नरेन्द्र मोदी की राह के हर शूल को फूल बनाते रहे अरुण जेटली !

* मोदी को CM से PM बनाने में निभाई बड़ी भूमिका

* राज्यसभा में मनमोहन सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा

* दिग्गज भाजपा नेताओं के बीच बनवाया PM प्रत्याशी

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। एक चाय बेचने वाले से आम आदमी तक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जनसंघ तथा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) के आम स्वयंसेवक व कार्यकर्ता तक नरेन्द्र मोदी ने निजी और सार्वजनिक जीवन में कई दोस्त बनाए, तो कई लोग उनकी कार्यशैली के कारण उनके दुश्मन बन गए। जब तक वे संगठन में थे, तब तक चुनावी राजनीति से उनका कोई संबंध नहीं था, परंतु 2001 में अचानक मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनते हैं और 2012 के बाद पूरे देश के लोकप्रिय नेता बन जाते हैं।

जनसंघ या भारतीय जनता पार्टी में परिवारवाद का कभी साया नहीं रहा और इसी कारण इसके अधिकांश नेता परिपक्वता और लोकप्रियता से लबरेज रहते आए हैं। कभी अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज का बोलबाला रहा, तो राज्यों में भी भाजपा में उमा भारती, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, मनोहर पर्रिकर जैसे अनेक नेताओं का उदय होता रहा, जो लोकप्रियता के मामले में एक-दूसरे से कमतर नहीं थे। बड़े-बड़े दिग्गज नामों के बीच 2012 में अचानक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे, तो राष्ट्रीय राजनीति में विशेषकर भाजपा की अग्रिम पंक्ति के नेताओं में अनेक अंतर्विरोध पैदा हुए। ऐसे में मोदी की आगे की राह अत्यंत पथरीली थी, परंतु इस सबके बीच एक शख्स ऐसा था, जो मोदी की राह के हर शूल को फूल बनाने में जुटा हुआ था।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली की, जिनका आज 66 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 28 नवम्बर, 1952 को दिल्ली में जन्मे और स्कूली शिक्षा के बाद बीकॉम करते हुए एलएलबी तक पढ़ाई करने वाले जेटली विद्यार्थी काल से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (अभाविप-ABVP) से जुड़े और 1973 इसके अध्यक्ष बने। आपातकाल के दौरान 19 महीने जेल में काटे। जय प्रकाश नारायण द्वारा गठित राष्ट्रीय छात्र समिति के संयोजक रहे जेटली ने आपातकाल के बाद जनसंघ में प्रवेश किया। 1980 में भाजपा के गठन के बाद जेटली को दिल्ली भाजपा सचिव बनाया गया। 1991 से जेटली भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जेटली ने राजनीति के साथ-साथ अनेक उच्च न्यायालयों सहित उच्चतम् न्यायालय में वक़ालत भी की और उनकी यही वक़ालत वर्तमान भाजपा के दो दिग्गज नेताओं नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के राह की हर वैधानिक चुनौतियों को समाप्त करने में काम आई।

बात गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को लगातार तीसरी जीत के बाद की है। देश के अनेक हिस्सों में मोदी के गुजरात का विकास मॉडल छा गया और देखते ही देखते गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के लोगों के लिए प्रधानमंत्री पद की पहली पसंद बन कर उभरे। यहीं से जेटली ने मोदी के ‘मिशन प्रधानमंत्री’ का दमदार खाक़ा खींचा। 2012-2014 के दौर में भाजपा पर लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती जैसे कई दिग्गजों की मजबूत पकड़ थी, परंतु जेटली ने जनता के मिजाज को परखते हुए अपनी किसी भी निजी महत्वाकांक्षा को ऊपर न आने देते हुए मोदी के दिल्ली आने का मार्ग प्रशस्त करना शुरू किया। गुजरात दंगों को लेकर मोदी को कई कानूनी पेचीदिगयों से बाहर निकालने वाले जेटली ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित कराने में एक रिंग मास्टर की भूमिका निभाई। एक छोर पर सुषमा स्वराज आडवाणी के प्रति अपनी निष्ठावान बनी रहीं, तो दूसरे छोर पर आडवाणी ने भविष्य को भाँपते हुए मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनवाने पर तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित दिग्गज नेताओं के साथ सहमति साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अरुण जेटली संगठन में रह कर जहाँ मोदी के मार्ग के एक-एक काँटे दूर कर रहे थे, वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नता के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की बखिया उधेड़ कर सरकार के विरोध और भाजपा-मोदी के पक्ष में माहौल बनाने में भी जुटे हुए थे। जेटली ने मोदी के दिल्ली पहुँचने से पहले लगे चुनौतियों के अंबार को एक-एक कर छाँटा और हर प्रतिकूल परिस्थिति में मोदी के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े रहे।

अरुण जेटली एक तरह से नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने वाले लीड आर्किटेक्चर बन गए और अंतत: भाजपा ने न केवल 2014 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, अपितु नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन भी गए। मोदी ने सुब्रमण्यन स्वामी जैसे नेताओं के धुर विरोध के बावजूद अपने मंत्रिमंडल में जेटली को वित्त मंत्रालय सौंपा। मोदी के पास मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का तो अनुभव था, परंतु दिल्ली में बैठ कर राजनीति करने और देश चलाने के गुर जेटली ने उन्हें सिखाए। यह जेटली का ही करिश्मा था कि मोदी के नाम पर करंट महसूस करने वाले जनता दल ‘युनाइटेड’ (जेडीयू-JDU) के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार दोबारा एनडीए का हिस्सा बने। यह जेटली का करिश्मा था कि मोदी की अक्सर आलोचना करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के मुँह से मोदी के लिए प्रशंसा के शब्द फूटे।

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