अब अपने खाते से निकाल सकेंगे बैंलेंस से अधिक पैसा ! जानिए कैसे ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 19 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। यदि आपको पैसों की बहुत आवश्यकता है और आपके पास या आपके बैंक अकाउंट में भी पैसे कम हैं, तो ऐसी स्थिति में आप किसी से पैसे उधार लेते हैं। सोचिए, यदि पैसे उधार भी नहीं मिल रहे हों, तो आपको कितनी परेशानी होगी। हालाँकि अगर आपका खाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में है, तो आपको ऐसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि एसबीआई अपने ग्राहकों के लिये एक नई सुविधा लेकर आया है। अब आवश्यकता पड़ने पर SBI के ग्राहक अपने खाते में मौजूद धनराशि से अधिक पैसे निकाल सकेंगे। SBI की इस नई स्कीम का नाम है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी (Overdraft Facility)। इस नई सुविधा के चलते अब SBI ग्राहकों को पैसे उधार लेने के लिए कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का लाभ उठाने के लिये आपको बस इतना करना होगा कि लिखित में या इंटरनेट बैंकिंग के जरिये एप्लाई करना होगा। क्योंकि ये सुविधा बैंक अपने उन्हीं ग्राहकों को देता है जो इसके लिये एप्लाई करेंगे या फिर इसके लिये ग्राहकों को अलग से स्वीकृति लेनी होगी। इतना ही नहीं, कुछ बैंक तो इस सुविधा को देने के लिए अतिरिक्त शुल्क भी लेते हैं, परंतु एसबीआई अपने ग्राहकों से ऐसा कोई शुल्क भी नहीं लेगा।

क्या है ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी ?

ओवरड्राफ्ट दो तरह के होते हैं – एक सिक्योर्ड और दूसरा अनसिक्योर्ड। सिक्योर्ड ओवर ड्राफ्ट वह होता है, जिसके लिये सिक्युरिटी के तौर पर कुछ गिरवी रखना पड़ता है। आप अपनी फिक्स्ड डिपोज़िट (एफडी), शेयर्स, घर, सैलरी, इंश्योरेंस पॉलिसी या बॉन्ड्स आदि जैसी चीजों को गिरवी रख कर उन पर ओवरड्राफ्ट हासिल कर सकते हैं। इसे आसान भाषा में एफडी या शेयर्स पर लोन लेना भी कहते हैं। ऐसा करने पर ये चीजें एक तरह से बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनांसियल कंपनीज़ (NBFCs) के पास ​गिरवी रहती हैं। वहीं अनसिक्योर्ड ओवरड्राफ्ट उस स्थिति को कहते हैं, जब आपके पास गिरवी रखने के कुछ भी नहीं होता है। इस परिस्थिति में आप अपने क्रेडिट कार्ड से लोन ले सकते हैं। अर्थात ओवरड्राफ्ट इस प्रकार की लोन सुविधा है, जिसमें ग्राहक अपने बैंक खाते में मौजूद बैलेंस से अधिक पैसे निकाल सकता है। हालाँकि इस अतिरिक्त पैसे को चुकाने के लिये एक निश्चित अवधि दी जाती है, जिसके अंदर आपको यह अतिरिक्त राशि चुकाना आवश्यक होता है। बैंक इस पर ग्राहकों से ब्याज लेगा, जिसकी गणना दैनिक आधार पर की जाएगी। ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी कोई भी बैंक या NBFCs दे सकते हैं, जिसकी लिमिट बैंक या NBFCs द्वारा तय की जाती है।

कितना अतिरिक्त पैसा ले सकते हैं ?

यह बैंक तय करते हैं कि ओवरड्राफ्ट के तहत आप कितना पैसा ले सकते हैं। यह लिमिट इस बात पर निर्भर करती है कि, इस फैसिलिटी के लिये आपने बैंक में गिरवी (कोलैटरल) क्या रखा है। सैलरी और एफडी के मामले में बैंक अधिक लिमिट रखते हैं। उदाहरण के लिये यदि आपने बैंक में 2 लाख रुपये की एफडी की है, तो ओवरड्राफ्ट के लिए बैंक आपको एफडी की 80 प्रतिशत यानी लगभग 1.60 लाख रुपये तक की लिमिट तय कर सकते हैं। शेयर और ऋणपत्र (Debenture) के मामले में यह लिमिट 40 से 70 प्रतिशत तक होती है।

क्या होती है ब्याज की दर ?

ओवरड्राफ्ट सुविधा के तहत लिये जाने वाले पैसे पर ब्याज कितना देना होगा ? यह, इस बात पर निर्भर करता है कि ओवरड्राफ्ट की फैसिलिटी किस संपत्ति के बदले में आपको दी गई है। यदि आपने एफडी पर यह सुविधा ली है, तो आपकी ब्याज दर एफडी पर मिलने वाले ब्याज से 1 से 2 प्रतिशत अधिक होगी। यदि आपने शेयर सहित अन्य संपत्ति पर पैसे लिये हैं, तो ब्याज दर थोड़ी अधिक हो सकती है। आप बैंक से जितनी अवधि के लिये पैसा लेते हैं, उसी के अनुसार आपको ब्याज भी चुकाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर यदि आपने 25 दिसंबर को पैसा लिया है और उसे 25 जनवरी को चुकाते हैं, तो आपको लगभग एक महीने का ही ब्याज देना पड़ेगा।

क्या है ओवरड्राफ्ट का फायदा ?

क्रेडिट कार्ड या दूसरे पर्सनल लोन के मामले में ओवरड्राफ्ट बहुत सस्ता होता है। इसमें आपको अपेक्षाकृत कम ब्याज देना पड़ता है। ओवरड्राफ्ट का दूसरा लाभ यह है कि आप जितने समय के लिये पैसा लेते हैं, उतने ही समय के लिये आपको ब्याज देना पड़ता है। इसके विपरीत पर्सनल लोन तय अवधि के लिये मिलता है। इसे समय से पहले चुकाने पर आपको पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त पर्सनल लोन में आपको प्रोसेसिंग चार्ज जैसे दूसरे खर्च भी देने पड़ते हैं।

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