‘हाथ’ रखने के हजारों रुपए लेने वाले डॉक्टर्स को ‘अन्नप्पा’ से सीखना चाहिए अपना ‘धर्म’…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 22 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। वर्तमान में बढ़ती मँहगाई ने ग़रीब आदमी की कमर तोड़ रखी है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएँ लेना भी कभी-कभी बड़ा कठिन हो जाता है, वहीं यदि ऐसे में घर में कोई बीमार पड़ जाए तो उसके उपचार में अस्पताल और डॉक्टर की फीस देना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में यदि सस्ता उपचार मिलने के साथ डॉक्टर की फीस भी न देनी पड़े तो एक गरीब के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। आज हम आपको एक ऐसे ही मसीहा से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने उपचार का ख़र्च न उठा पाने वाले ग़रीबों और कमजोर वर्ग के लोगों को 10 रुपए के मामूली खर्च पर उपचार कराने का बीड़ा उठाया है।

संघर्षों में की एमबीबीएस की पढ़ाई

कर्नाटक के डॉ. अन्‍नप्‍पा एन. बाली एक निर्धन परिवार से थे। बचपन से उन्हें पढ़ाई का शौक था, परंतु घर की माली हालत ठीक नहीं थी, उनकी मेहनत और पढ़ाई के प्रति लगन देख कर एक मुफ्त के बोर्डिंग में उनका दाखिला हो गया। इसके बाद कुछ लोगों की मदद से उन्होंने अपनी एमबीबीएस (Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery) की पढ़ाई की और 1978 में मैसूर ENT (Ear-Nose-Throat) में डिप्लोमा भी किया।

10 रुपए में करते हैं लोगों का उपचार

1967 में बाली एक सरकारी अस्पताल में हेल्थ अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए। 31 वर्ष सरकारी अस्पताल में काम करने का बाद बाली 1998 में रिटायर हुए, तो उपचार के जरिए ग़रीब लोगों की सहायता करने की ठानी, जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने गाँव में एक निजी क्लिनिक खोल कर की। वर्तमान में डॉ. बाली कर्नाटक में बेलागवी जिले के बेलहोंगल गाँव में रहते हैं। 79 वर्षीय डॉ. बाली ने केवल 10 रुपए में लोगों का उपचार करने की एक अद्भुत पहल की। डॉ. बाली इसी 10 रुपए में लोगों को परामर्श और दवाई दोनों उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं, जो मरीज़ 10 रुपए भी नहीं दे सकते डॉ. बाली उनका मुफ्त में उपचार करते हैं। स्‍थानीय लोग उन्‍हें ’10 रुपये वाला डॉक्‍टर’ भी बुलाते हैं। डॉक्‍टर साहब इस उम्र में भी हर दिन 75 से 100 रोगियों का उपचार करते हैं। इनमें से भी 50 प्रतिशत लोगों का वे मुफ्त में उपचार करते हैं।

मैं अपना कर्ज़ उतार रहा हूँ

डॉ. बाली ग़रीबों के मुफ्त के उपचार को अपना कर्तव्य मानते हैं। उनका कहना है कि “मुझे पता है ग़रीबी कितनी कड़वी होती है, मैंने इसे चखा है। मेरे पास अब पैसे का पीछा करने का कोई कारण नहीं है। मैं सिर्फ मन की शाँति चाहता हूँ, जो मुझे ग़रीब मरीज़ों का इलाज करने से मिलती है”। उनका ये भी कहना है कि मैं ग़रीबों को वो वापस दे रहा हूँ, जो भगवान ने मुझे मेरे जरूरतमंद दिनों में दिया था। ग़रीबों के लिए मैं अपनी सेवाएं तब तक जारी रखूँगा जब तक मैं कर सकता हूँ”। उनके एक मरीज़ का कहना है कि “डॉ बाली जादू करते हैं, जिसके कारण रोगी तेज़ी से ठीक हो जाते हैं। वह हमसे धीरे से बात करते हैं और उनका इलाज जादू की औषधि की तरह है।”

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