देश सेवा के लिये पद या प्रतिष्ठा की दरकार नहीं : इस बुजुर्ग से सीखिये जन सेवा का पाठ

अहमदाबाद, 25 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। लोग कहते हैं कि मुझे यह पद मिले तो मैं यह काम कर सकता हूँ और वो पद मिले तो वो काम कर सकता हूँ, जबकि सच तो यह है कि कोई भी काम करने के लिये किसी खास पद या प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती है। महात्मा गांधी ने देश की आज़ादी के लिये जो कुछ किया वह किसी पद पर आसीन होने के बाद नहीं किया। इसी प्रकार आजकल मुंबई में एक बुजुर्ग लोगों के लिये प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। आम तौर पर वृद्धावस्था में लोग कामकाज से रिटायर होकर आराम करते हैं, परंतु इन बुजुर्ग के जज्बे को सलाम करने को जी चाहता है, जो ट्रैफिक से भरी सड़कों पर जन सेवा करने के लिये निकल पड़ते हैं।

रिटायरमेंट के बाद ढूँढा जन सेवा का काम


हम बात कर रहे हैं मुंबई में कांदिवली के ठाकुर कॉम्प्लेक्ष निवासी एक 69 साल के बुजुर्ग की। कांदिवली (ईस्ट) में आकुर्ली रोड पर जब एक बुजुर्ग ट्रैफिक व्यवस्था को सँभालते हुए दिखाई दिये तो एक पत्रकार ने उनसे बात करने का प्रयास किया, परंतु बुजुर्ग ने यह कहकर उसे टाल दिया कि अभी बहुत ट्रैफिक है और उनके पास बात करने का समय नहीं है। जब पत्रकार इन बुजुर्ग के पीछे पड़ा तो उन्होंने अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि वह एक रिटायर व्यक्ति हैं और उन्हें घर बैठकर आराम करना पसंद नहीं है। इसलिये वह काम की तलाश कर रहे थे, उन्हें ऐसे काम की तलाश थी जिसके माध्यम से वह देश सेवा कर सकें। इसी दौरान उन्हें सड़कों पर ट्रैफिक का दृश्य दिखा जिसमें हॉर्न बजाते हुए और शोर मचाते हुए वाहन इधर से उधर दौड़ रहे थे और सड़क पर ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो रही थी। तब से उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया कि देश सेवा करने का यही सबसे बेहतर तरीका है और वह ट्रैफिक व्यवस्था सँभालने में जुट गये। वह अपने घर के आसपास की ऐसी सड़कें जहाँ अक्सर ट्रैफिक जाम होती है, वहाँ पहुँच जाते हैं और ट्रैफिक व्यवस्था सँभालते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह बुजुर्ग हर रोज 2 से 3 घण्टे का समय ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में देते हैं और यह काम वो अभी से नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें यह काम करते हुए 12 साल का लंबा समय बीत चुका है।

बुजुर्गों और सामान्य लोगों के लिये प्रेरणास्रोत हैं यह बुजुर्ग


सचमुच, यह बुजुर्ग आम लोगों के लिये एक प्रेरणा हैं। यह बुजुर्ग उन सेवा निवृत्त वृद्धों के लिये भी प्रेरणास्रोत हैं जो जन सेवा और देश सेवा करने का जज्बा रखते हैं। सेवा निवृत्ति के बाद का समय बिताने के लिये जन हित के कार्य करना भी देश सेवा ही है। यह बुजुर्ग बिना किसी स्वार्थ के यह जन हित का कार्य कर रहे हैं। हमारे देश में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनके पास करने के लिये कोई काम नहीं हैं, यदि वह भी इन बुजुर्ग से प्रेरणा लेकर जनहित के कार्यों में जुड़ना चाहें तो यह काम भी देश सेवा का ही एक हिस्सा है।

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