DIWALI GIFT : अब भारतीयों को ब्राज़ील जाने के लिए नहीं लेना पड़ेगा वीज़ा

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 25 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत और ब्राज़ील के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिश्तों को दृढ़ करने और आपसी संबंधों को सुगम बनाने के उद्देश्य से ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) ने भारत के कारोबारियों को ब्राज़ील आने के लिए वीज़ा में छूट देने की घोषणा की है। बोल्सोनारो का कहना है कि अब भारतीय व्यपारियों और पर्यटकों को ब्राज़ील आने के लिए वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पहले उन्होंने विकासित देशों अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया के पर्यटकों और कारोबारियों को वीजा में छूट दी थी। ब्राज़ील अब इस नीति में विस्तार कर रही है। पर्यटन ब्राज़ील में तेजी से बढ़ता क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ब्राज़ील दुनिया में सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है।दक्षिण अमेरिका के प्रांतों में सबसे बड़ा देश भी है। देश के मुख्य क्षेत्रों में उत्तर (पारे,अमज़ोनस, अमापा, एकड़), पूर्वोत्तर (सेर्गिपे, रियो ग्रांड डो नॉर्ट, पिऔइ, परेबा, मरान्हाओ, सारा, बाहिया, अलागोअस), केन्द्रिय पश्चिम (माटो ग्रोसो, और दिस्त्रितो फ़ेडरल), दक्षिण पूर्व (साओ पाउलो, रियो डी जनेरियो, एस्पिरिटो सैंटो) और दक्षिण (सांता कैटरीना, रियो ग्रांडे डो सुल, पराना) शामिल हैं।

व्यापारिक दृष्टि से भी ब्राज़ील भारत के महत्वपू्ण संबंध हैं। यूँ तो भारत-ब्राज़ील के संबंध 5 शताब्दी पुराने हैं, परंतु भारत और ब्राज़ील के बीच राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित किए गए थे। 3 मई, 1948 को रियो डी जनेरियो में भारतीय दूतावास खोला गया, जो 1 अगस्त, 1971 को ब्रासीलिया में चला गया, हालाँकि भारत और ब्राज़ील के संबंधों में 1961 में कुछ खटास उस समय पड़ गई थी, जब पुर्तगाल पर भारत के दबाव के बावजूद ब्राज़ील ने गोवा के लिए पुर्तगाल के दावे का समर्थन किया था। नेहरू की सेनाओं ने पुर्तगाली प्रतिरोध पर काबू पाया और गोवा पर कब्जा कर लिया, तो ब्राज़ील सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने के लिए भारत की तीखी आलोचना की। बाद में ब्राज़ील ने भारत को यह समझाने की कोशिश की कि उसके इस निर्णय को ब्राज़ील और पुर्तगाल के बीच लम्बे समय से चली आ रही दोस्ती के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। भारत सरकार इस बात से निराश थी कि ब्राज़ील ने एक लोकतांत्रिक और हाल ही में स्वतंत्र हुए भारत के विरुद्ध एक गैर-लोकतांत्रिक देश का समर्थन किया थै। पुर्तगाली साम्राज्य के दौरान ब्राज़ील से भारत में मिर्च का व्यापार किया गया था और साथ ही गायों को अन्य ट्रेडों के बीच भेजा गया था। ब्राज़ील और भारत के बीच इस रिश्ते के तार गुजरात से जुड़े हुए हैं और इसकी बुनियाद 50 के दशक के उत्तरार्ध में पड़ी थी, जब गुजरात के भावनगर के महाराज ने ब्राज़ील के एक किसान को एक साँड़ उपहार में दिया था। पिछले 20 सालों में ब्राज़ील में दूध का उत्पादन चौगुना हो गया है और इसमें से 80 फ़ीसदी दूध गिरोलैंडो गायों से आता है, जो गिर की गायों की पैदाइश हैं।”

इससे ब्राज़ील में गायों की नस्ल को बेहतर बनाने में काफ़ी मदद मिली। आज ब्राज़ील में गुजरात की गिर नस्ल की गायों को एक ख़ास दर्ज़ा हासिल है। हाल ही में ब्राज़ील और भारत ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और विकास, पर्यावरण, संयुक्त राष्ट्र के सुधार और UNSC विस्तार जैसे मुद्दों पर बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग किया है। 2007 में दो तरफा व्यापार लगभग तिगुना होकर 2004 में US $ 1.2 बिलियन से $ 3,12 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। 2008 में भारत के पुना मसेथित सुजलॉन ऊर्जा कंपनी ने ब्राज़ील के बाजार में प्रवेश किया था और वहाँ 750 मेगावॉट की क्षमता स्थापित की थी। सुजलॉन पवन ऊर्जा क्षेत्र की भारत की प्रमुख कंपनियों में से एक है। जहाँ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2001 में 84 करोड 20 लाख डालर का था, वहीं 2016 में ये दोनों राष्ट्रों के बीच व्यापार 5.64 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा।

वैश्विक सॉफ्टवेयर दिग्गज विप्रो टेक्नोलॉजीस ने भी लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े शराब की भठ्ठी AmBev को साझा सेवाएँ प्रदान करने के लिए कूर्टिबा में एक व्यापार प्रक्रिया आउटसोर्सिंग केंद्र की स्थापना की। अम्बेव के ज़ोनल उपाध्यक्ष रेनैटो नहास बतिस्ता ने कहा, “हम ब्राज़ील और लैटिन अमेरिका में विप्रो की विस्तार योजनाओं का हिस्सा बनने के लिए सम्मानित हैं।” अम्बेव के पोर्टफोलियो में प्रमुख ब्रांड जैसे ब्रह्म, बेक, स्टेला और अंटार्कटिका शामिल हैं।

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