सुप्रीम कोर्ट ने सार्थक किया अपना ध्येयवाक्य, ‘जहाँ धर्म है, वहीं जय है…’

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 9 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। राम जन्म भूमि विवाद पर 40 दिनों तक चली सुनाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जब 16 अक्टूबर तक अपना निर्णय सुरक्षित रखने की घोषणा की, उसके बाद से ही भारत की हर दिशा में एक ही बात गूँज रही थी कि क्या होगा परिणाम बनेगा राम मंदिर या गूँजेगी अज़ान ? इस मुद्दे पर भारतीयों की ही नहीं, अपितु विदेशों की भी आँखें सुप्रीम कोर्ट पर आ टिकी थीं, परंतु जब परिणाम सामने आया, तो सबने न्यायालय के इस निर्णय को एक न्यासंगत और विश्वसनीय माना। उच्चतम् न्यायलय ने अपने निर्णय से एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर दिखाया है, जो युगों-युगों तक भारतीय इतिहास में स्वर्ण स्मृति के रूप में अंकित रहेगा। सदैव से सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण मामलों में ऐतिहासिक फैसले दिए थे और एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णायक निर्णय लेते हुए आज यह सिद्ध कर दिखाया है कि जहाँ सत्य होता है, जीत वहीं होती है। वर्षों से विवादास्पद राम जन्म भूमि विवाद पर किसी भी धर्म पर आधारित नहीं, अपितु साक्ष्य, विधि और संविधान के आधार पर अपना ऐतिहासिक निर्णय दिया है। ऐसा करके उच्चतम् न्यायालय ने अपने ध्येयवाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को सार्थक सिद्ध कर दिखाया, जिसमें धर्म का अर्थ कोई विधि-विधान से जुड़े धर्मों से नहीं है, अपितु न्याय धर्म से है।

कहाँ से लिया गया सुप्रीम कोर्ट का ध्येयवाक्य ?

उच्चतम न्यायलय यानी सुप्रीम कोर्ट ने अपने न्याय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ या ‘यतो धर्मः ततो जयः’ के कथन को सार्थक सिद्ध करते हुए राम जन्म भूमि विवाद पर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। 491 वर्षों के बाद अंततः अयोध्या में विवादास्पद स्थान पर भगवान श्री राम के जन्म को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि न्यास को राम मंदिर बनाने का अधिकार दिया है। यह निर्णय दर्शाता है कि हिन्दू-मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद के इस सबसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने ध्येयवाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए न्याय को ही सर्वोपरि माना। कानून के आगे कोई जाति, धर्म नहीं अपितु सत्य ही सर्वोच्च है। आज यह बात पुन: एक बार सिद्ध हुई है। सत्य की सदैव ही जीत होती है। संस्कृत के इस श्लोक का अर्थ है, ‘जहाँ धर्म है, वहाँ जय है।’ सुप्रीम कोर्ट के इस ध्येयवाक्य को महाभारत के श्लोक ‘यतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जयः’ से लिया गया है। यह श्लोक अर्जुन ने अपने जेष्ठ भ्राता युधिष्ठिर को उस समय कहा था, जब वे इस चिंता में पड़ गए थे कि कौरवों की इतनी विशाल सेना से पाण्डव कैसे युद्ध में विजयी होंगे ?, तब कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन ने युधिष्ठिर की चिंता को दूर करते हुए उन्हें प्रेरित करने के लिए इस श्लोक का उच्चार किया था, जिसका अर्थ है, ‘विजय सदा धर्म के पक्ष में रहती है और जहाँ श्री कृष्ण हैं, वहीं धर्म है।’ राम जन्म भूमि के पक्ष में आया उच्च न्यायलय का यह ऐतिहासिक निर्णय इसी बात की ओर इंगित करता है कि आयोध्या की राम जन्म भूमि में भगवान राम (कृष्ण का एक रूप) का निवास था।

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