दादा शपूरजी की 89 वर्ष पूर्व पाई ‘पहली हिस्सेदारी’ को हाथ से कैसे जाने देते पोते साइरस ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 19 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। साइरस मिस्त्री फिर एक बार टाटा सन्स की कमान संभालने वाले हैं। नैशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (National Company Law Tribunal) यानी NCLAT ने मिस्त्री को टाटा सन्स की कमान संभालने के लिए हरी झंडी दे दी है। मिस्त्री के पक्ष में एनसीएलएटी के इस निर्णय ने फिर एक बार सिद्ध कर दिया है कि ज़िद के आगे जीत होती है। 2016 में निष्कासित किए गए मिस्त्री हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहे। आख़िर बैठते भी कैसे ? जिस टाटा सन्स में दादा शपूरजी मिस्त्री ने 89 वर्ष पूर्व पहली हिस्सेदारी हासिल की थी, उसे पोते साइरस मिस्त्री यूँ ही तो नहीं छोड़ सकते थे।

जी हाँ। मिस्त्री परिवार का टाटा सन्स से 89 वर्ष पुराना नाता है। मिस्त्री के पिता पल्लोनजी मिस्त्री ने अपने दादा के नाम पर शपूरजी पल्लोनजी एंड सन्स से व्यवसाय की शुरुआत की थी। 1930 में साइरस मिस्त्री के दादा यानी पल्लोनजी मिस्त्री के पिता शपूरजी मिस्त्री ने पहली बार टाटा सन्स में स्टेक लेकर हिस्सेदारी की नींव डाली थी, जो पिता पल्लोनजी मिस्त्री ने आज 18.5 प्रतिशत तक पहुँचा दी है। आज भी टाटा सन्स में पल्लोनजी मिस्त्री की 18.5 प्रतिशत भागीदारी है, जो टाटा सन्स में किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में साइरस मिस्त्री टाटा सन्स में बाप-दादा की बनाई हिस्सेदारी से हाथ कैसे पीछे खींच सकते थे।

मिस्त्री के लिए दूसरी बार तोड़ी गई परम्परा

Tata Group की सबसे बड़ी विशेषता और परंपरा रही है कि उनकी कंपनी का चेयरमैन टाटा के परिवार का कोई सदस्य ही बनता आया है, परंतु टाटा कंपनी ने ये परंपरा को तोड़ते हुए 1932 में नौरोजी सकलतवाला (Nowroji Saklatwala) को टाटा सन्स का पहला गैर टाटा पारिवारिक चेयरमैन बनाया था। नौरोजी जमशेदजी टाटा की बहन वीरबाईजी टाटा के पुत्र थे। उनके बाद टाटा परिवार का सदस्य की कंपनी का निदेशक बनता आया था, परंतु 150 वर्षों के इतिहास को दूसरी बार तोड़ते हुए दिसंबर-2012 में साइरस मिस्त्री को टाटा सन्स के निदेशक के रूप में चुना गया। 4 वर्ष टाटा सन्स में निदेशक के पद पर कार्य करने के बाद साइरस को अचानक 24 अक्टूबर, 2016 को पद से हटा दिया गया। उस समय टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने से आहत साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। साइरस ने टाटा सन्स के विरुद्ध नैशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (National Company Law Tribunal) यानी NCLAT में अपील की थी। उनका कहना था, ‘एक निरीह चेयरमैन’ की स्थिति में ढकेल दिया गया था। इतना ही नहीं, एक गोपनीय विस्फोटक मेल में मिस्त्री ने टाटा नैनो कार को लेकर भी अहम खुलासे किए थे और चर्चा में रहे थे। अब जब साइरस को पुनः टाटा सन्स के चेयरमैन के पद पर बहाल किया गया है, तो एक बार फिर वे लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं।

दरएसल NCLAT ने साइरस मिस्त्री को टाटा सन्स के एग्ज़ीक्युटिव चेयरमैन के पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। NCLAT ने कहा कि मिस्त्री फिर से टाटा सन्स के एग्जिक्युटिव चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। NCLAT में यह याचिका मिस्त्री और दो इन्वेस्टमेंट फर्म की तरफ से दाखिल की गई थी। जुलाई में अपीलेट ने फैसला सुरक्षा रख लिया था। साइरस मिस्त्री टाटा सन्सके छठे चेयरमैन थे। NCLAT ने कहा कि मिस्त्री फिर से टाटा सन्स के एग्जिक्युटिव चेयरमैन नियुक्त किए जाएं। साथ ही, उसने एन. चंद्रशेखरन के इस पद पर नियुक्ति को गैरकानूनी बताया है। साइरस पल्लोनजी मिस्त्री (Cyrus Pallonji Mistry) का जन्म 4 जुलाई, 1968 एक पारसी व्यापारी के घर हुआ था। साइरस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में कैथेड्रल एंड जॉन केनन स्कूल (The Cathedral And John Connon School) में पूरी की। इसके बाद साइरस मिस्त्री ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में बी एस से स्नातक किया। इसके पश्चात उन्होंने लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में एमएससी की मास्टर डिग्री ली। साइस मिस्त्री ने वकील इकबाल छागला की बेटी रोहिका छागला से शादी की है, उनके दो बेटे हैं। मिस्त्री एक आयरिश नागरिक और भारत के एक स्थायी निवासी हैं।

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