VIDEO : करोगे पार्ट टाइम पॉलिटिक्स का पाखंड, तो ‘अधमरे किसान’ में भी आ जाएगी जान..!

* कोई छुट्टी मनाए या न मनाए, गांधी परिवार छुट्टी ज़रूर मनाता है

* राहुल संसद से लुप्त, प्रियंका भी सपरिवार शिमला घूम आईं

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय राजनीति में पाँच दशकों तक दबदबा रखने वाले नेहरू-गांधी परिवार ने राजे-रजवाड़ों का कालखंड समाप्त होने के बाद भी देश पर एक राज परिवार की तरह शासन किया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक सभी साल में एक बार छुट्टियाँ मनाने अवश्य जाते हैं। नेहरू से लेकर राजीव और सोनिया गांधी से मिली विरासत के चलते ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी साल में अलग-अलग समय पर छुट्टियाँ मनाने चले जाते हैं और राजनीति से दूर हो जाते हैं। राहुल गांधी का नाम तो मंगलवार को संसद में गूंजा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को यह बताना पड़ा कि राहुल गांधी छुट्टी पर हैं।

छुट्टियाँ लेना प्रत्येक नागरिक का मौलिक और व्यक्तिगत अधिकार है। इसमें कोई आपत्ति भी नहीं हो सकती, परंतु बदलते राजनीतिक परिवेश और पार्टी जब अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुज़र रही हो, तब भी उस पार्टी के दिग्गज नेताओं को छुट्टी मनाने की सूझे, तो इसे व्यक्तिगत या मौलिक अधिकार से न जोड़ कर कर्तव्य परायणता की कसौटी पर परखने की आवश्यकता पैदा होती है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस हाईकमान के दो शक्तिशाली स्तंभ हैं। राहुल ने भले ही पार्टी अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया हो, परंतु पार्टी को पुनर्स्थापित करने का अपरोक्ष दायित्व अब भी उनके सिर पर है, तो प्रियंका को तो पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को देखते हुए वहाँ का प्रभारी महासचिव बना रखा है, परंतु भाई-बहन की इस जोड़ी में राजनीतिक अपरिपक्वता दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती। राहुल गांधी तो अक्सर अपनी इस अपरिपक्वता के कारण पार्टी के लिए मुसीबत, जनता के बीच किरकिरी और अदालती मुकदमों के चक्कर में फँसते रहते हैं, तो प्रियंका की राजनीतिक कुशलता की भी लोकसभा चुनाव 2019 में हवा निकल गई, जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अपेक्षित सीटें नहीं मिलीं।

पार्टटाइम पॉलिटिक्स का पाखंड

वास्तव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) का यह आरोप कई बार सत्य प्रतीत होता है कि राहुल गांधी पार्ट टाइम पॉलिटिक्स करते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि राहुल कभी-कभी, विशेषकर चुनावी समर के दौरान अत्यंत सक्रिय नज़र आते हैं, परंतु अचानक लुप्त हो जाते हैं। कई दिनों तक पता ही नहीं चलता कि राहुल हैं कहाँ ? कहीं से छन कर ख़बर आती है कि राहुल तो छुट्टियाँ मनाने फलाँ जगह गए हुए हैं। इसकी पुष्टि इसलिए नहीं हो पाती, क्योंकि उनकी छुट्टियाँ पूरी तरह गोपनीय रहती हैं। इससे भी किसी को आपत्ति नहीं है, परंतु संकट तब पैदा होता है, जब छुट्टी से लौटते ही बिना कुछ सोचे-समझे, अध्ययन किए विरोधियों पर वार शुरू कर दिए जाते हैं। प्रियंका गांधी को लेकर भी ख़बरें आईं कि वे अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने शिमला गई हैं। प्रियंका कब गईं और कब लौटीं, यह तो कोई नहीं जानता, परंतु चूँकि वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हैं, तो उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार को घेरने का उत्तरदायित्व निभाने के लिए एक अधमरे किसान का वीडियो ट्वीट कर दिया, परंतु कुछ ही समय बाद प्रियंका को यह ट्वीट डिलीट करना पड़ा, क्योंकि वह अधमरा किसान उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में उठ कर भागते हुए देखा गया। इसे ही कहते हैं पार्टटाइम पॉलिटिक्स का पाखंड या साइड इफेक्ट।

‘अधमरे किसान’ ने कराई किरकिरी

बात दरअसल यह थी कि उत्तर प्रदेश में उन्नाव में ट्रांसगंगा प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का स्थानीय किसान विरोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) इस प्रोजेक्ट के लिए किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण करना चाहता है, परंतु किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर ट्रांस गंगा सिटी में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इसके विरुद्ध पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान एक किसान पुलिस की लाठी से घायल होकर ज़मीन पर चित्त हो गया। प्रियंका ने इस किसान का वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, ‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अभी गोरखपुर में किसानों पर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। उनकी पुलिस का हाल देखिए। उन्नाव में किसान लाठियाँ खाकर अधमरा पड़ा है। उसे और मारा जा रहा है। शर्म से आँखें झुक जानी चाहिए। जो आपके लिए अन्न उगाते हैं, उनके साथ ऐसी निर्दयता ?’ प्रियंका इस ट्वीट के ज़रिए अधमरे किसान को प्रतीक बना कर अपनी राजनीति करना चाह रही थीं, परंतु पार्ट टाइम पॉलिटिक्स का पाखंड उस समय खुल गया, जब प्रियंका के ट्वीट के बाद ही एक और वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो को बाद में उत्तर प्रदेश की उन्नाव पुलिस ने भी ट्वीट किया। इस दूसरे वीडियो में प्रियंका के ट्वीट में दिखाया गया वही अधमरा किसान मौका मिलते ही उठ कर दौड़ लगाते हुए देखा गया। वास्तव में यह किसान पुलिस की लाठी से अधमरा नहीं हुआ था, अपितु लाठी से बचने के लिए ज़मीन पर चित्त होकर लेट गया था, परंतु पार्टटाइम पॉलिटिशियन्स प्रियंका ने अपरिपक्वता का परिचय दिया और तथाकथित अधमरे किसान का वीडियो ट्वीट कर दिया, परंतु जब वास्तविकता सामने आई, तो प्रियंका को वह वीडियो कुछ ही देर बाद डिलीट कर देना पड़ा।

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