टैक्स चोरों के लिए आदर्श बनीं वडोदरा की भिक्षुक ज्योत्सना गांधी, चुकाया 13 हजार रुपए का सम्पत्ति कर

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 7 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। जहाँ भारत में टैक्स की चोरी करना लोगों की आदत बन चुकी है, वहीं भिक्षा मांग कर अपना जीवन यापन करने वाली एक दिव्यांग (Handicap) महिला ने 13,000 रुपए कर भुगतान (Tax Payment) कर देश के सहस्त्रों टैक्स चोरों के समक्ष स्वयं को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है। यह महिला है गुजरात के वडोदरा की रहने वालीं ज्योत्सना गांधी। ज्योत्सना गांधी दिव्‍यांग हैं और भिक्षा मांग कर जीवन यापन करती हैं, परंतु वे जिस घर में रहती हैं, उसका सम्पत्ति कर चुकाने में न तो उन्होंने अपनी भिक्षाधीनता, निर्धनता को आड़े आने दिया और न ही दिव्यांगता को। चूँकि ज्योत्सना गांधी की आय का स्रोत भिक्षा है। अत: उन्होंने वडोदरा महानगर पालिका (VMC) में सम्पत्ति कर (Property Tax) के रूप में जो 13,000 रुपए जमा कराए, वे भी भिक्षा से ही प्राप्त हुए थे। दैहिक विखंडन के बावज़ूद ज्योत्सना गांधी भले ही व्यवसाय से भिक्षुक हों, परंतु प्रामाणिकता में वे देश के धनवान कर चोरों से कहीं श्रेष्ठ हैं। उनके आचार-विचार ही इतने उत्तम हैं कि उन्हें टैक्स चोरी करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, जबकि एक समृद्ध व्यक्ति हर बार टैक्स की चोरी करता है।

वास्तव में हुआ यूँ कि पिछले दिनों वडोदरा महानगर पालिका (Vadodara Municipal Corporation) के ऑफिस में सम्पत्ति कर भुगतान करने वालों की पंक्ति में एक भिक्षुक महिला भी खड़ी हुई थी। सड़क पर भिक्षा मांगने वाली महिला को कर भुगतान करने वालों की कतार में खड़ी देख कर लोग अचंभित रह गए। यह महिला ज्योत्सना गांधी थीं, जिनके हाथों में एक बैग था। इस बैग में 10, 20 और 50 के नोट थे। जानकारी के अनुसार ज्योत्सना के घर का सम्पत्ति कर वर्ष 2003 से बकाया था, जो बढ़ कर 13 हज़ार रुपए पर पहुँच गया था। यह सम्पत्ति कर भुगतान करने के लिए ही ज्योत्सना वीएमसी ऑफिस पहुँचीं थीं। जब वीएमसी के सहायक आयुक्त (Assistant municipal commissioner) जिग्‍नेश गोहिल को पता चला कि ज्योत्सना एक भिक्षुक होने के बावज़ूद सम्पत्ति कर भुगतान के लिए आई हैं, तो वे ज्योत्सना से अत्यंत प्रभावित हुए। गोहिल ने ज्योत्सना की इमानदारी की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘हमने टैक्‍स की रिकवरी के लिए कई वर्षों से ज्योत्सना के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की है। यद्यपि कुछ दिन पूर्व दक्षिण ज़ोन में बिल जारी किए गए थे, जिसके तहत ज्योत्सना गांधी को भी बकाया सम्पत्ति कर बिल मिला, जिसके बाद वे बकाय टैक्स भरने आईं। वास्तव में ज्योत्सना गांधी वडोदरा ही नहीं, सभी देशवासियों के लिए एक मिसाल हैं। चूँकि ज्योत्सना एक दिव्यांग हैं, इसलिए उन्हें अपने टैक्स पर 25 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी। ज्योत्सना अपना बिजली का भुगतान भी नियमित रुप से करती हैं।’

ज्योत्सना के हौसले का आँकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिव्यांग होने के बावजूद वह अपने दिव्यांग बेटे का पालन-पोषण कर रही हैं। ज्योत्सना की निर्धनता, उनकी दिव्यांगता और उनके बेटे की विवशता को भी जोयत्सना ने अपने कर्तव्य धर्म से परास्त कर दिया है। ज्योत्सना अपने बेटे के साथ मंदिरों के बाहर बैठकर भीख मांगती हैं और अपना घर चलाती हैं।

You may have missed