राम मंदिर ही नहीं, ट्रस्ट की नींव में भी होगा साम्प्रदायिक सौहार्द का ‘लोहा’

* 2 अप्रैल, 2020 राम नवमी बन सकती है ऐतिहासिक

* प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर सकते हैं राम मंदिर का शिलान्यास

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अदालत सुप्रीम कोर्ट (SC) के ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण की दिशा में कार्य करने को लेकर सक्रिय हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पूरे देश ने जिस तरह साम्प्रदायिक सौहार्द और हिन्दू-मुस्लिम एकता तथा भाईचारे का समग्र विश्व को संदेश दिया, उसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अति उत्साहित हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में ‘सबका साथ-सबका विकास’ नारे के साथ पहली बार प्रधानमंत्री बनने वाले नरेन्द्र मोदी ने 2019 में इस नारे में ‘सबका विश्वास’ जोड़ा था, जिसका संदेश था कि उनकी सरकार देश के उन नागरिकों का भी विश्वास अर्जित करने का प्रयास करेगी, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) को वोट नहीं दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकेत स्पष्ट था कि उनकी सरकार 136 करोड़ नागरिकों के हितों के बारे में सोचेगी, जिसमें भाजपा के प्रति अविश्वास रखने वाले वर्ग का विश्वास जीतने का भी प्रयास किया जाएगा। मोदी ने 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल (2014-2019) के दौरान भी सदैव हर कार्य इसी लक्ष्य के साथ किया, जिसमें सभी नागरिकों की भलाई छिपी हो। यद्यपि इसके बावजूद मोदी को यह लगता रहा है कि उनकी पार्टी अभी भी जनता के एक वर्ग विशेष का दिल नहीं जीत सकी है, परंतु मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ नामक नया नारा देकर पूरे देश को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार जनता के हर वर्ग-समूह के हित में ही काम करेगी।

इस बीच 491 वर्षों से देश के बहुसंख्यक हिन्दुओं और अल्पसंख्यक मुस्लिमों के बीच विद्वेष का कारण रहे राम जन्म भूमि विवाद पर उच्चतम् न्यायालय का निर्णय आने के बाद भी जब देश में साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित रहा, तो मोदी का उत्साह और बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय को साधारण तरीके से नहीं, अपितु अत्यंत विशेष रूप से तथा एक अवसर के रूप में लागू करेंगे और इसका पहला दृष्टांत देखने को मिलेगा राम मंदिर ट्रस्ट में।

साम्प्रदायिक सौहार्द का अनुपम दृष्टांत बनेगा राम मंदिर ट्रस्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार केन्द्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है और सरकार ने इस ट्रस्ट के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ भी कर दी है, परंतु यह ट्रस्ट कोई साधारण ट्रस्ट नहीं होगा, क्योंकि इस ट्रस्ट को देश में साम्प्रदायिक सौहार्द का नया इतिहास लिखने का काम करना है। इसीलिए राम मंदिर ट्रस्ट सोमनाथ मंदिर निर्माण ट्रस्ट की तर्ज पर गठित होगा, परंतु यह सोमनाथ की तरह 6 सदस्यीय नहीं होगा। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या 20 से अधिक हो सकती है। गृह मंत्री अमित शाह या पर्यटन मंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता में गठित होने वाले ट्रस्ट में राम जन्म भूमि न्यास को सर्वोच्च वरीयता दी जाएगी। साथ ही निर्मोही अखाड़ा सहित सामाजिक क्षेत्र के सुविख्यात लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा, परंतु इससे भी बड़ी बात यह होगी कि ट्रस्ट में केवल हिन्दू धर्म के लोग नहीं होंगे। मोदी सरकार का प्रयास है कि राम मंदिर सभी धर्म के लोगों के सुझावों, विचारों और मार्गदर्शन में बने। इसीलिए राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में मुस्लिम समाज की अविवादास्पद तथा विख्यात हस्तियों का समावेश किया जाएगा, ताकि पूरी दुनिया में भारत के भाई-चारे और साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश जाए।

28 वर्ष बाद अयोध्या जा सकते हैं मोदी

नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इससे पहले वे चुनावी राजनीति से दूर थे और केवल भाजपा संगठन में कार्यरत् थे। इस दौरान राम मंदिर आंदोलन के समय मोदी ने भाजपा नेता के रूप में अयोध्या की कई यात्राएँ की होंगी, परंतु 6 दिसम्बर, 1992 को विवादास्पद बाबरी मस्जिद ढाँचे के विध्वंस के बाद कभी अयोध्या नहीं गए। मोदी ने लोकसभा का पहला चुनाव 2014 में उत्तर प्रदेश की ही धर्म नगरी वाराणसी से लड़ा, परंतु अपने पाँच वर्ष से अधिक के कार्यकाल के दौरान कभी अयोध्या नहीं गए। इतना ही नहीं, भाजपा और मोदी ने लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भी अपने घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण की प्रतिबद्धता दर्शाई, मोदी ने अपने भाषणों में राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई में देरी करवाने का विरोधियों पर आरोप लगाया, परंतु खुल कर यह नहीं कहा कि उनकी सरकार राम मंदिर बनवाएगी। अब जबकि राम मंदिर निर्माण का मार्ग वैधानिक रूप से प्रशस्त हो गया है, तब मोदी 28 वर्षों के बाद 2 अप्रैल, 2020 राम नवमी के दिन अयोध्या जा सकते हैं। मोदी सरकार की योजना है कि इससे पहले राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट का गठन हो जाए, ताकि राम नवमी के दिन भगवान राम के मंदिर का सूत्रपात हो सके। मोदी स्वयं राम नवमी के दिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास कर सकते हैं।

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