छोटे शहरों में भी बढ़ा ONLINE SHOPPING का क्रैज़ : अमेज़न-फ्लिपकार्ट ने 15 दिनों में बेचा 31 हज़ार करोड़ का माल

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। व्यापार जगत (Business World) में ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping) ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जहाँ पहले लोग ऑनलाइन सामान ख़रीदने में झिझकते थे और अपने बैंक से जुड़ी जानकारी साझा करने से भी कतराते थे, वहीं आज लोग धड़ल्ले से निश्चिंत होकर करोड़ों के सामान ऑनलाइन से ख़रीद रहे हैं। त्योहारों में तो इसका अलग ही एक रूप देखने को मिलता है। बड़े शहरों के साथ-साथ अब छोटे शहरों और गाँवों में भी जहाँ ऑनलाइन वेबसाइटों की पहुँच है। लोग ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं। इससे न केवल उनका समय बचता है, अपितु वो बिना बाज़ार के थपेड़े खाये घर बैठे सामान प्राप्त कर लेते हैं। यद्यपि इससे ऑफ-लाइन व्यापारियों में यह भ्राँति भी पैदा हो रही है कि ऑनलाइन बाज़ार उनका कारोबार बिगाड़ रहा है, परंतु ये सभी ऑनलाइन शॉपिंग साइट कहीं न कहीं और किसी न किसी स्थानीय व्यापारियों से जुड़े होती हैं और यही स्थानीय व्यापारी लोगों तक अपनी दुकान का ही सामान पहुँचाते हैं। अर्थात कहीं न कहीं ऑनलाइन शॉपिंग बिज़नेस स्थानीय कारोबारियों के लिए लाभदायक ही सिद्ध हो रहा है। शोप्क्लुस (Shopclues), जोवी (Jovi), अमेज़न (Amazon), जबांग (Jabong), फ्लिपकार्ट (Flipkart), ई-बेय (eBay), अलीबाबा (Alibaba) जैसी ऑनलाइन शॉपिंग (ONLINE SHOPPING) वेबसाइटों से लोग तेज़ी से जुड़ रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है ऑनलाइन शॉपिंग ?

ऑनलाइन शॉपिंग इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स बिज़नेस (E-BUSINESS) का ही एक रूप है, जो उपभोक्ताओं को वेब ब्राउज़र का उपयोग करके INTERNET पर विक्रेता से सामान या सेवाएँ सीधे ख़रीदने की अनुमति प्रदान करता है। उपभोक्ता सीधे रिटेलर (Retail) की वेबसाइट पर जाकर या खरीदारी SEARCH ENGINE का उपयोग करके वैकल्पिक विक्रेताओं से उत्पाद ख़रीद सकते हैं, जो विभिन्न ई-रिटेलरों पर उसी उत्पाद की उपलब्धता और मूल्य निर्धारण को प्रदर्शित करता है। 2016 से ग्राहक विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करके ऑनलाइन ख़रीदारी कर रहे हैं, जिसमें डेस्कटॉप कम्प्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट कंप्यूटर और स्मार्टफोन शामिल हैं। ऑनलाइन बिक्री से राजस्व में लगातार वृद्धि को देखते हुए शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन शॉपर्स को चार श्रेणियों में बाँटा है, ‘1. सुविधा दुकानदारों, 2. विभिन्न साधकों, 3. संतुलित खरीदारों और 4. स्टोर-ओरिएंटेड शॉपर्स’। आँकड़ों के अनुसार 2012 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र ने अपनी अंतरराष्ट्रीय बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करके उन्हें राजस्व में 433 बिलियन डॉलर (31,05,15,12,500 रुपये) से अधिक का कारोबार दिया था।

ऑनलाइन ख़रीदारी की लोकप्रियता पारंपरिक खुदरा विक्रेताओं की बिक्री को कम नहीं, अपितु उनके व्यापार को बढ़ाती है। उदाहरण के लिए अगस्त 2014 में यू.एस. (US) में इलेक्ट्रॉनिक्स के सबसे बड़े रिटेलर बेस्ट बाय (Best Buy) ने उपभोक्ताओं के ऑनलाइन ख़रीदारी करने के बावजूद अपनी बिक्री में लगातार 10वीं तिमाही में मुनाफ़ा दर्ज कराया, वहीं अमेरिका में Amazon.com की सबसे बड़ी बाज़ार हिस्सेदारी है। मई 2018 तक एक सर्वेक्षण में पाया गया कि दो-तिहाई अमेरिकियों ने अमेज़न से से 92 प्रतिशत खरीदारी की थी। 2012 में चीन में 242 मिलियन लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग की गई।

ऑनलाइन स्टोर आमतौर पर 24 घंटे उपलब्ध होते हैं और पश्चिमी देशों में कई उपभोक्ताओं के पास काम और घर दोनों पर इंटरनेट का उपयोग कर आसानी से सामान ख़रीद सकते हैं। ताइवान में तो ऑनलाइन रिटेलर्स सहित कई खुदरा विक्रेताओं के लिए एक स्टोर पिकअप सेवा को लाया गया, अब ग्राहक ऑनलाइन सामान खरीद सकते हैं और उन्हें पास के एक सुविधा स्टोर पर ले जा सकते हैं। इससे ग्राहकों के लिए ऑनलाइन खरीदारी अधिक फायदेमंद हो गई है। उपभोक्ताओं किसी वस्तु को वापस करने में आसानी होती है। उपभोक्ताओं को रिटेलर से संपर्क करने, डाकघर पर जाने और वापसी शिपिंग का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि घर पर ही एक्जिक्यूटिव सामान लेने आ जाता है। कुछ ऑनलाइन कंपनियों की भौतिक दुकानों के पारंपरिक लाभ की भरपाई के लिए अधिक उदार रिटर्न नीतियाँ भी हैं। उदाहरण के लिए, ऑनलाइन जूता रिटेलर Zappos.com में मुफ्त रिटर्न शिपिंग के लिए लेबल शामिल है और रिटर्न के लिए एक शुल्क भी नहीं देना पड़ता।

जब बात ऑनलाइन शॉपिंग की हो, तो amazon.in का नाम प्रत्येक भारतीय की मुख पर आ ही जाता है। अमेज़न अपनी उत्पादन विविधता के कारण देश की सभी ऑनलाइन साइट्स में सब से आगे है। आज अमेज़न करीब 10 करोड़ विभिन्न उत्पादन का अकेला ऑनलाइन दुकान बन चुका है। अमेज़न आज देश की सभी शॉपिंग साइट्स को कड़ी टक्कर दे रहा है। देश के दो सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलरों में अमेज़न और फ्लिपकार्ट का नाम सबसे पहले आता है। अक्टूबर महीने में 15 दिनों के त्योहार के दिनों यानी दीवाली में इन दोनों साइटों ने मिलकर 31 हज़ार करोड़ की सेल की है। रेड सीर (Redseer) कन्सल्टिंग कंपनी के अनुसार फ्लिपकार्ट की एवरेज ऑर्डर वैल्यू 1,976 रुपये और अमेज़न की 1,461 रुपये रही।

1 फरवरी, 2019 को लागू नई ई-कॉमर्स पॉलिसी के बाद यह पहला त्योहारी मौसम था, जब ऑनलाइन शॉपिंग में गिरावट नहीं, अपितु बढ़त दर्ज की गई है। दोनों ही कंपनियों का कहना है कि नई पॉलिसी से सेल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। यद्यपि रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट मार्केट में वृद्धि काफी धीमी दिखी। इसके अतिरिक्त छोटे शहरों में लोग अधिक ऑनलाइन शॉपिंग की ओर आकर्षित दिखे। दरअसल नए नियम के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाली उन ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी, जिन कंपनियों में एफडीआई की हिस्सेदारी थी। साथ ही एक्सक्लूसिव डील, कैशबैक और बंपर डिस्काउंट जैसी चीजें खत्म कर दीं गईं थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि घरेलू व्यापारियों को इससे काफी लाभ मिला और सेल में भी कोई गिरावट नहीं हुई।

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