VIDEO-PHOTO : सलाम इस ‘करुणामूर्ति’ फोटो पत्रकार को, जिसने बग़दादी पर बरसे बमों से ‘अनाथ’ हुए कुत्ते के बच्चे को बचाया

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। कीचड़ में ही कमल खिलता है। कमल का जीवन प्रेरणा देता है कि कीचड़ में खिलने के बावजूद वह कीचड़ से लिप्त नहीं होता। ऐसी ही एक घटना हिंसा और आतंकवाद की आग में झुलस रहे सीरिया में सामने आई, जहाँ दुनिया के सबसे दुर्दांत और निर्दयी आतंकवादी का अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते खात्मा किया है। यहाँ भी निर्दयता की भूमि पर जब करुणा का फव्वारा फूटा तो एक जीवन के लिये संघर्ष करने वाली एक जिंदगी को नवजीवन मिल गया।

जब निर्दयता की भूमि पर फूटा करुणा का फव्वारा…

घटना दुनिया के सबसे खूँखार आतंकवादी इस्लामिक स्टेट के सरगना अबु बकर अल बगदादी से जुड़ी है, जिसका जीवन और अस्तित्व अब समाप्त हो चुका है। अमेरिकी सेना से घिर जाने के बाद 48 साल के बगदादी ने पिछले शनिवार को आत्मघाती बम से खुद को उड़ा दिया, जिसकी पुष्टि रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। इसके बाद गुरुवार को आईएस की ओर से जारी हुए एक ऑडियो क्लिप में भी बगदादी की मौत की पुष्टि की गई और साथ ही आईएस के नये सरगना के नाम की घोषणा भी की गई। इस ऑडियो क्लिप के अनुसार इस्लामिक स्टेट ने बगदादी की मौत के बाद अबु इब्राहिम अल हाशमी अल कुरैशी को नया सरगना बनाया है।

सुरंग वाली जगह को अमेरिकी सेना ने किया तबाह

उत्तरी सीरिया में इदलिब प्रांत के बारिशा गाँव में एक पार्किंग जैसे परिसर के नीचे सुरंग में छिपे बैठे बगदादी को अमेरिकी सेना के विशेष अभियान बल के जवानों ने गत शनिवार को घेर लिया था। चारों ओर से घिर जाने के बाद सैनिकों के हाथ लगने के बजाय बगदादी ने आत्मघाती बम से खुद को अपने तीन पुत्रों और पत्नी के साथ उड़ा लिया था। बगदादी कट्टरपंथी लोगों के लिये हीरो न बन जाए और इस जगह पर उसकी कोई मज़ार या कोई स्मारक न बन जाए, इसलिये अमेरिकी सेना ने इस पूरे परिसर को विस्फोटक से उड़ा कर तबाह कर दिया है। अब इस जगह पर चारों ओर मलबा बिखरा पड़ा है।

फोटो जर्नलिस्ट के हृदय में जागी करुणा…

डैलीमेल में छपी एक खबर के अनुसार परिसर को विस्फोटक से उड़ाए जाने के बाद जब स्थानीय मीडिया के लोग वहाँ पहुँचे और तस्वीरें ले रहे थे, तब फारेद अल्होर नामक एक फोटो जर्नलिस्ट की नज़र मलबे में दबे एक मादा कुत्ते पर पड़ी, जो परिसर को उड़ाये जाने के दौरान मलबे के नीचे आने से मारा गया था। उसके शव के पास ही उसका मासूम बच्चा बैठा हुआ था। वह काफी डरा हुआ और सहमा हुआ था। वह भी मलबे से घिरा था और पूरी तरह से धूल और मिट्टी से सना हुआ था। यह देख कर फारेद के अंदर उस बच्चे के लिये करुणा जागी और उन्होंने उस बच्चे को मलबे से बाहर निकाल लिया। इसके बाद फारेद ने उस बच्चे को एक डिब्बे में रखा और उसे लाकर एक क्लिनिक में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उस बच्चे का इलाज किया और उसके घावों पर मल्हम लगाई। इसके बाद उन्होंने बच्चे को खिलाया-पिलाया और अन्य कुत्तों के साथ छोड़ दिया। इस प्रकार यह घटना दया और करुणा की एक अनूठी मिसाल बन गई।

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