना जाता है, जब मणिपुर में अंग्रेजों का आगमन हुआ था। उस समय लोग एक स्वतंत्र राज्य की तरह अपना जीवन यापन कर रहे थे। उस दौर में भारत और चीन के बीच इस मध्य युगीन काल में कई छोटे-छोटे युद्ध हुए और युद्ध में सैनिकों को पारम्परिक प्रकार के अस्त्रों-शस्त्रों का ही प्रयोग करना पड़ता था। उस काल में उन राज्यों में कई कुल एवं जातियों के लोगों के बीच हुए संघर्षपूर्ण जीवन शैली के कारण ही इस कला का जन्म हुआ था। 2 वर्ष थांग ता खेल खेलने के बाद मनु ने कराटे की ओर रुख किया और केवल 6 महीने में ही उन्होंने नेशनल कराटे चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। कराटे और थांग ता खेल दोनों ही खेलों में खेलने और अभ्यास के दौरान काफी समय देना होता है। इस कारण मनु अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थीं। वह अब तक कराटे, थांग ता, टांता, स्कैटिंग, स्वीमिंग और टेनिस खेल चुकी थीं। टांता में तो मनु लगातार 3 बार नेशनल चैंपियन रहीं और स्कैटिंग में भी स्टेट मेडल जीता। इसी दौरान एक दिन वह स्कूल में शूटिंग रेंज से गुज़र रही थीं, तो उन्होंने सोचा कि शूटिंग में हाथ आज़माया जाए। वहीं किसी से पिस्टल लेकर निशाना लगाया, तो टारगेट के काफी नज़दीक लगा। इसके बाद मनु ने स्कूल की शूटिंग एकेडमी में ही ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी और इन दोनों खेलों को छोड़ कर शूटिंग में अपना करियर बनाने का निश्चय किया।

पदकों का ढेर लगा दिया मनु भाकर ने

मनु ने शूटिंग के दौरान अपने प्रथम प्रयास में ही निशाना सही स्थान (टारगेट) पर लगाया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। सबसे पहले मनु भाकर को प्रैक्टिस करने के लिए एक गन की जरूरत थी। विदेश से एक गन मंगवाने के लिए उन्हें पिस्टल लाइसेंस की जरूरत पड़ी थी, परंतु झज्जर जिला प्रशासन ने उनके लाइसेंस के आवेदन को रद्द कर दिया था। बाद में जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया और हरियाणा सरकार के संज्ञान में आया, तो प्रशासन द्वारा की गई त्वरित जांच में फाइल संबंधित त्रुटि मिलने के बाद उसे दूर करते हुए उन्हें सप्ताह भर में ही लाइसेंस जारी कर दिया था। मनु पिछले 3 साल से शूटिंग कर रही हैं। 2017 में मनु ने 15 मेडल जीते थे। इनमें 11 गोल्ड, 3 सिल्वर और 1 ब्रांज मेडल था। 2018 में मनु ने 15 कैटेगरी के बजाय 10 कैटेगरी में ही हिस्सा लिया और सभी कैटेगरी में पदक प्राप्त किए, जिनमें 5 गोल्ड, 3 सिल्वर और 2 ब्रांज मेडल थे। मनु भाकर ने आईएसएसएफ शूटिंग वर्ल्ड कप 2019 (International Shooting Sport Federation World Cup) में देश के लिए 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। इसी के साथ मनु वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने वाली सबसे युवा भारतीय शूटर बन गईं। मनु ने 244.7 स्कोर के साथ यह पदक जीत कर जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही 3 वर्ष पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मनु 52 पदक जीत चुकी हैं। मनु ने 26 पदक अंतरराष्ट्रीय और 26 पदक राष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्राप्त किए हैं। मनु भाकर ने मार्च 2018 में मैक्सिको में आयोजित सीनियर वर्ल्ड कप में गोल्ड, मार्च 2018 में सिडनी में आयोजित जूनियर वर्ल्डकप में चार गोल्ड, अप्रैल 2018 में गोल्डकोस्ट में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड और 2019 में आयोजित चार अलग-अलग स्पर्धा में चार गोल्ड मेडल जीते हैं।

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