पेड़ के मामले में ‘पहाड़’ है चीन, 103वीं रैंकिंग के साथ भारत की स्थिति ‘राई’ जैसी !

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 12 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पेड़-पौधों को देवता का स्थान दिया गया है, पीपल, बरगद, तुलसी की पूजा की जाती है, परंतु इसी देश में पेड़ों की जो संख्या है, वह चीन से भी कम है। ग्लोबल वार्मिंग और सृष्टि विनाश की बातें, तो हम खूब सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं। एक दूसरे को वाट्सअप पर पेड़ लगावो और पेड़ से जुड़े महत्व और सुझाव फॉर्वड करते हैं, परंतु अपने आस-पास घर, बगीचे या ऑफिस में एक भी पेड़ लगाते हैं? और यदि कहीं कोई हमारा जानने वाला पेड़ लगाता मिल जाए, तो उसका उपहास करने से कदा भी नहीं चूकते। लज्जा आनी चाहिए हमें अपने आप पर, यदि हम भी इसी दौड़ में शामिल हैं तो, बात केलव इतनी सी है कि जहाँ एक ओर विदेशी प्रति व्यक्ति 500 से ज्यादा पेड़ लगा कर ग्लोबल वॉर्मिंग में कटौती कर रहे हैं, तो क्या हम 136 करोड़ होकर भी, प्रति व्यक्ति 1000 पेड़ भी नहीं लगा सकते। सोचिए ! अगर 136 करोड़ लोगों में हर व्यक्ति 1000 पेड़ लगाए, तो भारत में कुल 13,60,000,0000 ( 13 अरब 60 करोड़ ) पेड़ हो जाएँ, परंतु इसके विपरीत आए दिन दुनिया भर में पेड़ो की कटाई ऐसे की जा रही है, मानो हमें इनकी आवश्यकता ही न हो, किसी सामान की तरह बस हम इन्हें काट कर उपयोग किए जा रहे हैं, इस ओर ध्यान ही नहीं देते कि जब पेड़ ही नहीं बचेंगे, तो हम काटेंगे किसे और जितने भी सामानों का निर्माण पेड़ से या इनकी लकड़ियों से हो रहा है, वह भविष्य में कैसे संभव हो पाएगा?

पेड़ की कटाई पर्यावरण को भी प्रभावित कर रही है। पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड को कम करने में पेड़ो की सबसे बड़ी भूमिका है, जो पेड़ कम होने से लगातार बढ़ती जा रही है और ग्वोबल वार्मिंग की आग को हवा मिल रही है। पेड़ों की अंधाधुन कटाई से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, अपितु हमारे स्वास्थ पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। भारतीय चिकित्सा परिषद (IMA) ने वायु गुणवत्ता को खराब और बेहद खतरनाक बताते हुए कहा है कि हमारी आयु भी प्रति वर्ष में 6 वर्ष कम होती जा रही है, वहीं ब्रिटेन की चिकित्सीय पत्रिका ‘द लांसेट’ के अनुसार हर साल वायु प्रदूषण के कारण 10 लाख से ज्यादा भारतीय मारे जाते हैं। अगर इस समया का समाधान हमने मिलकर नहीं किया तो आने वाले समय में कोई पेड़ काटने के लिए बचेंगे ही नहीं और न ही हम उस पेड़ का उपयोग करने के लिए।

ताज़ा आंकड़ों की बात करें तो भारत में ही नहीं दुनिया में पेड़ों की संख्या न के समान है। लगातार घटती पेड़ों की संख्या एक बड़ा सवाल बन कर सामने आ रही है। ब्रिटिश की एक प्रमुख वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर जर्नल’ के अनुसार, दुनियाभर में प्रति व्यक्ति 422 पेड़ों की आवश्यकता है और हम दुनिया भर में हर वर्ष करीब 15 अरब पेड़ काट रहे हैं यानी प्रति व्यक्ति के अनुसार दो पेड़ से भी ज्यादा पेड़ हर दिन काटे जा रहे हैं, वहीं पेड़ों की संख्या के मामले में रूस सबसे आगे हैं। रूस में करीब 641 अरब पेड़ हैं, वहीं 318 अरब पेड़ों की संख्या के साथ कनाडा दूसरे स्थान पर, 301 अरब पेड़ों की संख्या के साथ ब्राजील तीसरे स्थान पर और 228 अरब पेड़ों की संख्या के साथ अमेरिका चौथे स्थान पर है, वहीं भारत सिर्फ 35 अरब पेड़ों की संख्या के साथ 103वें स्थान पर है। इसके साथ ही एक और रिपोर्ट सामने आई है, जो ‘ग्लोबल रैंकिंग’ ने जारी की है, इसके अनुसार प्रति व्यक्ति पेड़ के मामले में दुनिया के 151 देशों में भारत 125वें स्थान पर है, जबकि चीन 17,753 करोड़ पेड़ के साथ 5वें पायदान पर है। अन्य देशों की बात करें ते, श्रीलंका 244 करोड़ पेड़ के साथ 82वें, पाकिस्तान 99 करोड़ पेड़ के साथ 105वें और बांग्लादेश 96 करोड़ पेड़ों के साथ 107वें स्थान पर है।

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