VIDEO : मोदी की कूटनीति का APG कायल, चीन-पाक घायल, UNSC में फिर बजा भारत का डंका

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 26 जून, 2019 (YuvaPress.com)। शीर्षक पढ़ कर आश्चर्य हुआ होगा, परंतु यह सत्य है। भारत का धुर विरोधी पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनकी सरकार की कुशल कूटनीति के बीच ऐसा बुरा फँसा कि उसके पास भारत का समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के यार और भारत के साथ चालबाज़ी में माहिर चीन को भी भारत का समर्थन करने के लिए विवश होना पड़ा।

वास्तव में यूनो की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में हर वर्ष 5 नए अस्थायी सदस्यों का चुनाव होता है। भारत 7 वर्ष बाद पुन: यूएनएससी में अस्थायी सदस्य पद प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारी करने का मन बनाया और उसे उस समय बड़ी सफलता मिली, जब एशिया-प्रशांत समूह (APG) ने यूएनएससी में भारत की दो वर्षीय अस्थायी सदस्यता का समर्थन कर दिया। पीएम मोदी की कुशल और घातक कूटनीति तथा संयुक्त राष्ट्र में मौजूद भारतीय अधिकारियों की कार्यकुशलता के चलते एशिया-प्रशांत समूह ने भारत का समर्थन किया, जो मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत है। इस जीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस समूह के सदस्य देशों में पाकिस्तान भी शामिल है।

जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से भारत का संयुक्त राष्ट्र सहित प्रत्येक अंतररराष्ट्रीय मंच पर दबदबा बढ़ा है। अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे बड़े और शक्तिशाली देश जहाँ भारत को मान-सम्मान देते हैं, वहीं मोदी सरकार की घातक घेराबंदी के आगे यूएनएससी में चीन को भी मई-2019 में उस समय ज़ोरदार झटका लगा, जब मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के ब्रिटेन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।

ख़ैर, यूएन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधियों पर मोदी की कूटनीति लगातार भारी पड़ रही है। यूएनएससी में मसूद पर मात खाने के बाद अब पाकिस्तान को न चाहते हुए भी भारत की अस्थायी सदस्यता का समर्थन करना पड़ा, क्योंकि एशिया प्रशांत समूह का यही निर्णय था। इस समूह में कुल 55 देश हैं, जिनमें पाकिस्तान के अलावा अफग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, कुवैत, किर्गीज़स्तान, मलेशिया, मालदीव, म्यानमार, नेपाल, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, श्रीलंका, सीरिया, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और वियतनाम शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अक़बरुद्दीन ने मंगलवार को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय। एशिया-प्रशांत समूह ने यूएनएससी में 2021/22 के दो वर्षों के अस्थायी कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का अनुमोदन सर्वसम्मति से संयुक्त राष्ट्र में किया। सभी 55 सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद।’

उल्लेखनीय है कि वर्ष जनवरी-2021 से दो वर्षों की अस्थायी सदस्यता का कार्यकाल आरंभ होगा। इसके लिए चुनाव जून-2020 में होंगे। 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा यूएनएससी के 5 अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है। भारत इससे पहले 2011/2012 तक अस्थायी सदस्य था। भारत पहली बार 1950 में दो साल के लिए यूएनएससी का अस्थायी सदस्य बना था। इसके बाद 1967, 72, 77, 85 और 91 में भी भारत अस्थायी सदस्य रहा। मोदी के कार्यकाल में भारत पहली बार यूएनएससी का अस्थायी सदस्य बनेगा।

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