स्वर कोकिला लता मंगेशकर पर साँसों का संकट : जानिए भारत रत्न लता दीदी के बारे में अनसुने तथ्य

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 12 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। स्वर कोकिला के नाम से विख्यात भारत रत्न लता मंगेशकर पर साँसों का संकट बना हुआ है। इस बीच दवाओं और दुआओं का दौर लगातार जारी है। 36 भाषाओं में 1,000 से अधिक गीतों को अपनी कोकिल कंठी आवाज़ से यादगार बनाने वाली लता मंगेशकर को साँस लेने में तकलीफ होने से रविवार देर रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उपचार के दौरान सेहत और बिगड़ने पर सोमवार सुबह उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है, जहाँ उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है। लता मंगेशकर के परिवार के अनुसार अभी उनकी स्थिति स्थिर है। दूसरी ओर उनकी बीमारी को लेकर उनके परिवार या अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक बयान या मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है। लता दीदी के नाम से जानी जाती लता मंगेशकर के फैन बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ से लेकर हर कोई सोशल मीडिया पर उनकी सलामती को लेकर लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। 90 वर्षीय लता मंगेशकर का उपचार करने वाली डॉ. पतित समधानी के अनुसार उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, जो राहत की खबर है। अपुष्ट खबरों के अनुसार लता मंगेशकर फेफड़ों के गंभीर इन्फेक्शन से जूझ रही हैं और इसी के साथ उन्हें निमोनिया भी हो गया है, जिसके चलते उनका बायाँ वेट्रिकुलर ने काम करना बंद कर दिया है, जो कि हृदय को सबसे अधिक ऑक्सीजन पहुँचाता है। शरीर को सामान्य रूप से काम करने के लिये इसका ठीक से काम करना जरूरी होता है। लता मंगेशकर को 2001 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही उन्हें भारतीय फिल्म इंडस्ट्रीज़ के सबसे बड़े दादा साहब फाल्के अवार्ड तथा तीन नेशनल अवॉर्ड्स भी प्राप्त हुए हैं।

लता मंगेशकर के अनसुने तथ्य

28 सितंबर 1929 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर की राशि कर्क है, इसलिये परिवार ने उनका नाम हेमा रखा था।

उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर हेमा से बहुत प्रेम करते थे और उन्हें हृदया बुलाते थे।

उनके पिता के एक नाटक भवबंधन में महिला पात्र लतिका के नाम से उनका वर्तमान नाम लता पड़ा।

लता बचपन में दो ही दिन के लिये स्कूल गई थी। पहले दिन जब उन्होंने स्कूल में गाना गाया तो उनकी आवाज़ की बहुत प्रशंसा हुई। दूसरे दिन वे अपनी छोटी बहन आशा को भी साथ ले गईं। हालाँकि इस बार शिक्षक ने उन्हें डाँट दिया और कहा कि यह स्कूल है, नर्सरी नहीं। इसके बाद लताजी बहन आशा को लेकर घर लौट आईं और फिर कभी स्कूल नहीं गईं।

लताजी की माताजी का नाम शेवंती मंगेशकर था, वे मूलतः गुजराती थी। बाद में उनका नाम सुधामती रखा गया था। शेवंती दीनानाथ की दूसरी पत्नी थीं, उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था और वे शेवंती की ही बहन थीं। लताजी के नाना सेठ हरिदास रामदास लाड गुजराती व्यवसायी थे।

दीनानाथ का मूल नाम दीनानाथ हर्डीकर था, परंतु उन्होंने अपने पैतृक गाँव गोवा के मंगेशी की स्मृति में अपना सरनेम मंगेशकर रखा था।

उन्होंने बॉलीवुड में जो पहला गाना गाया, उसे फिल्म से ही निकाल दिया गया था। उन्होंने पहला गाना वसंत जोगलेकर की फिल्म कीर्ति हसाल के लिये गाना गाया था। उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फिल्मों में गाना गाये, इसलिये उनके विरोध के चलते इस गाने को फिल्म से हटा दिया गया था।

लता का जन्म भले ही इंदौर में हुआ, परंतु उनका लालन-पालन महाराष्ट्र में हुआ। वे बचपन से ही गायक बनना चाहती थी, क्योंकि उनके पिता भी रंगमंच के कलाकार और गायक थे। उनके परिवार में तीन छोटी बहनें ऊषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोंसले हैं, जबकि एक भाई हृदयनाथ मंगेशकर हैं।

सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्मी लता ने बचपन में कुंदनलाल सहगल की फिल्म चंडीदास देख कर कहा था कि वे बड़ी होकर सहगल से शादी करेंगी, परंतु लताजी ने आजीवन विवाह नहीं किया। क्योंकि पिता की मृत्यु के बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में उन पर अपने बहन-भाई सहित परिवार की जिम्मेदारी आ गई, जिसे निभाने के लिये उन्होंने शुरुआती दौर में कुछ मराठी फिल्मों में अभिनय भी किया और भाई-बहन की परवरिश करने के दौरान उन्हें अपनी शादी के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला।

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