भारत को क्यों घेर रहे ‘तूफान’ ? ‘महा’ टला नहीं, अब ‘बुलबुल’ भी डरा रहा

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 6 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में चक्रवात प्रायः बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होते हैं और पूर्व से पश्चिम की ओर गतिशील हो जाते हैं तथा पश्चिम की ओर गतिशील होने पर पूर्वी घाट से टकराते हैं, परिणाम स्वरुप पूर्वी तटीय मैदान पर वर्षा होती है। दूसरी ओर जब महाद्वीप के पूर्वी तट पर गर्म जल धाराएँ प्रवाहित होती हैं, तो उसके कारण वाष्पीकरण होता है तथा चक्रवात पैदा होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। चीन में इसे टाइफून चक्रवात, अमेरिका में हरिकेन चक्रवात, ऑस्ट्रेलियमें बीलीबीली चक्रवात और भारत में साइक्लोन चक्रवात नाम दिया गया है। भारत में 120 वर्षों के उपलब्ध रिकार्ड्स के अनुसार कुल चक्रवातों के मात्र 14 पतिशत ही अरब सागर में पैदा हुए हैं, बाकी बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों आए हैं। बंगाल की खाड़ी के मुकाबले अरब सागर के चक्रवात कमजोर होते हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले 8 देश मिलकर इस क्षेत्र में आने चक्रवातों के नाम रखते हैं। ‘वायु’ चक्रवात का नाम भारत में रखा गया है। भारत के पश्चिमी तट पर पूर्वी तट की तुलना में काफी कम चक्रवात होते हैं। यहाँ तक कि बंगाल की खाड़ी की ओर अरब सागर की तुलना में चार गुना ज्यादा चक्रवात होते हैं। वहीं, अरब सागर पर बनने वाले सिर्फ 25 प्रतिशत चक्रवात ही तट की ओर जाते हैं, जबकि बंगाल की खाड़ी पर बनने वाले 58 प्रतिशत तूफान तट को जाते हैं। अब सवाल ये उठता है कि चक्रवात होता क्या है ?

‘जादूगर की आँख’ जैसा होता है चक्रवात

चक्रवात (Cyclone) घूमती हुई वायुराशि का नाम है, जो उष्ण कटिबंध में तीव्र और अन्य स्थानों पर साधारण होते हैं। इनसे प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है। मौसम विज्ञान (Meteorology) में एक चक्रवात बड़े पैमाने पर वायु द्रव्यमान (Air Mass) होता है, जो कम वायुमंडलीय दबाव के एक मजबूत केंद्र के चारों ओर घूमता है। चक्रवात की विशेषता आवक सर्पीली हवाओं से होती है जो कम दबाव के क्षेत्र में घूमती हैं। सबसे बड़े निम्न-दाब प्रणालियाँ ध्रुवीय भंवर और सबसे बड़े पैमाने के बाह्य-चक्रवात (Synoptic Scale) हैं। उष्ण-कटिबंधीय चक्रवात और उपोष्ण कटिबंधीय चक्रवात जैसे गर्म-कोर चक्रवात भी सिनोप्टिक पैमाने पर रहते हैं। जब तक चक्रवात की आँख को संघनन की गुप्त ऊष्मा की मात्रा मिलती रहती है, तब तक चक्रवात प्रभावी रहता है जैसे ही चक्रवात की आँख को संघनन की गुप्त ऊष्मा मिलना बंद हो जाती है चक्रवात की समाप्त हो जाती है। इसे जादूगर की आँख के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह ग्रेट डार्क स्पॉट के व्यास से एक तिहाई होती है और जादूगर की एक आँख की तरह लगती है। भारत में इन दिनों चक्रवात की कई घटनाएँ हो रही हैं। बंगाल की खाड़ी में तैयार हो रहा चक्रवाती तूफान बुलबुल इस 2019 का सातवाँ चक्रवात है, वहीं अरब सागर में पहले ही चक्रवात ‘महा’ तट पर उतरने की तैयारी में है। इससे पहले पबुक, फोनी, वायु, हीका और क्यार चक्रवात इस वर्षआ चुके हैं। वैसे तो पृथ्वी पर चक्रवात आना कोई नई बात नहीं है, परंतु इसकी बढ़ती संख्या को देखते हुए पृथ्वी पर एक नए संकट का आना अवश्य माना जा सकता है।

केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर पर बुलबुल का खतरा

मौसम विभाग की हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश और ओडिशा बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में उठे चक्रवात बुलबुल (Cyclone Bulbul) से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं। मौसम की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसी स्काईमेट (Skymet ) ने कहा कि यह इस वर्षका 7वां चक्रवाती तूफान है जो भारत के तट से टकराएगा। आंध्र (Andhra Pradesh) और ओडिशा (Odisha) के दो जिलों केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर पर बुलबुल का खतरा मंडरा है। वहीं अरब सागर में चक्रवाती तूफान ‘महा’ (Cyclone Maha) का खतरा पहले से ही मौजूद है। जानकारों की माने तो अगर ये दोनों तूफान ज्यादा खतरनाक रूप लेते हैं तो महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र और ओडिशा पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में भारी वर्षा के साथ तेज हवाएं चलेंगी।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भुवनेश्वर के निदेशक एचआर विश्वास ने कहा कि चक्रवात के 8 से 9 नवंबर के बीच ओडिशा तट से टकराने की संभावना है। फनी के बाद इस साल, ओडिशा को हिट करने वाला बुलबुल दूसरा चक्रवात होगा। यह निम्न-दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और बंगाल की पूर्व-मध्य खाड़ी पर एक बड़े तूफान के रूप में बदल जाएगा। अगले 24 घंटों में यह चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा। जिसे चलते पश्चिम बंगाल, ओडिशा, अंडमान-निकोबार और उत्तर-पूर्व के राज्यों में भारी वर्षाहो सकती है।

ग्लोबल वॉर्मिंग और समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान बन रहे कारण

यूनाइटेड नेशन्स इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि “ग्लोबल वॉर्मिंग और समुद्र की सतह के बढ़ते तापमान के कारण अरब सागर में और भी ज्यादा चक्रवात आ सकते हैं”। मौसम विभाग ने ‘महा’ साइक्लोन के बारे में जानकारी दी है कि वह पूर्व-उत्तरपूर्व की ओर कमजोर होते हुए बढ़ रहा है। अनुमान लगाया गया है कि यह 70-80 किमी प्रतिघंटा की स्पीड पर चक्रवाती तूफान के रूप में दीयू के पास गुजरात तट से गुजरेगा। 7 नवंबर, 2019 तक इसकी अधिकतम स्पीड 90 किमी प्रतिघंटा तक जा सकती है। इससे पहले यह पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। वहीं ‘बुलबुल’ नामक चक्रवात के कारण प। बंगाल, ओडिशा और अंडमान के कई क्षेत्रों में भरी वर्षा के आसार हैं। अगले 36 घंटों में हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षाहो सकती है, वहीं ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में 9 नवंबर तक वर्षा के साथ तेज हवाएँ चलने के आसार हैं। ऐसे में मछुआरों को चेतावनी दी गई है कि 7 नवंबर के बाद बंगाल की खाड़ी में न जाएँ। वहीं ‘महा’ के कारण गुजरात-महाराष्ट्र-राजस्थान के कई क्षेत्रों में वर्षा का अनुमान है। गुजरात के सौराष्ट्र, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, सूरत, भरूच, आणंद, अहमदाबाद में 6 नवंबर को हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा हो सकती है, जबकि महाराष्ट्र राजस्थान में भी वर्षा की आशंका जताई जा रही है।

किस दिन और कितनी होगी तूफान ‘महा’ की गति ?

6 नवंबरः 100 से 110 किमी/घंटा
7 नवंबरः 70 से 90 किमी/घंटा
8 नवंबरः 40 से 60 किमी/घंटा

किस दिन और कितनी होगी तूफान ‘बुलबुल’ की गति ?

6 नवंबरः 45 से 55 किमी/घंटा
7 नवंबरः 70 से 100 किमी/घंटा
8 नवंबरः 110 से 130 किमी/घंटा
9 नवंबरः 125 से 140 किमी/घंटा
10 नवंबरः 130 से 140 किमी/घंटा

चक्रवात गुजरात के इन क्षेत्रों को करेगा प्रभावित

IMD के मुताबिक ‘वायु’ तूफान के चलते अहमदाबाद, गांधीनगर और राजकोट समेत तटवर्ती इलाके वेरावल, भुज और सूरत में हल्की वर्षाहोने की संभावना है। फिलहाल चक्रवता ‘वेरावल’ से 280किमी दक्षिण में है। इसके अलावा सौराष्ट्र के भावनगर, अमरेली, सोमनाथ, वेरावल, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ के क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ वर्षाहो सकती है। वायु के खतरे को देखते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की है। इसके अलावा पूरे प्रशासन को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने खुद सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी ली थी। गुजरात के अलावा दमन-दीव और महाराष्ट्र के भी कुछ हिस्सों के ‘वायु’ चक्रवात से प्रभावित होने की संभावना है। स्थानीय लोगों को समुद्र की ओर न जाने की सलाह दी गई है, वहीं तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों को समुद्र में न जाने को कहा गया है। इसके अलावा गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय क्षेत्रों से 1।60 लाख लोगों को एहतियातन हटा लिया गया है। साथ ही इन क्षेत्रों में NDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं। कई जिलों में स्कूलों को भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा द्वारका, सोमनाथ, सासन और कच्छ आये पर्यटकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। इन क्षेत्रों में फ्लाइट्स का आवागमन भी बंद कर दिया गया है।

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