Don’t Shake hand : कीजिए नमस्ते और सुरक्षित रहिए संक्रमित रोगों से…

* दिल्ली के AIIMS ने आरंभ किया ‘नमस्ते अभियान’

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 21 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। नम: + ते = नमस्ते (Namaste) संस्कृत से उत्पन्न एक शब्द है, जिसका अर्थ है तुम्हारे लिए प्रणाम। सिर झुका कर, हाथों को हृदय के पास लाकर और आँख बंद करके प्रणाम करने का तात्पर्य है कि आप अपने ही हृदय में बैठे परमात्मा को अपने आप को अर्थात् स्वयं को सौंप रहे हैं, वहीं हिन्दू धर्म में इसका अर्थ है. ‘मैं आप में (विराजित) परमात्मा को नमन करता हूँ।’ हृदय की गहरी भावना से मन को समर्पित करके किया गया नमस्कार दो आत्माओं के मध्य एक आत्मीय संबंध बनाता है। उदाहरण के लिए जब एक शिक्षक और एक विद्यार्थी एक दूसरे को प्रणाम करते हैं, तब वह दोनों ऊर्जात्मक रूप से समय और स्थान रहित एक जुड़ाव बिन्दु पर एक दूसरे के निकट आ जाते हैं और उनमें अहम् की भावना समाप्त हो जाती है। नमस्ते, नमस्कार और नमस्कारम् एक प्रचलित हिन्दी भाषा, सनातन धर्म जीवन शैली या भारतीय संस्कृति का अभिवादन है। समकालीन युग से यह भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण पूर्व एशिया और विश्व भर में हिन्दू प्रवासी भारतीयों के भाव का प्रतीक रहा है। नमस्ते को अंजलि मुद्रा (Anjali Mudra) भी कहते हैं। यह खड़े आसन में किया जाने वाला प्राणायाम का एक रूप है। भारत में प्रचलित नमस्ते की इसी परंपरा को दिल्ली के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) यानी AIIMS में भी कुछ दिनों से देखा जा रहा है। वास्तव में एम्स ने एक अनूठी पहल करते हुए नमस्ते कैंपेन (Namaste Campaign) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य लोगों को संक्रमण (Infection) के प्रति जागरूक (Aware) करना है, क्योंकि किसी भी संक्रमण के फैलने का एक मुख्य कारण एक-दूसरे से हाथ मिलाना भी है। आइए जानते हैं एम्स ने क्यों और कैसे किया नमस्ते अभियान का शुभारंभ ?

एम्स के डॉक्टर और नर्स कुछ दिनों से लोगों का स्वागत हाथ मिला कर नहीं, अपितु नमस्ते करके कर रहे थे। पहले तो लगा कि एम्स में भारत की पुरानी परम्परा को बढ़ावा देने के लिए ‘नमस्ते’ किया जा रहा होगा, परंतु जब इस बात की गहराई का पता चला, तो इस सांस्कृतिक पुरातन नमस्ते परम्परा का वैज्ञानिक कारण भी सामने आया। दरअसल 18 से 24 नवंबर 2019 तक एम्स में वर्ल्ड ऐंटीबायॉटिक अवेयरनेस वीक (World Antibiotic Awareness Week 2019) मनाया जा रहा है। इसी के तहत यह कैंपेन चलाया गया है। एम्स के अनुसार अगर लोग हाथ नहीं मिलाएँगे, तो एक से दूसरे में इन्फेक्शन होने का ख़तरा कम होगा। साथ ही ऐंटीबायॉटिक्स के प्रयोग में भी गिरावट आएगी। इन्फेक्शन कम होगा, तो उपचार भी सरल व सस्ता होगा। एम्स के कार्डियोथोरासिक विभाग के एचओडी डॉ. शिव चौधरी का कहना है, ‘हाथ इन्फेक्शन को फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं। हाथ से हम हर वस्तु को छूते हैं, जिससे हाथ संक्रमित होता है और फिर वही संक्रमण दूसरों तक पहुँचाता है। यही कारण है कि हम हाथ मिलाने की आदत को नमस्ते करने की आदत में बदलने का प्रयास कर रहे हैं।”

सर्दियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। ये बात तो आप भी जानते होंगे कि सर्दी के मौसम में वायरल सबसे अधिक फैलता है। सर्दियों में वायरल इन्फेक्शन होने पर अधिकतर लोग इससे ग्रसित होते हैं। ऐसे में वह लोग अपना तो ध्‍यान रखते नहीं, साथ ही दूसरों के बारे में भी नहीं सोचते, जिसके चलते दूसरे लोग भी वायरल इन्फेक्शन की चपेट में आ जाते हैं। यहाँ तक कि खाँसी आने पर भी लोग अपना मुँह कवर नहीं करते। पाश्चात्य सभ्यता के वशीभूत होकर हम अक्सर लोगों से ऑफिस, घर या किसी भी स्थान पर मिलने पर हाथ मिलाते हैं। ऐसा करने से हम अपने हाथों के माध्यम से हम अपना इन्फेक्शन दूसरों तक पहुँचा देते हैं। इसलिए ऑफिस हो या बाहर लोगों से हाथ मिलाने से बचें, क्योंकि हो सकता है आप ने अपने हाथ को हाइजीन किया हो, परंतु आपसे हाथ मिलाने वाला आपके लिए अपने हाथों में भर-भर के इन्फेक्शन लाया हो। अत: अगली बार किसी से हाथ मिला कर नहीं, अपितु नमस्ते करके उसका स्वागत करें। संक्रमित रोग आसानी से फैलता है। ऐसा अधिकांशत: दूसरों से हाथ मिलाने से होता है। इसलिए इनसे बचने के लिए हमेशा हाथों को स्वच्छ रखें। हो सके, तो लिक्विड सोप से हाथों को बार-बार धोएँ और दूसरों के हाथों के संपर्क में आने से बचें। यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं हो, तो अच्छे Hand Sanitizer का प्रयोग करें या Alcohol Based Hand Rubs भी प्रयोग कर सकते हैं।

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