धनतेरस विशेष : कर लो यमराज की पूजा, कुबेर भी हो जाएँगे आनंदित

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 25 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। यह पूजा दिन में नहीं की जाती, अपितु रात होते समय यमराज के निमित्त एक दीपक जलाया जाता है। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। शास्त्रों में इस बारे में कहा गया है कि जिन परिवारों में धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद के देवता माने जाने वाले धन्वंतरि की भी धनतेरस के दिन पूजा का प्रावधान है साथ ही इस दिन गजानंद गणेश और माँ लक्ष्मी को घर लाया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कोई भी किसी को उधार पैसे या सामान नहीं देता है, इसलिए सभी वस्तुएँ नगद में खरीदकर लाई जाती हैं। इस दिन धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है। अगर संभव न हो तो कोई बर्तन खरीदें। इसका यह कारण माना जाता है कि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है, जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है, वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है।

क्यों मनाई जाती है धनतेरस ?

धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत होती है, जो भाई दूज तक रहती है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि उत्पन्न हुए थे। इनके उत्पन्न होने के समय इनके हाथ में एक अमृत कलश था जिस कारण धनतेरस पर बर्तन खरीदने का भी रिवाज है।इस दिन नया समान जैसे सोना, चांदी औप बर्तन की खरीदारी करने से पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। धनतेरस के मौके पर सोने के खरीदारी का विशेष प्रचलन है। इस बार धनतेरस का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जायेगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। धनतेरस पर कई लोग धनिया के बीज भी खरीदते हैं। पिर दिवाली वाले दिन इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में बोते हैं।

धनतेरस के दिन क्या करें ?

दीपदान के समय इस मंत्र का जाप करें। मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥ अर्थात त्रयोदशी को दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दण्ड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनन्दन यम प्रसन्न हों। धनतेरस के दिन देवताओं के वैद्य धनवन्तरि की पूजा होती है, उनको प्रिय धातु पीतल है। इस वजह से धनतेरस को पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।ज्योतिष के अनुसार, धनतेरस के दिन भूलकर भी लोहे की बनी कोई भी चीज ना खरीदें। इस दिन लोहा खरीदना बहुत अशुभ माना जाता है। इससे आपके जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

धनतेरस के दिन कैसे करें माँ लक्ष्‍मी की पूजा?

धनतेरस पर माँ लक्ष्मी की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लाल रंग का आसन बिछाएँ। और इसके बीचों बीच मुट्ठी भर अनाज रखें। अनाज के ऊपर एक कलश रखें। इस कलश में तीन चौथाई पानी भरें और थोड़ा गंगाजल मिला लें। अब कलश में सुपारी, फूल, सिक्‍का और अक्षत यानि साबुत चावल डालें। इसके बाद इसमें आम के पांच पत्ते लगाएँ। अब पत्तों के ऊपर धान से भरा हुआ किसी धातु का बर्तन रखें। धान पर हल्‍दी से कमल का फूल बनाएँ और उसके ऊपर माँ लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखें। साथ ही कुछ सिक्‍के भी रखें। कलश के सामने दाहिने ओर दक्षिण पूर्व दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। अब एक गहरे बर्तन में माँ लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखकर उन्‍हें पंचामृत से स्‍नान कराएँ। अब प्रतिमा को पोछकर वापस कलश के ऊपर रखे बर्तन में रख दें। अब माँ लक्ष्‍मी की प्रतिमा को चंदन, केसर, इत्र, हल्‍दी, कुमकुम, अबीर, गुलाल, माला, मिठाई, नारियल, फल, खीले-बताशे अर्पित करें। इसके बाद प्रतिमा के ऊपर धनिया और जीरे के बीज छिड़कें। अब आप घर में जिस स्‍थान पर पैसे और जेवर रखते हैं, वहाँ पूजा करें। इसके बाद माता लक्ष्‍मी की आरती उतारें।

धनतेरस पूजा मुहूर्त
दिन शुक्रवार, 25 अक्टूबर, 2019
पूजा मुहूर्त – सुबह 07:08 से शाम 08:16
अवधि – 01 घण्टा 08 मिनट

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