शत्रुघ्न तो नये हैं, पुराने कांग्रेसी भी दूर कर लें 48 वर्षों की भ्रांति : वाजपेयी ने कभी नहीं कहा इंदिरा को दुर्गा, ये रहा प्रमाण, देखिए VIDEO

तीस वर्षों तक भाजपा में रहे शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेसी हो चुके हैं। सिन्हा भाजपा के स्थापना दिवस यानी गत 6 अप्रैल को भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए और लगे हाथ उन्होंने देश और पूरी दुनिया जिन्हें प्रणाम करती हैं, उन अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद कर लिया। सिन्हा ने कहा, ‘आज नवरात्र है, तो मुझे याद आ रहा है। इसलिए मैं उनको (इंदिरा गांधी) को नमन करता हूँ, प्रणाम करता हूँ और वंदन करता हूँ कि उनकी उनकी (इंदिरा की) उन्होंने (वाजपेयी ने) दुर्गा से तुलना की।’

शत्रुघ्न सिन्हा तो कांग्रेस में बिल्कुल नये हैं। उन्होंने भी पुराने कांग्रेसी नेताओं की तरह 48 वर्षों से चले आ रहे इंदिरा को अटलजी के दुर्गा कहने वाले वाक्य को दोहराया, परंतु क्या वास्तव में अटलजी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था ? खुद वाजपेयी की ज़ुबानी मानें, तो उत्तर है ‘नहीं’। कांग्रेसियों के इस दावे की पड़ताल करने पर इस प्रश्न का उत्तर स्वयं वाजपेयी के मुँह से ही मिल गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने बार-बार इंदिरा को दुर्गा कहे जाने की बात का खंडन किया, परंतु उनके खंडन को अखबार वालों ने किसी कोने में समेट दिया।

आप भी सुनिए वाजपेयी का वह इंटरव्यू, जो उन्होंने देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद इंडिया टीवी को दिया था :

कब और क्यों पैदा हुआ यह भ्रम ?

1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में करारी शिकस्त दी। पाकिस्तान को धूल चटा दी। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा थीं, जबकि विपक्ष के नेता वाजपेयी थे। कहा जाता है कि युद्ध के बाद संसद में वाजपेयी ने कहा था, ‘जिस तरह इंदिरा ने इस लड़ाई में अपनी भूमिका अदा की है, वह वाकई क़ाबिल-ए-तारीफ़ है।’ सदन में युद्ध पर बहस चल रही थी, परंतु वाजपेयी ने कहा, ‘हमें बहस को छोड़ कर इंदिरा की भूमिका की बात करनी चाहिए, जो किसी दुर्गा से कम नहीं थी।’

वाजपेयी के इसी बयान से देश में एक तरफ वाजपेयी के उदारवादी चेहरे की प्रशंसा हुई, तो दूसरी तरफ यह भ्रम फैल गया कि वाजपेयी ने विपक्ष का नेता होते हुए भी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दुर्गा की उपाधि दी। इसके बाद से पिछले 48 वर्षों से हर कांग्रेस नेता वाजपेयी के इसी बयान को आधार बना कर भाजपा को विपक्ष की भूमिका सिखाते रहे हैं, परंतु जैसा कि आपने उपरोक्त वीडियो में देखा कि वाजपेयी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वयं इस बात से इनकार किया कि उन्होंने इंदिरा को कभी दुर्गा नहीं किया। उन्होंने कहा कि ये संसद में दिए बयान के अगले ही दिन उन्होंने खंडन भी किया था, परंतु अखबारों ने कोने में उस खंडन को छापा।

विजय त्रिवेदी के पुस्तक के दावे पर भी सवाल

वाजपेयी के इंदिरा को दुर्गा कहे जाने का उल्लेख पत्रकार विजय त्रिवेदी की पुस्तक ‘हार नहीं मानूँगा – एक अटल जीवन गाथा’ में भी मिलता है। इस पुस्तक में 1975 के आपातकाल के इस किस्से का जिक्र है। आपातकाल के दौरान वाजपेयी गिरफ्तार हुए। हालाँकि अपेंडिक्स के इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। यहीं पर देवी प्रसाद त्रिपाठी उर्फ डीपीटी भी भर्ती थे। वाजपेयी और डीपीटी दोनों को प्राइवेट कमरे मिले थे। वाजपेयी और डीपीटी दोनों खाने-पीने के शौकीन थे। शाम को महफिल सजी और इस दौरान वाजपेयी ने डीपीटी से कहा, ‘इंदिरा ने अपने बाप नेहरू से कुछ नहीं सीखा। मुझए दुःख है कि मैंने उन्हें दुर्गा कहा।’

इस पुस्तक के इस अंश से तो स्पष्ट हो जाता है कि वाजपेयी ने इंदिरा को दुर्गा कहा होगा, तभी तो इस पुस्तक में लिखे अनुसार वे इंदिरा को दुर्गा कहे जाने पर अफसोस जता रहे हैं, परंतु पुस्तक का यह अध्याय भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि यह बात वाजपेयी के एक मित्र के हवाले से लिखी गई है। पुस्तक में कहीं नहीं लिखा गया है कि वाजपेयी स्वयं बोल रहे हैं। पुस्तक में जो लिखा गया है, वह वाजपेयी के किसी मित्र के द्वारा सुनाई गई घटना का हिस्सा है। ऐसे में वाजपेयी के मित्र के हवाले से कही गई बात से अधिक वाजपेयी के मुँह से कही गई बात पर ही अधिक विश्वास किया जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी इंदिरा को दुर्गा नहीं कहा।

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