ऑटो चालक शरीफ खान, जिन्होंने शिक्षा की लगन पर उम्र को नहीं होने दिया हावी

* 43 वर्ष की आयु में पास की 12वीं की परीक्षा

* लॉ और पॉलिटिकल साइंस की डिग्री की भी चाह

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 2 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। कहते हैं सीखने या शिक्षा लेने की कोई उम्र नहीं होती। व्यक्ति आजीवन सीखता ही तो रहता है। हर घटना उसे कोई न कोई सीख देकर जाती है और उन्हीं सीखों से वह शिखर पर भी पहुँचता है। कुछ लोगों के लिए जीवन ही शिक्षा बन जाता है, तो कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो अपनी आयु के अनुसार वास्तविक शिक्षा नहीं ले पाते, परंतु जब अवसर मिलता है, तो ऐसे लोग आयु की सीमाओं को लांघ कर शिक्षा यज्ञ में कूद पड़ते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण प्रस्तुत किया है महाराष्ट्र के ऑटो रिक्शा चालक शरीफ खान ने। शरीफ खान वैसे तो प्रतापगढ़-उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं हैं, परंतु जीवन यापन करने के लिए वह काफी समय से महाराष्ट्र में मुंबई के मुलुंड में रहते हैं और एक ऑटो चलाते हैं। शरीफ खान ने महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन (Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary) अर्थात् MSBSHSE बोर्ड के तहत 2019 की HSSC (Higher Secondary School Certificate) अर्थात् 12वीं महाराष्ट्र बोर्ड परीक्षा दी। शरीफ खान भी आम विद्यार्थियों की तरह ही थे, परंतु आश्चर्य की बात यह थी कि जब वे यह परीक्षा दे रहे थे, तब उनकी आयु 43 वर्ष के थे। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह थी कि शरीफ ने 12वीं की परीक्षा 51 प्रतिशत अंको से पास की। आइए जानते हैं कौन हैं शरीफ खान, जो शिक्षा के प्रति उदासीन रहने वाले अनेक लोगों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

हालात ने छुड़वाया स्कूल, पर शिक्षा की चाह नहीं छूटी

1991 में जब शरीफ खान अपने गाँव के स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ते थे, तब घर की आर्थिक स्थिति तंग थी। इसीलिए उन्हें पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी और धनोपार्जन के लिए महाराष्ट्र का रुख करना पड़ा। वे 7 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे, इसलिए घर की सारी ज़िम्मेदारी उनके कंधों पर थी। मुंबई आकर उन्होंने ऑटो चलाना शुरू किया और यही उनका मुख्य व्यवसाय बन गया। इसी दौरान उनका विवाह भी हो गया। शरीफ खान के 5 बच्चे हैं। जीवन यूँ की चलता रहा और कदाचित आगे भी यूँ ही चलता रहता यदि 2017 में उनके मित्रों और परिजनों ने उनके भीतर रही शिक्षा की ज्योति को प्रज्ज्वलित न किया होता। शरीफ में पहले से ही आगे पढ़ने और कुछ कर दिखाने की चाह विद्यमान तो थी ही, परिवार का सहयोग व प्रेरणा मिलने से वह और प्रबल हो उठी। इसके बाद शरीफ ने पढ़ाई करना शुरू किया और उन्होंने 10वीं की परीक्षा दी, जिसे उन्होंने 51.20 प्रतिशत से पास किया और फिर 12वीं की परीक्षा की तैयारियों में जुट गये। 2019 महाराष्ट्र बोर्ड से शरीफ ने कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं की परीक्षा दी और सफल रहे। शरीफ खान आगे भी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। उनका सपना लॉ और पॉलिटिकल साइंस से स्नातक करने का है, जिसके लिए वे एक नाइट कॉलेज में दाखिला लेने की कोशिश कर रहे हैं।

अंग क्षति के पार सामाजिक समस्याओं के निवारण का लक्ष्य

वर्तमान में शरीफ खान अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र में मुलुंड के बाबू जगजीवनराम नगर में 10 बाई 10 के कमरे में रहते हैं। एक दुर्घटना में शरीफ का एक हाथ भी क्षतिग्रस्त हो गया है, परंतु इसके बावजूद शरीफ ऑटो चलाते हैं और अपने परिवार का पोषण करते हैं। शरीफ की सदैव से पढ़ने की इच्छा को देखते हुए उनके परिवार और उनके मित्रों ने उन्होंने पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार और मित्रों के सहयोग शरीफ ने पढ़ाई शुरू की और अपना सपना पूरा कर दिखाया। निर्धनता और दिव्यांगता भी शरीफ खान का मार्ग न रोक सकीं। ट्यूशन के पैसे न होने पर उन्होंने स्वंय हिन्दी माध्यम से पढ़ाई करना शुरू किया और हाई स्कूल की परीक्षा दी, जिसमें वह सफल रहे। इसके बाद शरीफ खान ने स्व-प्रयासों से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर 12वीं परीक्षा पास की। शरीफ का कहना है, ‘शुरुआत में मुझे अधिकतर विषयों को अंग्रेजी में समझने में बहुत कठिनाई हुई, परंतु मैंने धीरे-धीरे अपनी बेटियों की सहायता से सभी विषयों को समझा और पढ़ाई की। मेरी दो बेटियाँ कॉमर्स से स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए की पढ़ाई कर रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप मैंने भी कॉमर्स ही लिया। हालाँकि इसके बाद मैं लॉ और पॉलिटिकल साइंस ले कर पढ़ाई करना चाहता हूँ, क्योंकि मैं समाज में फैली समस्याओं को अच्छे से समझना चाहता हूँ।’ शरीफ खान अपने परिवार के अकेले कमाने वाले हैं, इसलिए वह पढ़ाई कर अपने परिवार को एक उज्जवल भविष्य देना चाहते हैं।

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