‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें…’ : जानते भी हैं 28 वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर गूंज रही यह आवाज़ किसकी है ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 24 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। आज भी रेलवे स्टेशन पर पहुँचते ही एक मधुर ध्वनि कानों में गूंज उठती है, जिसे हर कोई बड़े ही ध्यान से सुनता है, क्यों क्योंकि वह ध्वनि होती है रेल के विषय में जानकारी दे रही रेलवे उद्घोषक की। परंतु क्या आप जानते हैं कि सदैव सी एक जैसी लगने वाली इस आवाज़ के पीछे वह महिला कौन है ? नहीं, तो आइए हम परिचित कराते हैं आपको 28 वर्षों से रेलवे उद्घोष की पहचान बनी हुई सरला चौधरी से। हालाँकि अब सरला रेलवे में कार्यरत नहीं, परंतु उनकी रिकॉर्ड की गई ध्वनि आज भी रेलवे स्टेशनों पर गूंजती है।

13 जुलाई, 1982 को सरला चौधरी ने रेलवे में एक रेलवे उद्घोषक (Announcer) की नौकरी के लिए आवेदन भरा था। इसके लिए उन्होंने एक ध्वनि परीक्षा (Voice Test) दिया और वह सफल रहीं। इसके बाद से ही सरला ने दैनिक वेतन पर कार्य करना आरंभ किया। रेलवे में अपने महत्वपूर्ण 4 वर्ष कार्य के रूप मे देने के बाद रेलवे प्रशासन ने उन्हें स्थाई उद्घोषक नियुक्त कर दिया और वह सेंट्रल रेलवे की एनाउंसर बन गईं। दरअसल उनके पिता एक रेलवे कर्मचारी थे और उन्हें एक सर्कुलर मिला, जिसमें लिखा था कि भारतीय रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को अनाउंसमेंट डिपार्टमेंट 3 महीने के ट्रायल पर भर्ती कर रहा है। इस सर्कुलर को पढ़ने के बाद सरला को भी लगा कि 3 महीने यहाँ बीता कर अच्छा कार्य अनुभव मिल जाएगा और उन्हें आवेदन भर दिया। समय के साथ सरला को इस काम में आनंद आने लगा और उन्होंने इसे अपना Profession बना लिया।

सरला ने जब इस कार्य क्षेत्र में कदम रखा, उस समय कंप्यूटर नहीं हुआ करते थे। ध्वनि रिकॉर्ड करने का सिस्टम भी काफी धीमी गति का होता था। एक स्टेशन की रिकॉर्डिंग करने के लिए 3-4 दिन लगते थे, क्योंकि घोषणाओं को अलग-अलग भाषाओं में रिकॉर्ड करना होता था। अतः सरला को अलग-अलग स्टेशनों पर जाकर ट्रेनों के बारे में एनाउंस करना पड़ता था। भारत में जैसे-जैसे तकनीकी ने प्रगति की रेलवे में भी कई बड़े बदलाव होने लगे। नई तकनीक के साथ रेलवे विभाग ने रेलवे स्टेशन के सारे एनाउंसमेंट संभालने की जिम्मेदारी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम को सौंप दी। अब रिकॉर्डिंग करना बहुत की सरल हो गया, जिससे सरला चौधरी का कार्य भी आसान हो गया। 1991 में उनकी आवाज़ ऑल इंडिया रेडियो में रिकॉर्ड की गई, उन्हें मराठी में रिकॉर्ड करना था और ये करने में उन्हें चार दिन लग गए, इसके बाद उनकी आवाज़ को कंप्यूटर से मिक्स करके केंद्रित (Centralised) कर दिया गया। अब उनकी आवाज़ रिकॉर्डिंग के माध्यम से बिना उनकी उपस्थिति के हर रेलवे स्टोशन पर गूंजने लगी और आज तक गूंज रही है।

सरला चौधरी लगभग 12 वर्ष पूर्व एनाउंसमेंट का काम छोड़ OHE विभाग में कार्यालय अधीक्षक पद पर तैनात हो गई थीं। ऐसे में सरला की आवाज़ को स्टैंड बाय मोड पर सेव कर लिया गया था। आज भी जब हम ट्रेन में यात्रा करने के लिए निकलते हैं, ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’ सुनते ही यात्री चौकन्ने होकर अपनी ट्रेन के समय आदि के बारे में सुनने लगते हैं। सरला चौधरी के ऊपर दिशा रिनदानी ने एक शॉर्ट फ़िल्म भी बनाई है, जिसमें उनके पति और बच्चों ने उनकी आवाज़ को सुनकर गौरवान्वित महसूस करने की बात कही है।

You may have missed