जानिए इन कर्णधारों को, जिनका निष्कर्ष भारत का नया इतिहास लिखेगा….

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 9 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत के इतिहास में आज का दिन बहुत ही अस्मरणीय है अर्थात 491 वर्ष से चल रहे राम जन्म भूमि विवाद पर देश की सबसे बड़ी अदालत निर्णय सुना रही है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने रिकॉर्ड 40 दिनों तक इस मामले की सुनवाई की थी। निर्णय जो भी आए भारत का नागरिक होने के नाते हमें उसे तहे दिल से स्वीकार करना चाहिए। भारत के न्यायालय और उसकी गरिमा बनाए रखते हुए बिन किसली को अहात पहुँचाए अपने भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी निभानी चाहिए और साथ ही निर्णय देने वाले उन सभी न्यायधीशों के निर्णय का सम्ममान करना चाहिए, जो आज एक सहासिक कदम उठाते हुए इस विवाद पर अपना निर्णय सुना रहे हैं। आइए जानते हैं इस एतिहासिक निर्णय लेने वाले उन सभी न्यायधीशों के विषय में जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर अनततः एक निर्णायक फैसला सुनाने वाली है।

राम जन्म भूमि विवाद की शीघ्र सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीजेआई रंजन गोगोई देश के 46वें और मौजूदा चीफ जस्टिस हैं। रंजन 23 अप्रैल, 2012 से 17 नवंबर, 2019 चीफ जस्टिस हैं, इससे पहले वे गुवाहाटी हाई कोर्ट में जज रहे चुके हैं, साथ ही उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में भी चीफ जस्टिस पर कार्य किया है। केस के दूसरे न्यायधीश एस. ए. बोबडे ने 12 अप्रैल, 2013 से 23 अप्रैल, 2021 तक के न्यायधीश पद पर कार्यरत हैं। जस्टिस बोबडे सीजेआई गोगोई के रिटायरमेंट के बाद उनकी स्थान पर कार्यभार संभालेंगे। सुप्रीम कोर्ट से पूर्व वे बॉम्बे हाई कोर्ट और एमपी हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं। इससे पहले वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे।

केस की सुनवाई कर रहे तीसरे न्यायधीश अशोक भूषण उत्तर प्रदेश में जौनपुर के रहने वाले हैं, उन्हें 13 मई, 2016 से 4 जुलाई, 2021 तक सुप्रीम कोर्ट में कार्यभार संभालने के लिए नियुक्त किया गया है। अशोक भूषण इससे पूर्व केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। केस के चौथे न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ को 13 मई, 2016 से 10 नवंबर, 2024 तक के लिए सुप्रीम कोर्ट का न्यायधीश नियुक्त किया गया है। चंद्रटूड़ इससे पूर्व बॉम्बे हाई कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी जज रह चुके हैं। केस के पाँचवें न्यायधीश एस. अब्दुल नज़ीर को 27 फरवरी, 2017 से 4 जनवरी, 2023 तक सुप्रीम कोर्ट का जज बनना गया है। नज़ीर सुप्रीम कोर्ट के ऐसे पहले जज हैं, जो किसी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे बिना सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त किए गए। यद्यपि नज़ीर कर्नाटक हाई कोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं।कार्यरत थे।

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