जानिए केन्द्र शासित प्रदेश बनते ही क्या-क्या बदल गया जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ?

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 31 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत-पाकिस्तान बँटवारे के बाद से जो आग दोनों देशों के बीच जल रही थी, उसे कुछ हद तक समाप्त कर वर्तामान मोदी सरकार ने एक नया इतिहास रचा है। 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच खींची गई लक़ीर ने न सिर्फ सरहदें बाँटी, अपितु भारत की स्वतंत्रता के लिए साथ मर मिटने वाले लोगों के दिलों में भी दरार पैदा कर दी। इस दरार को मिटाना तो दूर, इसे और गहरा तब कर दिया गया, जब कश्मीर को लेकर दोनों देश ने स्वयं को उसका शासक बताना शुरू कर दिया। इस आग में दोनों ही देश के निवासी जलते आ रहे थे। किसी ने ये सोचा भी न था कि 72 वर्ष बाद भारत की बागडोर एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में जाएगी, जो इस दरार को जड़ से से मिटा देगा। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने जब गत 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 को हटाने की घोषणा की, तो मानो भारत पुनः स्वतंत्रता पर्व जैसे आनंद में डूब गया। मोदी सरकार के इस फ़ैसले को मंजूरी देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर कर दिए, इसी के साथ केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित राज्या घोषित करने वाला राजपत्र (गजट) जारी कर दिया गया है, जिसके अनुसार आज सरदार पटेल जयंती यानी 31 अक्टूबर, 2019 से केन्द्र शासित जम्मू-कश्मीर और केन्द्र शासित लद्दाख नामक प्रदेश अस्तित्व में आ गए। जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश तो बन ही गया है, साथ ही साथ इसका पुनर्गठन भी किया जा रहा है। वास्तव में अनुच्छेद-370 व 35ए समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर सही मायनों में भारत का एक अभिन्न अंग बन गया है। देश के अन्य राज्यों के लोगों को सरकार के इस फैसले से अधिक प्रसंशा हुई है। पूर्ण राज्य रहे जम्मू-कश्मीर को 31 अक्टूबर से दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया है। आइए जानते हैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नए केन्द्र शासित प्रदेशों के रूप में आगे क्या और कैसे चलेगा शासन-प्रशासन ?

  1. कश्मीर का अब अपना अलग झंडा नहीं होगा। 15 अगस्त या इसी प्रकार के प्रशासनिक अवसर पर तिरंगा ही लहराएगा जाएगा। साथ ही जम्मू-कश्मीर में तिरंगे का अपमान, उसे जलाना या नुकसान पहुँचाना संगीन अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
  2. अनुच्छेद-370 हटने के साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान भी समाप्त कर दिया गया है। अब वहाँ भारत का संविधान लागू किया जाएगा।
  3. जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों की दोहरी नागरिकता समाप्त कर दी जाएगी।
  4. जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी ज़मीन लेकर अपना घर बना सकेंगे और वहाँ सुकून से रह सकेंगे। 35-ए के हटने के बाद केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में जमीन से जुड़े कम से कम 7 कानूनों में बदलाव होगा
  5. अनुच्छेद-370 का खंड-1 अभी लागू रहेगा। शेष खंड समाप्त कर दिए गए हैं। खंड-1 भी राष्ट्रपति ने लागू किया था, जिसे राष्ट्रपति कभी भी हटा सकते हैं। अनुच्छेद 370 के खंड-1 के अनुसार जम्मू-कश्मीर की सरकार से सलाह कर राष्ट्रपति, संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में अब राज्यपाल शासन की जगह राष्ट्रपति शासन लागू होगा।
  6. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन किया जाएगा, परंतु लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।
  7. जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित राज्य सरकार बनेगी, परंतु लद्दाख की कोई स्थानीय सरकार नहीं होगी।
  8. जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को अन्य राज्यों के पुरुषों से विवाह करने की स्वतंत्रता तो दी ही जाएगी, साथ ही उनकी नागरिकता भी समाप्त नहीं की जाएगी।
  9. 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था, परंतु अब गिरीश चंद्र मुर्मू (Girish Chandra Murmu) यानी जी. सी. मुर्मू जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल (Lieutenant Governor) यानी LG के रूप में शासन-प्रशासन चलाएँगे।
  10. जम्मू-कश्मीर सरकार व विधानसभा का कार्यकाल अब छह साल का नहीं, बल्कि पांच वर्ष का ही होगा।
  11. जम्मू-कश्मीर में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, अपितु भारत का कोई भी नागरिक नौकरी कर सकेगा।
  12. अन्य राज्यों से जम्मू-कश्मीर जाकर रहने वाले लोगों को भी वहाँ मतदान करने का अधिकार मिल सकेगा। साथ ही अन्य राज्यों के लोग भी अब वहाँ से चुनाव लड़ सकेंगे।
  13. जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के लोग भी अब शिक्षा के अधिकार, सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा सकेंगे।
  14. केंद्र सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसे संस्थान अब जम्मू-कश्मीर में भी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए ऑडिट कर सकेंगे। इससे वहाँ भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
  15. अब जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में भी सुप्रीम कोर्ट का हर फ़ैसला लागू होगा। पहले जनहित में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले वहाँ लागू नहीं होते थे।
  16. महिलाओं पर पर्सनल लॉ बेअसर हो जाएगा। इस संशोधन से सबसे बड़ी राहत जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को ही मिली है। संशोधन को जम्मू-कश्मीर की महिलाओ की आज़ादी के तौर भी देखा जा सकता है।
  17. पहले यहाँ कानून व्यवस्था मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी थी, परंतु अब जम्मू-कश्मीर व लद्दाख की कानून-व्यवस्था केंद्र सरकार के हाथ में होगी। गृहमंत्री, उप राज्यपाल के जरिये यहाँ की कानून व्यवस्था संभालेंगे।
  18. प्रशासनिक कार्य के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार को अब केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर वहाँ तैनात उप राज्यपाल से मंजूरी लेनी होगी।
  19. लद्दाख की बागडोर संभालने के लिए राधा कृष्ण माथुर (R. K. Mathur) को उप राज्यपाल (Lieutenant Governor) यानी LG बनाया गया है।
  20. केंद्र शासित राज्य बन जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों राज्यों में कम से कम 106 केंद्रीय कानून लागू हो पाएँगे।
  21. केंद्र सरकार की योजनाओं में केंद्रीय मानवाधिकार आयोग का कानून, एनमी प्रॉपर्टी एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से रोकने वाला कानून शामिल है।
  22. विधानसभा में अनुसूचित जाति के साथ साथ अब अनुसूचित जनजाति के लिए भी सीटें आरक्षित होंगी।
  23. पहले कैबिनेट में 24 मंत्री बनाए जा सकते थे, अब दूसरे राज्यों की तरह कुल सदस्य संख्या के 10% से ज़्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं।
  24. जम्मू कश्मीर विधानसभा में पहले विधान परिषद भी होती थी, वो अब नहीं होगी. हालांकि राज्य से आने वाली लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  25. केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर से 5 और केंद्र शासित लद्दाख से एक ही लोकसभा सांसद चुना जाएगा, वहीं पहले की तरह जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा के लिए 4 सांसद चुने जाएँगे।
  26. चुनाव आयोग दोनों राज्यों में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है, जिसमें जनसंख्या के साथ भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक बिंदुओं पर ध्यान रखा जा सकता है।
  27. जम्मू कश्मीर में पहले 87 सीटों पर चुनाव होते थे, जिनमें 4 लद्दाख की, 46 कश्मीर की और 37 जम्मू की सीटें होती थीं, परंतु अब लद्दाख की 4 सीटें हटाकर केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में 83 सीटें कर दी गई हैं, जिनमें परिसीमन किया जाएगा है।
  28. प्रस्तावित परिसीमन के अनुसार केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में 7 सीटें बढ़ सकती हैं। 7 सीटें बढ़ने पर केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में 90 सीटें हो जाएँगी।
  29. जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल (Governor) सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) का तबादला कर उन्हें गोवा का राज्यपाल बनाया गया है।
  30. 2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर (लद्दाख को मिलाकर) की जनसंख्या 12,541,302 (1 करोड़ 25 लाख 41 हजार 302) है, परंतु लद्दाख के अलग होने के बाद अब जम्मू-कश्मीर की जनसंख्या 12,267,013 (1 करोड़ 22 लाख 67 हजार 13) हो जाएगी
  31. 30.जम्मू-कश्मीर का क्षेत्रफल (लद्दाख को मिलाकर) 222,236 वर्ग किलोमीटर है, परंतु लद्दाख को हटा कर अब जम्मू-कश्मीर का क्षेत्रफल 163,040 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा।
  32. मोदी सरकार के इस कदम के बाद अब जम्मू कश्मीर में 20 जिले अनंतनाग, बांदीपोरा, बारामूला, बड़गाम, डोडा, गांदरबल, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, कुलगाम, पुंछ, कुपवाड़ा, पुलवामा, रामबन, रसाई, राजौरी, सांबा, शोपियां, श्रीनगर और उधमपुर और लद्दाख में 2 जिले लेह और करगिल रहेंगे।

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