दिल्ली में ज़हरीली हवा के बीच ‘सहायता की सुवास’ फैला रहे रिटायर्ड बीएसएफ आईजी बी. एन. शर्मा

* ऑड-इवन फॉर्मूला के कारण संकटग्रस्त लोगों की सेवा में जुटे

* बी. एन. शर्मा का सेवा यज्ञ दिल्ली वासियों को दे रहा बड़ी सीख

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 14 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत की राजधानी दिल्ली पिछले कई दिनों से प्रदूषण के संकट से गुज़र रही है। केन्द्र सरकार, दिल्ली सरकार और यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट (SC) भी दिल्ली की ज़हरीली हवा को लेकर चिंतित हैं और हर स्तर पर इससे निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। इन्हीं उपायों के अंतर्गत दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गत 4 नवंबर से ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया है, जिसकी अवधि 15 नवंबर शुक्रवार को समाप्त हो रही है, परंतु दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति और बदतर होती देख इस ऑड-इवन फॉर्मूला की अवधि को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

क्या है ऑड-इवन और कब बन जाता है कष्टदायक ?

दिल्लीवासियों के लिए वैसे ऑड-इवन फॉर्मूला कोई नई बात नहीं है, क्योंकि केजरीवाल सरकार 3 वर्ष पहले भी ऑड-इवन फॉर्मूला लागू कर चुकी है। दिल्ली सरकार का मानना है कि ऑड-इवन फॉर्मूला लागू करने से सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी हो जाती है, जिससे प्रदूषण का स्तर घटाया जा सकता है। ऑड-इवन फॉर्मूला की शुरुआत 1 जनवरी, 2016 से यातायात नियंत्रण व वायु प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से हुई थी। गाणितीय भाषा में 1, 3, 5, 7 और 9 को ऑड नंबर कहते हैं। इसी प्रकार 0, 2, 4, 6 और 8 को इवन नंबर कहा जाता है। ऑड-इवन फॉर्मूला के अनुसार यदि आपकी गाड़ी की नंबर प्लेट का अंतिम नंबर ऑड (1, 3, 5, 7, 9) है, तो आप महीने की 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13 और 15 तारीख़ को ही अपनी गाड़ी लेकर सड़क पर जा सकेंगे, क्योंकि इन तारीखों में ऑड नंबर की गाड़ियाँ ही चलेंगी। इसी प्रकार यदि आपकी गाड़ी की नंबर प्लेट का अंतिम नंबर इवन (0, 2, 4, 6, 8) है, तो आप महीने की 4, 6, 8, 10, 12 और 14 तारीख़ को ही गाड़ी चला पाएँगे, क्योंकि इन तारीख़ों में इवन नंबर की गाड़ियाँ ही चलेंगी। इस फॉर्मूला के लागू होने से दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर में कितना सुधार हो, यह एक अलग प्रश्न है, परंतु यह फॉर्मूला कई लोगों के लिए किसी आपातकालीन (इमर्जेंसी) परिस्थिति में कष्टदायक बन जाता है। सामान्य जनजीवन में कोई समस्या नहीं है, परंतु किसी असाधारण, आपातकालीन, इमर्जेंसी की स्थिति में आपके पास गाड़ी लेकर निकलने के अलावा कोई विकल्प न हो, परंतु आपके पास ऑड नंबर की गाड़ी हो और उस दिन इवन नंबर की गाड़ी चलाने की ही अनुमति हो, तब यह फॉर्मूला संकट बन जाता है। स्वाभाविक है इंसान के जीवन में संकट पहले से कह कर नहीं आता। ऐसे में संकटग्रस्त व्यक्ति के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला कई बार आफत भी बन जाता है।

बीएसएफ के रिटायर्ड आईजी शर्मा की सराहनीय पहल

दिल्ली की जनसंख्या 4 करोड़ से अधिक है। आवश्यक नहीं है कि सभी के पास फोर व्हीलर हो, परंतु ऑड-इवन फॉर्मूला सभी चौपहिया गाड़ियों पर लागू होता है। इसके चलते सार्वजनिक परिवहन के दायरे में आने वाली गाड़ियाँ भी ऑड-इवन फॉर्मूला के हिसाब से ही सड़क पर निकलती हैं। स्वाभाविक है ऑड नंबर वाले दिन फोर व्हीलर गाड़ी के वे मालिक अपनी गाड़ी सड़क पर नहीं चला सकते, जिनके पास इवन नंबर की गाड़ी है। इसी तरह इवन नंबर वाले दिन ऑड नंबर गाड़ी के मालिकों को अपनी गाड़ी घर पर ही रखनी होती है। ऐसी विपरीत परिस्थिति में आम जनता से लेकर गाड़ी मालिकों व उनके परिजनों को परेशानी होती ही है, परंतु यह फॉर्मूला उस समय बड़ी मुश्किल पैदा कर देता है, जब घर में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो, कोई गर्भवती महिला हो और उसे अस्पताल ले जाना हो, कोई वृद्ध व्यक्ति हो, जो बिना गाड़ी के कहीं जा नहीं सकता, परंतु यदि उसकी गाड़ी फॉर्मूला में फिट नहीं बैठती, तो वह अपनी गाड़ी सड़क पर नहीं ले जा सकता। ऐसी विपरीत और संकट की स्थिति में फँसे लोगों को ऐसे लोगों की सहायता की आवश्यकता होती है, जिनके पास ऑड-इवन फॉर्मूला के अनुरूप गाड़ी हो, परंतु दिलवालों की दिल्ली में ऐसे स्वयं-सहायक कहाँ मिलते हैं। इन सबके बीच सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के रिटायर्ड महानिरीक्षक (IG) बी. एन. शर्मा ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने दिल्ली में 4 नंवबर को ऑड-इवन फॉर्मूला लागू होते ही 6 नवंबर को कई ट्वीट किए। उनके हर ट्वीट में देशभक्ति और जनसेवा का वैसा ही जज़्बा दिखाई दिया, जैसा कि सेना में रहते हुए एक जवान का होता है। रिटायर्ड होने के बावजूद वयोवृद्ध बी. एन. शर्मा ने अपने इन ट्वीट्स के माध्यम से ऑड-इवन के कारण मुश्किल में फँसे ऐसे लोगों की सहायता करने की पहल की, जो किसी आपात स्थिति में हों। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लोगों को सहायता देने की पेशकश करते हुए लिखा, ‘मेरे पास इवन नंबर की कार है। इवन नंबर वाले दिन किसी भी वृद्ध, बीमार, ज़रूरतमंद व्यक्ति को दिल्ली से नोएडा जाना हो, मैं उसकी सहायता करने का प्रयास करूँगा। मुझसे ट्विटर पर मदद मांगी जा सकती है।’

बीएसएफ जैसे गरिमामय सुरक्षा बल में एक ऊँचे पद पर सेवा दे चुके बी. एन. शर्मा ने सहायता की यह पहल कर न केवल स्वयं के ज़मीन से जुड़े होने की बात सिद्ध की, अपितु यह भी साबित किया कि भारतीय सुरक्षा बल में काम करने वाले या कर चुके किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के मन में राष्ट्रसेवा और जनसेवा सदैव सर्वोपरि रहती है। स्वाभाविक है बी. एन. शर्मा के इस ट्वीट से इवन नंबर की गाड़ी वाले दिन इमर्जेंसी स्थिति में फँसे ऐसे कई लोगों को दिल्ली से नोएडा मदद मिली होगी, जिनके पास ऑड नंबर की गाड़ी है।

आला अधिकारी की पहल में बड़ी सीख

सोशल मीडिया ट्विटर पर निरंतर सक्रिय रहने वाले बी. एन. शर्मा देश के सम-सामयिक मुद्दों पर न केवल अपनी राय रखते हैं, अपितु जिन मुद्दों पर उन्हें लगता है कि वे लोगों की सेवा के लिए कुछ कर सकते हैं, वे करते भी हैं। ऑड-इवन फॉर्मूला के कारण मुश्किल में पड़ने वाले लोगों की मदद की पहल करने वाले बी. एन. शर्मा ने समूचे दिल्ली वालों के लिए एक अनुपम दृष्टांत प्रस्तुत किया। उनकी सहायता की पहल में एक सबसे बड़ी सीख यह छिपी है कि जब एक आला स्तर का अधिकारी जनता की सेवा में अपनी गाड़ी समर्पित कर सकता है, तो दिलवालों की दिल्ली में हर दिल्ली वासी को अपना दिल बड़ा करते हुए शर्मा की तरह ही अपनी गाड़ी के माध्यम से ऑड-इवन फॉर्मूला के कारण संकट में आने वाले संकटग्रस्तों की मदद करनी चाहिए। बी. एन. शर्मा का यह ट्वीट यह दर्शाता है कि वे उम्र के इस पड़ाव में भी एक ‘जवान’ जैसे जोश के साथ लोगों की सहायता को तत्पर हैं। बी. एन. शर्मा ने इस एक ट्वीट के जरिए न केवल दिल्ली के उन हजारों लोगों की सहायता की पहल की है, अपितु देश के अन्य सेवानिवृत्त जवानों सहित उन सभी कार मालिकों और आम नागरिकों विशेषकर युवा पीढ़ी को यह सीख भी दी है कि जनता की सेवा ही सबसे बड़ी देश भक्ति है, राष्ट्र भक्ति है। यह राष्ट्र भक्ति केवल सीमा पर रह कर ही नहीं, अपितु देश के भीतर रह कर भी की जा सकती है। दिल्ली देश की राजधानी है। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री सहित बड़े-बड़े राजनेता और कई बड़ी-बड़ी हस्तियाँ, कई उच्चाधिकारी इस शहर में निवास करते हैं, परंतु बी. एन. शर्मा की पहल को यदि दिल्ली के अन्य लोग भी आगे बढ़ाएँ, तो ऑड-इवन के कारण संकट में फँसे अनेक लोगों की तकलीफ़ों को दूर किया जा सकता है। बी. एन. शर्मा से दिल्ली में रहने वाले सभी फोर व्हीलर मालिकों को यह सबक लेना चाहिए कि यदि उनके पास ऑड नंबर की गाड़ी है और पड़ोसी के पास इवन नंबर की गाड़ी है, तो ऑड-इवन फॉर्मूला के अनुरूप दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े सहायक बन सकते हैं। आज की आधुनिक युवा पीढ़ी के लिए भी बी. एन. शर्मा की यह सक्रियता नई सीख देती है कि ज़रूरतमंद लोगों की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

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